Ukraine Strikes Russia: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच डीजल को लेकर एक अहम समझौते की घोषणा हुई। जिसके कुछ ही घंटों बाद यूक्रेनी रक्षा बलों ने रूस के एक अहम एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा हमला किया। यूक्रेन ने दक्षिणी रूस के रोस्तोव-ऑन-डॉन इलाके में नोवोशाख्तिंस्क ऑयल लोडिंग टर्मिनल पर भारी बमबारी की, जिससे ऑयल प्लांट में भीषण आग लग गई।
25 लाख टन क्षमता वाला प्लांट आग की लपटों में घिरा
यूक्रेनी सेना ने अंधेरे का फायदा उठाकर रोस्तोव इलाके में नोवोशाख्तिंस्क ऑयल प्रोडक्ट्स प्लांट के लोडिंग टर्मिनल पर सटीक हमला किया। यह टर्मिनल दक्षिणी रूस के ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर का एक अहम हिस्सा है और इसकी सालाना क्षमता 25 से 35 लाख टन पेट्रोलियम को हैंडल करने की है। इसका इस्तेमाल स्टोरेज, नदी और समुद्री रास्तों से चलने वाले टैंकरों में ईंधन भरने और ऑयल प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट के लिए किया जाता है। यूक्रेनी हमले के तुरंत बाद प्लांट में आग लग गई। आग की लपटें और काले धुएं के गुबार कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहे थे।
रूस के लिए क्यों अहम है यह टर्मिनल?
नोवोशाख्तिंस्क टर्मिनल युद्ध के मोर्चे पर तैनात रूसी सैनिकों को फ्यूल और डीजल की लगातार सप्लाई के लिए एक जरूरी हब है। यूक्रेन ने इस सप्लाई चेन को तोड़ने के मकसद से इस डिपो को निशाना बनाया। इसके अलावा, यूक्रेनी हमलों से रोस्तोव इलाके में एक बड़ा रेलवे पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया, जिसका इस्तेमाल रूसी सेना गोला-बारूद और जरूरी सामान पपहुंचाने के लिए करती रही है।
ट्रंप-पुतिन के बीच क्या हुआ समझौता?
यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच डीजल व्यापार को लेकर हुए नए समझौते की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद हुआ। ट्रंप और पुतिन के बीच डीजल डील का मकसद अमेरिका और वैश्विक बाजारों में ईंधन की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाना है।
इस समझौते के तहत, अमेरिका रूसी डीजल निर्यात पर लगे कड़े प्रतिबंधों में ढील देने पर सहमत हुआ। बदले में, रूस अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए तुरंत 3 लाख टन डीजल जारी करने पर सहमत हुआ। योजना के मुताबिक, रूस आने वाले महीनों में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन अतिरिक्त डीजल की सप्लाई करेगा।
समझौते से यूक्रेनी राष्ट्रपति नाराज
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका और रूस के बीच हुए समझौते पर अपनी नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब यूक्रेन का शांति प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा था, तब वॉशिंगटन ने चुपके से रूस के साथ यह डील कर ली, जिससे पता चलता है कि बातचीत सिर्फ एक दिखावा थी।
जेलेंस्की ने कहा कि पुतिन को ऐसे तोहफ़े देकर शांति हासिल नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि डीजल की बिक्री से रूस जो अरबों डॉलर कमाएगा, उसका इस्तेमाल सीधे तौर पर यूक्रेन और उसके नागरिकों पर हमले करने में किया जाएगा।

