सिंगापुर, सात अक्टूबर (एपी) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने बुधवार को कहा कि अमीर और गरीब दोनों तरह के देशों को कर्ज कम करने तथा बढ़ती असमानता से निपटने के लिए तेजी से कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि देशों की अर्थव्यवस्थाएं कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते प्रभाव, भारी कर्ज और पश्चिम एशिया तथा यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई अस्थिरता की तिहरी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक जॉर्जीवा ने आईएमएफ-विश्व बैंक की अगले सप्ताह बैंकॉक में होने वाली शरद ऋतु की बैठकों से पहले सिंगापुर में आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘‘कुछ बहुत कठिन राजनीतिक फैसले हमारे सामने हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगले सप्ताह दुनिया के आर्थिक नीति निर्माताओं के लिए मेरा संदेश होगा कि हम जरूरी नीतिगत कदमों में देरी नहीं कर सकते।
आपके पास उपकरण हैं, अब उन्हें इस्तेमाल करने की समझदारी दिखाइए।’’
बैंकॉक में होने वाली बैठकों में आईएमएफ-विश्व बैंक के 191 सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करेंगे तथा वित्तीय स्थिरता और सतत वृद्धि को समर्थन देने की रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। जॉर्जीवा ने कहा कि पश्चिम एशिया, यूक्रेन और अन्य जगहों पर हुए संघर्षों का सबसे गंभीर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसे अमीर देशों के साथ-साथ कम आय वाले देशों पर भी अत्यधिक कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।
जॉर्जीवा ने एआई के इस्तेमाल के लिए डेटा केंद्रों की क्षमता तेजी से बढ़ाए जाने से जुड़े जोखिमों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि इससे कई जगह शेयर बाजारों में कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची हैं और ईरान युद्ध के कारण ऊंची ऊर्जा लागत के बावजूद मजबूत आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिला है। जॉर्जीवा ने कहा कि चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और मजबूत प्रौद्योगिकी क्षेत्र वाले अन्य देश एआई के बढ़ते प्रभाव से लाभ उठा रहे हैं, लेकिन ज्यादातर अन्य देश इससे अछूते हैं, जिससे आर्थिक असमानता बढ़ रही है।
एआई ऊर्जा की मांग भी बढ़ा रहा है, जिससे ईंधन, उर्वरक, खाद्य पदार्थ और अन्य प्रमुख जिंस की कीमतों पर और दबाव पड़ रहा है।

