India Election Commission Protest: चुनाव आयोग के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली में विपक्षी सांसदों के मार्च को पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसद चुनाव आयोग के मुख्यालय पहुंचकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करना चाहते थे। पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद विपक्षी सांसदों ने धरना दिया। बाद में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
‘निर्वाचन सदन’ जाने से रोके गए विपक्षी सांसद
विपक्षी सांसद संसद परिसर से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। पुलिस ने उन्हें संसद मार्ग के पास बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इसके बाद सांसद सड़क पर ही बैठ गए और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की।
विपक्षी दलों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन सौंपने की थी। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेता बाद में आकाशवाणी भवन परिसर तक पहुंचे, जहां कई घंटे तक धरना चला।
संजय राउत ने पुलिस तैनाती पर उठाए सवाल
संजय राउत ने प्रदर्शन को रोकने के लिए की गई भारी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसद निहत्थे थे और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं, इसके बावजूद उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया जैसे वे किसी गंभीर खतरे का हिस्सा हों।
राउत ने दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और दिल्ली पुलिस समेत बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का जिक्र किया। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए करीब डेढ़ लाख पुलिसकर्मियों के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती। उपलब्ध रिपोर्टों में भारी पुलिस तैनाती और बड़ी संख्या में लोगों तथा सांसदों को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि हुई है।
‘सांसदों को मिलने की अनुमति नहीं मिली’
राउत ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें मुलाकात का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके इरादों पर सवाल उठाए।
हालांकि, चुनाव आयोग ने मंगलवार रात जारी बयान में कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से मुलाकात के लिए अनुरोध नहीं किया था। आयोग के अनुसार, करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस से सूचना मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन देना चाहता है। आयोग ने यह भी कहा कि करीब 240 सांसदों के साथ प्रस्तावित मुलाकात संसद भवन एनेक्सी में करने का अनुरोध किया गया था, जिसे उसने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं माना।
‘आंदोलन अब नहीं रुकेगा’, राउत का दावा
संजय राउत ने कहा कि चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने दावा किया कि यह लड़ाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर है।
राउत ने कहा कि वह मुंबई में अपने निर्धारित कार्यक्रम के कारण लौटे हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर फिर दिल्ली जाएंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष का आंदोलन देशभर में जारी रहेगा।
महिला सांसदों से कथित दुर्व्यवहार का भी आरोप
राउत ने मंगलवार रात की कार्रवाई का जिक्र करते हुए महिला सांसदों के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को देर रात पुलिस कार्रवाई के बाद छोड़ा गया।
उधर, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को करीब आठ घंटे के धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और EC आमने-सामने
विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने बयान में विपक्ष के मुलाकात संबंधी दावे पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। ऐसे में अब विवाद का केंद्र चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और आयोग से विपक्ष की मुलाकात का मुद्दा बना हुआ है।
राउत ने मोदी-शाह पर भी साधा निशाना
संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी सवाल उठाए। उन्होंने महाराष्ट्र में सरकारी विज्ञापनों पर होने वाले खर्च को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इस तरह के खर्च के बजाय किसानों को राहत दी जा सकती थी।

