पठानकोट स्थित रंजीत सागर झील (थीन डैम) को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना को आखिरकार सोमवार को प्रशासनिक बल मिल गया। चंडीगढ़ में आयोजित पंजाब कैबिनेट की अहम बैठक में ‘रंजीतगढ़ डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक, 2026’ को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। कैबिनेट के इस फैसले से पठानकोट जिले में फैले 305 एकड़ के रंजीत सागर झील परिसर और शाहपुर कंडी डैम क्षेत्रों के नियोजित, टिकाऊ और इको-टूरिज्म आधारित विकास का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। आइए जानते हैं कि इस प्रोजेक्ट का सपना कब देखा गया था, अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में इस पर क्या-क्या हुआ, इसे धरातल पर उतरने में 25 साल का लंबा वक्त क्यों लगा और आज कैबिनेट के ताजा फैसले के बाद मौजूदा स्थिति क्या है: कैबिनेट बैठक में फैसला मुख्यमंत्री होंगे अथॉरिटी के चेयरमैन कैबिनेट बैठक के बाद पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह नई अथॉरिटी दोनों डैमों (रंजीत सागर और शाहपुर कंडी) के आसपास के क्षेत्रों के एकीकृत विकास की देखरेख करेगी। RDA का गठन पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में एक वैधानिक संस्था के रूप में किया जाएगा। इसके पास भूमि प्रबंधन, प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन और डेस्टिनेशन गवर्नेंस के लिए पूर्ण प्रशासनिक, वित्तीय व नियामक अधिकार होंगे। अथॉरिटी में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान अध्यक्ष होंगे, पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री इसके उपाध्यक्ष होंगे। जबकि, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कार्यकारी समिति इसके दैनिक कामकाज और अंतर-विभागीय तालमेल की देखरेख करेगी। किस सरकार के समय क्या हुआ? अकाली-भाजपा सरकार में सपना और पहली नींव शुरुआत: वर्ष 1998-99 में जब थीन डैम का निर्माण अंतिम चरण में था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की अगुवाई वाली अकाली-भाजपा सरकार ने झील के बैकवॉटर और धार कलां की खूबसूरत पहाड़ियों को देखकर इसे ‘मिनी गोवा’ के रूप में विकसित करने की योजना बनाई। 2001 की घोषणा: 30 मार्च 2001 को डैम के उद्घाटन के समय औपचारिक रूप से झील क्षेत्र को वॉटर स्पोर्ट्स और इको-टूरिज्म हब बनाने का ऐलान किया गया। कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार की कागजी नीतियां 2002 से 2007 की कांग्रेस सरकार के समय पर्यटन विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए खाका तैयार किया और निजी निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए नीतियां बनाई गईं, लेकिन कोई बड़ा निवेशक सामने नहीं आया। अकाली-भाजपा सरकार में पीपीपी मॉडल और ग्लोबल रोड-शो 2007 से 2017 तक रही अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के समय तत्कालीन उपमुख्यमंत्री व पर्यटन मंत्री सुखबीर सिंह बादल के कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट को ‘पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप’ (PPP Model) के तहत लाने का मास्टर प्लान बना। निवेशकों को लुभाने के लिए मुंबई और दुबई में इनवेस्टर्स मीट आयोजित की गई। 305 एकड़ जमीन पर 5-स्टार होटल, वॉटर विला, गोल्फ कोर्स और एडवेंचर स्पोर्ट्स बनाने के ग्लोबल टेंडर जारी किए गए। कैप्टन / चन्नी सरकार में भूमि हस्तांतरण व समीक्षा 2017–2022 तक रही कैप्टन अमरिंदर सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी की कांग्रेस सरकार के दौरान प्रोजेक्ट की समीक्षा की गई और जल संसाधन विभाग से पर्यटन विभाग को जमीन हस्तांतरित करने की कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, लेकिन प्रशासनिक अड़चनों के कारण काम आगे नहीं बढ़ा। इतना समय क्यों लगा? 25 सालों की देरी के 4 मुख्य कारण अनापत्ति प्रमाण पत्रों का पेंच: यह क्षेत्र वन विभाग और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक आता है। इस वजह से केंद्र और राज्य के विभिन्न मंत्रालयों से एनवायरमेंटल व सिक्योरिटी क्लीयरेंस मिलने में सालों बीत गए। विभागों का आपसी तालमेल न होना: जमीन जल संसाधन विभाग (सिंचाई विभाग) की थी, जबकि प्रोजेक्ट पर्यटन विभाग का था। भूमि उपयोग बदलने और स्वामित्व हस्तांतरण में लंबा वक्त लगा। सिंगल-विंडो सिस्टम का अभाव: अलग-अलग विभागों (वन, सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, पर्यटन) से मंजूरी लेने के चक्कर में निजी निवेशक पीछे हटते रहे। समर्पित संस्था का न होना: हर सरकार ने राजनीतिक दावों में इस प्रोजेक्ट को शामिल तो किया, लेकिन किसी समर्पित प्रशासनिक संस्था के बिना फाइलें दफ्तरों के चक्कर काटती रहीं। अब क्या स्थिति है? 2026 की ग्राउंड रिपोर्ट आज कैबिनेट द्वारा आरडीए बिल 2026 को हरी झंडी मिलने के साथ ही प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी प्रशासनिक अड़चन दूर हो गई है: 305 एकड़ जमीन पर वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर: अंतरराष्ट्रीय स्तर का वॉटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, लक्जरी रिसॉर्ट्स, एडवेंचर पार्क और केबल कार (रोप-वे) विकसित किए जाएंगे। सिंगल अथॉरिटी सिस्टम: अब अलग-अलग विभागों के चक्कर काटने के बजाय RDA सीधे निर्णय लेगी, जिससे प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में तेजी आएगी।

