गोरखपुर में आगामी गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर बजरंग दल ने सुरक्षा, अनुशासन और सांस्कृतिक मर्यादा से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि जिले में होने वाले सभी गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। इन मांगों को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने DM को ज्ञापन भी सौंपा। बजरंग दल ने कहा कि गरबा और डांडिया आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। ऐसे में कार्यक्रम स्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जानी चाहिए। संगठन ने अश्लील हरकत, अभद्र व्यवहार, छेड़छाड़ और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। अश्लील और आपत्तिजनक गीतों पर रोक की मांग संगठन ने आयोजनों में अश्लील, आपत्तिजनक या धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले गीतों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। बजरंग दल का कहना है कि गरबा और डांडिया केवल मनोरंजन के कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े आयोजन हैं। इसलिए इनके दौरान कार्यक्रम की गरिमा और धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रवेश व्यवस्था को लेकर भी सख्त नियम की मांग बजरंग दल ने आयोजन समितियों की ओर से कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश के लिए स्पष्ट और कानूनसम्मत नियम निर्धारित करने की मांग की है। संगठन ने गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है। साथ ही उपद्रव, छेड़छाड़ या अनुशासन भंग करने वाले लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है। बजरंग दल के प्रांत संयोजक दुर्गेश राव ने कहा कि गरबा और डांडिया भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा हैं। ऐसे आयोजनों में शालीनता, सुरक्षा और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों के दौरान किसी भी तरह की अश्लीलता, छेड़छाड़ या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए प्रशासन को प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने आयोजकों से भी कार्यक्रमों की गरिमा बनाए रखने और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की। आयोजनों पर पुलिस-प्रशासन की रहे प्रभावी निगरानी
संगठन ने मांग की है कि गरबा और डांडिया कार्यक्रमों के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की प्रभावी निगरानी रहे। आयोजन स्थलों पर पर्याप्त सुरक्षा बल की व्यवस्था की जाए और किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति सामने आने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले आयोजकों या व्यक्तियों के खिलाफ प्रचलित कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।

