मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंद दोस्त से मुलाकात करने जा रहे युवक की जेब से नशे की 600 गोलियां मिलने का मामला सामने आया है। जेल के गेट नंबर-2 पर तलाशी के दौरान जेल वार्डरों ने युवक को संदिग्ध गतिविधियों के चलते रोक लिया। उसकी जींस की दाहिनी जेब में सफेद पॉलिथीन मिली, जिसमें नारंगी रंग की छोटी-छोटी गोलियां रखी थीं। गिनती करने पर गोलियों की संख्या 600 निकली। जेल प्रशासन के मुताबिक, पूछताछ में युवक ने बताया कि वह ये गोलियां जेल में बंद अपने दोस्त के लिए लेकर आया था। आरोपी को मेडिकल पुलिस के सुपुर्द कर मुकदमा दर्ज कराया गया। बुधवार को न्यायालय में पेशी के बाद उसे जेल भेज दिया गया। जींस की जेब में छिपाकर लाया था गोलियां
जेल प्रशासन के अनुसार, छह अक्तूबर को जेल वार्डर विनीत गौतम और अभिषेक कुमार गेट नंबर-2 पर बंदियों से मुलाकात के लिए आने वाले लोगों की तलाशी ले रहे थे। इसी दौरान जींस पहने एक युवक पर शक हुआ। वार्डरों ने उसे रोककर तलाशी ली। उसकी जींस की दाहिनी जेब से सफेद रंग की पॉलिथीन बरामद हुई। पॉलिथीन खोली गई तो उसमें नारंगी रंग की छोटी-छोटी गोलियां मिलीं। गिनती करने पर 600 गोलियां निकलीं। जेल प्रशासन के मुताबिक, प्रथम दृष्टया इन गोलियों का इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है। इसके बाद युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। बंदी दोस्त के लिए लाने की बताई बात
पूछताछ में युवक ने अपना नाम मोहित कुमार पुत्र विजयपाल सिंह निवासी मीरपुर, थाना बहसूमा बताया। मोहित ने बताया कि जेल में बंद उसका दोस्त शिव राणा पुत्र जितेंद्र निवासी के-ब्लॉक, शास्त्री नगर है। वह उसी से मुलाकात करने आया था और उसके लिए ही गोलियां लेकर आया था। मोहित ने पूछताछ में यह भी बताया कि कुछ दिन पहले उसकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई थी। उसी व्यक्ति ने उसे ये गोलियां दी थीं। वह उस व्यक्ति को नहीं जानता है। मेडिकल पुलिस को सौंपा, मुकदमा दर्ज
गोलियां मिलने की सूचना पर मेडिकल थाने की पुलिस भी जिला कारागार पहुंची। जेल प्रशासन ने आरोपी मोहित कुमार को बरामद गोलियों के साथ मेडिकल पुलिस के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। बुधवार को आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी को नशीली गोलियां उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति कौन है और जेल में बंदी तक इन गोलियों को पहुंचाने की कोशिश के पीछे क्या नेटवर्क है।

