SIR रद्द करने की मांग, 10 अक्टूबर को Jantar Mantar तक मार्च करेगी कॉजपा

SIR रद्द करने की मांग, 10 अक्टूबर को Jantar Mantar तक मार्च करेगी कॉजपा

बेंगलुरु, आठ अक्टूबर एसआईआर की कवायद के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का आह्वान करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेता अभिजीत दीपके ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी पार्टी एसआईआर को रद्द करने तथा कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के लिए जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को नयी दिल्ली के जंतर-मंतर तक मार्च करेगी। दीपके ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनके नेताओं को हिरासत में लिया जाता है या गिरफ्तार किया जाता है, तब भी आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक सभाओं पर पाबंदी लगाने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की।

दीपके ने कहा, ‘‘जंतर-मंतर भारत के लोगों का है, यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नहीं है।’’
कॉजपा संस्थापक ने सवाल किया, ‘‘अगर मुंबई और बेंगलुरु में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो सकते हैं तो अमित शाह दिल्ली में इसकी अनुमति क्यों नहीं दे रहे हैं?’’
दीपके ने राजनीतिक दलों, नागरिक समाज संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं और इस कवायद में निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवालों के घेरे में है। कॉजपा नेता ने कहा, ‘‘एसआईआर भाजपा नीत सरकार द्वारा भारत में लोकतंत्र को खत्म करने के लिए किया जा रहा सबसे बड़ा घोटाला है।’’
उन्होंने ऐसे लोगों की गवाही का हवाला दिया, जिन्हें कथित तौर पर मतदाता रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि उन्होंने अपने जीवित होने के प्रमाण के तौर पर आधार, पैन एवं अन्य वैध दस्तावेज पेश किए थे।

दीपके ने सवाल किया कि जीवित मतदाताओं को मृत कैसे घोषित किया जा सकता है और उनके वोट कैसे हटाए जा सकते हैं। उनके अनुसार, भाजपा एवं निर्वाचन आयोग मिलकर उन लोगों के वोट हटाने का काम कर रहे हैं, जो सत्तारूढ़ दल का समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र इस बात पर आधारित है कि लोग अपनी सरकार चुनें, जबकि एसआईआर में सरकार यह तय कर रही है कि कौन मतदाता बना रह सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार यह तय कर रही है कि कौन मतदाता होगा और कौन मतदान नहीं करेगा।’’ उन्होंने इस प्रक्रिया को ‘‘असंवैधानिक’’ बताया। दीपके ने विपक्षी नेताओं से जुड़े निर्वाचन क्षेत्रों में कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का जिक्र करते हुए पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नाम लिया तथा सवाल किया कि क्या यह महज संयोग है या किसी पैटर्न का संकेत। उन्होंने सवाल किया, ‘‘अगर हम मानते हैं कि निर्वाचन आयोग के साथ भाजपा की कोई संलिप्तता नहीं है, तो हमेशा विपक्षी नेता ही क्यों हारते हैं?

और इसका फायदा हमेशा भाजपा को ही क्यों मिलता है?’’
उन्होंने कहा कि कॉजपा कथित तौर पर वोट हटाए जाने के लिए जवाबदेही तय करने और एसआईआर को रद्द करने की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर तक मार्च करेगी। उन्होंने सवाल किया कि मुंबई और बेंगलुरु में प्रदर्शन की अनुमति दी जा सकती है तो दिल्ली में सभा पर पाबंदी क्यों लगाई जा रही है। दीपके ने कहा कि दिल्ली पुलिस को लोगों के अधिकारों की रक्षा करने का तरीका कर्नाटक पुलिस से सीखना चाहिए।

कॉजपा नेता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना की। उन्होंने कहा कि देश या जंतर-मंतर उनका नहीं है और वे केवल ‘‘लोगों की सेवा के लिए निश्चित कार्यकाल वाले सेवक’’ हैं। उन्होंने कहा कि कॉजपा देश को अस्थिर करने की कोशिश नहीं कर रही है और दोहराया कि उसकी मांग कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र से जवाबदेही तय करने की है।

कॉजपा प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दिल्ली समेत कई राज्यों में पार्टी से जुड़े लोगों और आंदोलन में शामिल युवाओं को ‘‘बड़े पैमाने पर हिरासत में’’ लिया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हममें से कोई भी गिरफ्तारी या हिरासत से नहीं डरता। हमारे साथ हों या हमारे बिना, प्रदर्शन जारी रहना चाहिए।’’
इससे पहले सभा को संबोधित करने वाले अभिनेता प्रकाश राज ने कहा कि कर्नाटक के नागरिक समाज संगठनों ने एसआईआर में कथित अनियमितताओं का दस्तावेजीकरण करने में करीब एक साल बिताया है और अपने निष्कर्षों को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया है।

उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण के समक्ष पेश किए गए बयान, जिनमें कथित तौर पर मतदाता रिकॉर्ड में मृत घोषित किए गए लोगों के बयान भी शामिल हैं, से पता चलता है कि यह मुद्दा कर्नाटक तक सीमित नहीं है। प्रकाश राज ने मीडिया से एसआईआर पर ध्यान केंद्रित करने की अपील की और कहा कि 10 अक्टूबर को दिल्ली जाने वाले युवा प्रदर्शनकारियों को उनका और कर्नाटक के नागरिक समाज संगठनों का समर्थन हासिल है। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन कर्नाटक तक सीमित अभियान से बढ़कर व्यापक राष्ट्रीय संघर्ष बन गया है।

उन्होंने कथित अनियमितताओं का दस्तावेजीकरण करने तथा प्रभावित मतदाताओं को न्यायाधिकरण के समक्ष लाने में शामिल संगठनों और युवा कार्यकर्ताओं का आभार जताया।

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