झज्जर में ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में झज्जर नागरिक अस्पताल सहित जिलेभर के सरकारी अस्पतालों का नर्सिंग स्टाफ लगातार दूसरे दिन भी सांकेतिक हड़ताल पर रहा। मंगलवार को नर्सिंग कर्मचारियों ने दो घंटे तक काम से दूरी बनाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान एक स्टाफ नर्स के लगाए नारे एक कचौरी, दो समोसा, इस सरकार का क्या भरोसा ने प्रदर्शन का ध्यान खींचा। नारेबाजी कर जताया विरोध हड़ताल के दौरान नर्सिंग स्टाफ ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को वापस लेने की मांग दोहराई। कर्मचारियों का कहना है कि नर्सिंग कैडर की कार्यप्रणाली अन्य विभागों से अलग है, लेकिन पॉलिसी बनाते समय नर्सिंग स्टाफ की वास्तविक परिस्थितियों को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा गया। महिला कर्मचारियों और शिफ्ट ड्यूटी का दिया हवाला प्रदर्शन कर रहे नर्सिंग कर्मचारियों ने कहा कि अस्पतालों में बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी कार्यरत हैं। नर्सिंग सेवाएं 24 घंटे चलती हैं और कर्मचारियों को दिन, शाम और रात तीनों शिफ्टों में ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसे में ट्रांसफर के दौरान कर्मचारियों की पारिवारिक जिम्मेदारियों और शिफ्ट ड्यूटी की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। कहा- मरीजों को परेशान करना मकसद नहीं नर्सिंग स्टाफ ने कहा कि उनका आंदोलन मरीजों को परेशान करने के लिए नहीं है। उनका उद्देश्य अपनी समस्याओं और मांगों को सरकार तक पहुंचाना है। कर्मचारियों ने सरकार से बातचीत कर नर्सिंग कैडर की परिस्थितियों के अनुसार नीति पर पुनर्विचार करने की मांग की। तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल, आगे बढ़ सकता है आंदोलन नर्सिंग स्टाफ के अनुसार फिलहाल तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की जा रही है। कर्मचारियों ने कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आने वाले समय में आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। कर्मचारियों ने सरकार से ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी वापस लेने और नर्सिंग स्टाफ की समस्याओं का समाधान करने की मांग की।

