FII हिस्सेदारी घटने से HDFC Bank के Share में 1% से अधिक की गिरावट

FII हिस्सेदारी घटने से HDFC Bank के Share में 1% से अधिक की गिरावट

एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गुरुवार, 8 अक्टूबर को दबाव देखने को मिला। सितंबर तिमाही के शेयरधारिता आंकड़ों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी में बड़ी कमी सामने आने के बाद बैंक के शेयर करीब 1% से ज्यादा नीचे कारोबार करते दिखे। इसके साथ ही निवेशकों की नजर नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनूप बागची की नियुक्ति और बैंक के आगे के प्रदर्शन पर भी बनी हुई है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, सितंबर तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एचडीएफसी बैंक में अपनी हिस्सेदारी 2.43% घटाई है। इससे बैंक में उनकी हिस्सेदारी जून तिमाही के 41.82% से घटकर 39.39% रह गई है। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी 1.69% बढ़ाकर 43.44% कर ली है।

सरकार और आम शेयरधारकों की हिस्सेदारी में भी मामूली बढ़ोतरी हुई है। सरकार की हिस्सेदारी 0.01% बढ़कर 0.19% और आम शेयरधारकों की हिस्सेदारी 0.69% बढ़कर 16.96% हो गई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली को बाजार में बैंक के शेयर पर दबाव की एक वजह माना जा रहा है।

गुरुवार सुबह 11:35 बजे एचडीएफसी बैंक का शेयर 1.3% गिरकर 693.45 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इसी दौरान बैंक निफ्टी भी 0.5% की गिरावट के साथ 54,783.15 पर था।

गौरतलब है कि बैंक के शेयरों में कमजोरी ऐसे समय आई है, जब निवेशक अनूप बागची को नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाए जाने के असर का आकलन कर रहे हैं। ज्यादातर ब्रोकरेज कंपनियों ने उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है, लेकिन कुछ विश्लेषकों का मानना है कि नए नेतृत्व को अपनी टीम तैयार करने और बैंक की कार्यप्रणाली में बदलाव लाने में समय लग सकता है।

नुवामा के बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र के प्रमुख विश्लेषक आनंद दामा के मुताबिक, बागची को शुरुआत में अपनी टीम को दोबारा मजबूत करना होगा। इसके बाद लंबे समय में उनके अनुभव से नए विचार आने और बैंक से जुड़े प्रशासन संबंधी चिंताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

बागची फिलहाल आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। इससे पहले वह आईसीआईसीआई बैंक में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं, जहां उन्होंने खुदरा और थोक बैंकिंग कारोबार संभाला था। वह करीब 6 साल तक आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का नेतृत्व भी कर चुके हैं। उनकी उम्र 56 वर्ष है, इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के तहत उनके पास 70 वर्ष की उम्र तक बैंक का नेतृत्व करने के लिए लंबा समय है।

मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, बैंक के नेतृत्व को लेकर बनी एक बड़ी चिंता अब दूर हुई है। ब्रोकरेज के मुताबिक, बागची का अनुभव बैंक के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

बैंक ने सितंबर के अंत में जमा में करीब 18.8% और सकल कर्ज में 16.3% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी के आने के बाद बैंक में टीम और कामकाज से जुड़े कुछ बदलाव हो सकते हैं। इससे अगले कुछ तिमाहियों में प्रदर्शन पर दबाव रह सकता है।

बता दें कि 2023 में मूल कंपनी के साथ विलय के बाद एचडीएफसी बैंक की वृद्धि और मार्जिन पर दबाव रहा है। मार्च में चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे से भी निवेशकों की चिंता बढ़ी थी, हालांकि स्वतंत्र कानूनी समीक्षा में उनके आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी।

फिलहाल बैंक का शेयर आईसीआईसीआई बैंक की तुलना में समायोजित बही मूल्य के आधार पर करीब 25% की छूट पर कारोबार कर रहा है। 2025 में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से शेयर करीब 31% नीचे आ चुका है। बर्नस्टीन के विश्लेषकों का मानना है कि बागची के पास बैंक के प्रदर्शन की धारणा और निवेशकों की उम्मीदों को नए सिरे से तय करने का अच्छा मौका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *