रांची से करीब 45 किमी दूर लापुंग के कोंयसारा गांव से खदेड़ा गया 22 जंगली हाथियों का झुंड मंगलवार रात दोलैचा पहुंचा। वन विभाग की टीम ने झुंड को आबादी से दूर किया तो देर रात वह नेहालू की ओर चला गया। झुंड में चार-पांच छोटे बच्चे भी हैं। उनकी सुरक्षा के लिए वयस्क हाथियों ने बच्चों को बीच में रखकर घेरा बना रखा है। बच्चों के कारण झुंड की रफ्तार धीमी है। झुंड के गांवों के करीब पहुंचने से ग्रामीण दहशत में हैं। वे मशाल जलाकर रातभर पहरा दे रहे हैं। रेंजर गायत्री देवी ने बताया कि 12 सदस्यीय क्यूआरटी के साथ वनरक्षियों को हाथियों को खदेड़ने में लगाया गया है। रांची से करीब 45 किमी दूर लापुंग के कोंयसारा गांव से खदेड़ा गया 22 जंगली हाथियों का झुंड मंगलवार रात दोलैचा पहुंचा। वन विभाग की टीम ने झुंड को आबादी से दूर किया तो देर रात वह नेहालू की ओर चला गया। झुंड में चार-पांच छोटे बच्चे भी हैं। उनकी सुरक्षा के लिए वयस्क हाथियों ने बच्चों को बीच में रखकर घेरा बना रखा है। बच्चों के कारण झुंड की रफ्तार धीमी है। झुंड के गांवों के करीब पहुंचने से ग्रामीण दहशत में हैं। वे मशाल जलाकर रातभर पहरा दे रहे हैं। रेंजर गायत्री देवी ने बताया कि 12 सदस्यीय क्यूआरटी के साथ वनरक्षियों को हाथियों को खदेड़ने में लगाया गया है।

