सुल्तानपुर हादसे में जान गंवाने वाले 4 क्रिकेटरों के शव:3 का अंतिम संस्कार, एक के पिता का इंतजार; चारों गांवों में पसरा मातम

सुल्तानपुर हादसे में जान गंवाने वाले 4 क्रिकेटरों के शव:3 का अंतिम संस्कार, एक के पिता का इंतजार; चारों गांवों में पसरा मातम

सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले देवरिया के चार टेनिस बॉल क्रिकेटरों के शव पोस्टमार्टम के बाद देर रात उनके पैतृक गांव पहुंचे। शव पहुंचते ही चारों गांवों में कोहराम मच गया। परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। गुरुवार को तीन खिलाड़ियों का सरयू नदी के अलग-अलग घाटों पर अंतिम संस्कार किया गया। जबकि मईल क्षेत्र के बलिया उत्तर गांव निवासी इरफान अंसारी के शव को परिजन घर पर रखकर उनके पिता के विदेश से लौटने का इंतजार कर रहे हैं। पिता के गुरुवार शाम तक गांव पहुंचने की संभावना है। भागलपुर के कालीचरण घाट पर मईल थाना क्षेत्र के बगहां गांव निवासी नित्या प्रजापति का अंतिम संस्कार किया गया। उनके पिता मनोज प्रजापति ने मुखाग्नि दी। बेटे को अंतिम विदाई देते समय परिजन बदहवास रहे। लार थाना क्षेत्र के चुरिया गांव निवासी अनिकेत सिंह का अंतिम संस्कार गांव के समीप सरयू नदी के घाट पर किया गया। छोटे भाई अंकित ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिचित मौजूद रहे। लार थाना क्षेत्र के कोहरा गांव निवासी आनंद यादव का भी गांव के समीप सरयू नदी के घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। आनंद के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। परिवार के लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

चार गांवों में पसरा मातम हादसे में चार युवाओं की मौत की खबर से उनके गांवों में मातम छा गया है। ये सभी अलग-अलग प्रतियोगिताओं में टेनिस बॉल क्रिकेट खेलते थे और खेल के जरिए अपनी पहचान बनाने में जुटे थे। लखनऊ में टूर्नामेंट खेलने के बाद घर लौटते समय यह हादसा हुआ। वहीं हादसे में घायल नेटुआबीर निवासी राजू यादव समेत अन्य खिलाड़ियों का इलाज चल रहा है। हादसे ने कई परिवारों के उन सपनों को झकझोर दिया है, जिनमें युवा क्रिकेट के जरिए आगे बढ़ने की उम्मीद लगाए हुए थे। पांच साल एकेडमी में तराशा हुनर, टेनिस बॉल क्रिकेट को बनाया सहारा लार के चुरिया गांव निवासी अनिकेत सिंह क्रिकेट को सिर्फ खेल नहीं, अपना भविष्य मानते थे। करीब पांच साल तक फतेहपुर एकेडमी में प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने टेनिस बॉल क्रिकेट को आगे बढ़ने का माध्यम बनाया। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों में होने वाले टूर्नामेंटों में हिस्सा लेकर पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे। अनिकेत दो भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़े थे। पिता अमरजीत सिंह शराब की दुकान पर मुंशी हैं। मां रंभा देवी का इलाज देवरिया में चल रहा है। छोटे भाई अंकित देवरिया में पढ़ाई करते हैं।

गांव की खेल परंपरा से मिली प्रेरणा, अनिकेत ने भी देखा था बड़ा सपना चुरिया गांव में खेल की पुरानी परंपरा रही है। पूर्व खेल निदेशक आरपी सिंह और राष्ट्रीय स्तर के पहलवान रहे स्वर्गीय राधामोहन यादव जैसे लोगों की उपलब्धियां गांव के युवाओं को प्रेरित करती रही हैं। इसी माहौल में अनिकेत सिंह ने भी क्रिकेट में आगे बढ़ने का सपना देखा था। हार्ड बॉल क्रिकेट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच उन्होंने टेनिस बॉल क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई। अलग-अलग राज्यों में होने वाले टूर्नामेंटों में खेलने के लिए जाते थे। परिवार को उम्मीद थी कि खेल के जरिए वह अपना भविष्य संवारेंगे, लेकिन लखनऊ से लौटते समय हुए हादसे ने परिवार का यह सपना अधूरा छोड़ दिया।

देवरिया टेनिस क्लब टीम का हिस्सा थे आनंद, खेल में नाम कमाने की थी चाहत लार के कोहरा गांव निवासी आनंद यादव देवरिया टेनिस क्लब की टीम का हिस्सा थे। वह लगातार अलग-अलग प्रतियोगिताओं में खेलने जाते थे। छोटे भाई अखिलेश के अनुसार, आनंद लखनऊ के एनई रेलवे मैदान में डीकेजी ग्रुप के टूर्नामेंट में खेलने गए थे। परिवार में पिता की पहले ही मौत हो चुकी है। मां बादामी देवी बेटे के लौटने की राह देख रही थीं। बड़ा भाई चंद्रशेखर सऊदी अरब में रहता है, जबकि अखिलेश गांव पर रहते हैं। बहनें जूली और आंचल विवाहित हैं। आनंद के निधन की खबर से परिवार और गांव में शोक का माहौल है।

छह गेंदों पर छह छक्के लगाए, खुशी की खबर बनी आखिरी याद मईल थाना क्षेत्र के बगहां गांव निवासी 24 वर्षीय नित्या प्रजापति भी दोस्तों के साथ लखनऊ टेनिस बॉल क्रिकेट खेलने गए थे। मैच में छह गेंदों पर छह छक्के लगाने की खुशी उन्होंने गांव के दोस्तों के साथ साझा की थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनके खेल जीवन की आखिरी खुशी बन जाएगी। नित्या दो भाइयों में बड़े थे। करीब तीन वर्ष पहले उनकी शादी हुई थी। पत्नी कृति और मां बिंदू देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी कोई संतान नहीं थी। बुधवार सुबह हादसे की सूचना मिलने के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई।

दोस्तों के कहने पर लखनऊ गया इरफान, घर लौटने से पहले हादसा मईल थाना क्षेत्र के बलिया उत्तर गांव निवासी 22 वर्षीय इरफान अंसारी दोस्तों के कहने पर चार अक्टूबर को लखनऊ क्रिकेट खेलने गए थे। मैच खत्म होने के बाद सभी खिलाड़ी घर लौट रहे थे, लेकिन पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे में इरफान की मौत हो गई। इंटर की पढ़ाई के बाद वह भागलपुर में कंप्यूटर कोर्स कर रहे थे। इसके साथ ही टेनिस बॉल क्रिकेट खेलते थे। आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज के जिलों में होने वाले टूर्नामेंटों में भी हिस्सा लेते थे। इरफान के पिता विदेश में हैं। उनका इंतजार करते हुए परिजनों ने शव घर पर रखा है।

हादसे में बच गए राजू, चार साथियों की मौत का दर्द खामपार थाना क्षेत्र के ततायर बुजुर्ग के नेटुआबीर गांव निवासी राजू यादव भी इसी सफर में शामिल थे। हादसे में वह घायल हो गए और उनकी जान बच गई, लेकिन साथ सफर कर रहे चार खिलाड़ियों की मौत हो गई। राजू का अस्पताल में इलाज चल रहा है। उनकी मां को अभी हादसे की पूरी जानकारी नहीं दी गई है। बड़ा भाई इंद्रजीत अस्पताल के लिए रवाना हो गया है। राजू टेनिस बॉल क्रिकेट के खिलाड़ी हैं। लखनऊ से देवरिया लौटते समय अर्टिगा कार पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर आगे चल रहे ट्रक में पीछे से जा घुसी। हादसे में राजू समेत तीन खिलाड़ी घायल हुए।
क्रिकेट टूर्नामेंट खेलने निकले थे, लौटते समय मातम में बदल गया सफर देवरिया के ये खिलाड़ी क्रिकेट टूर्नामेंट खेलने के लिए लखनऊ गए थे। मैच के बाद सभी घर लौट रहे थे। इसी दौरान पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर उनकी कार हादसे का शिकार हो गई। एक साथ चार खिलाड़ियों की मौत की खबर से उनके साथी और खेल से जुड़े लोग स्तब्ध हैं। अनिकेत, आनंद, नित्या और इरफान अलग-अलग गांवों से थे, लेकिन टेनिस बॉल क्रिकेट ने उन्हें एक-दूसरे से जोड़ा था। अलग-अलग प्रतियोगिताओं में खेलकर वे अपनी पहचान बना रहे थे। परिवारों को उनसे भविष्य की उम्मीदें थीं। हादसे के बाद इन परिवारों में खुशी की जगह अब शोक और अपनों को खोने का दर्द है।

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