तेल बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों पर बढ़ते हमलों की खबरों और अमेरिका के खाड़ी तट पर तूफान की तैयारी के बीच कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं। ब्रेंट कच्चा तेल फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, ब्रेंट कच्चा तेल 105.02 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यह बुधवार के बंद भाव से 4.81% से अधिक की बढ़त है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से करीब 5% ज्यादा है।
तेल की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की ओर से कच्चे तेल और ईंधन के भंडार को बाजार में लाने की संभावित योजना की जानकारी सामने आई थी। G-7 देशों ने पिछले सप्ताह करीब 100 मिलियन बैरल कच्चे तेल और ईंधन जारी करने पर सहमति जताई थी। इससे बाजार में यह उम्मीद बनी थी कि अतिरिक्त आपूर्ति से कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
हालांकि, बाजार के जानकारों का मानना है कि इस संभावित आपूर्ति का असर पहले ही कीमतों में काफी हद तक शामिल हो चुका है। ऐसे में ईरान से जुड़ी नई घटनाओं ने तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। खबरों के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों पर हमले पहले की तुलना में ज्यादा हो गए हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व में चलने वाले एक सूचना तंत्र से मिले आंकड़ों में 28 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच ही करीब 12 हमलों की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं का सीधा असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकरों की आवाजाही पर पड़ा है।
गौरतलब है कि दुनिया के तेल व्यापार के लिए होर्मुज स्ट्रेट बेहद अहम है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को इस रास्ते से टैंकरों की आवाजाही जुलाई के अंत के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई।
दूसरी तरफ, अमेरिका के खाड़ी तट पर भी मौसम ने तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। वहां तूफान के आने से पहले तेल उत्पादकों ने कुछ उत्पादन बंद करना शुरू कर दिया है। रिफाइनरियों को भी संभावित असर से निपटने के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में कच्चे तेल और ईंधन की उपलब्धता पर दबाव पड़ सकता है।
एएनजेड के विश्लेषक डेनियल हाइन्स ने रॉयटर्स से कहा कि पहले ऐसे हमलों के बाद फारस की खाड़ी से तेल की आपूर्ति कम हुई है। लेकिन इस बार उत्पादक अपने टैंकरों को नुकसान पहुंचने का जोखिम उठाकर भी तेल भेजने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक तेल पहुंचाने के लिए उनके पास फिलहाल कोई आसान विकल्प नहीं है।
बता दें कि अगर होर्मुज मार्ग पर तनाव लंबे समय तक बना रहता है और अमेरिकी खाड़ी क्षेत्र में मौसम संबंधी व्यवधान बढ़ता है, तो इसका असर कच्चे तेल के साथ पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि बाजार की नजर अब ईरान से जुड़े घटनाक्रम और वैश्विक तेल आपूर्ति की स्थिति पर टिकी हुई हैं।

