‘मां ही बच्चे की पहली गुरु’:मातृ सम्मेलन में बच्चों के विकास और संस्कारों में माताओं की भूमिका पर हुई चर्चा

‘मां ही बच्चे की पहली गुरु’:मातृ सम्मेलन में बच्चों के विकास और संस्कारों में माताओं की भूमिका पर हुई चर्चा

सिरोही में आदर्श विद्या मंदिर, जावाल के महाराणा प्रताप संस्कार केंद्र ने भील बस्ती में एक मातृ सम्मेलन किया। इसमें बच्चों के विकास और संस्कारों में माताओं की भूमिका पर बात हुई।
जिला संस्कार केंद्र प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित मुख्य वक्ता थे। उन्होंने कहा कि बच्चे के चरित्र और पूरे विकास में मां की भूमिका सबसे खास होती है। मां ही बच्चे की पहली गुरु होती है और घर के संस्कार ही उसका भविष्य बनाते हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य डूंगर सिंह चौहान ने केंद्र की पढ़ाई से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने माताओं को बच्चों की रोज की हाजिरी, साफ-सफाई और दिनचर्या के बारे में भी बताया। कार्यक्रम का संचालन शिल्पा प्रजापति ने किया। इस दौरान संस्कार केंद्र प्रमुख अर्जुन मेघवाल, दशरथ कुमार, संजना पुरोहित और बस्ती की कई महिलाएं मौजूद थीं।

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