भोपाल में नवाब से जुड़ी संपत्तियों पर सुनवाई:रियाज मंजिल कोठी पर आज रखेंगे पक्ष; सरकारी रिकॉर्ड भी देखेंगे

भोपाल में नवाब से जुड़ी संपत्तियों पर सुनवाई:रियाज मंजिल कोठी पर आज रखेंगे पक्ष; सरकारी रिकॉर्ड भी देखेंगे

भोपाल में शत्रु संपत्तियों को लेकर जिला प्रशासन ने सुनवाई शुरू कर दी है। इनमें एक्टर और भोपाल के नवाब सैफ अली खान से जुड़ी संपत्तियां भी शामिल हैं। मंगलवार को बैरागढ़ एसडीएम रवीशकुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में रियाज मंजिल को लेकर दोनों पक्ष रिकॉर्ड पेश करेंगे। बता दें कि खानूगांव स्थित ऐतिहासिक रियाज मंजिल कोठी और खसरा नंबर-42 को नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम की संपत्ति मानकर ‘शत्रु संपत्ति’ के रूप में कार्रवाई की जा रही है। इसे लेकर आपत्ति भी दर्ज कराई गई है। इसमें सरकारी राजस्व रिकॉर्ड, वर्ष 2020 की राजस्व जांच और 29 अप्रैल 2024 को जारी बताए जा रहे ‘शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र’ की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए मूल रिकॉर्ड बुलाने की मांग की गई है। दावा किया गया है कि उपलब्ध सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में खसरा नंबर 42 आफताब जहां बेगम के नाम दर्ज नहीं है। रिकॉर्ड में इसका संबंध नवाब हमीदुल्लाह खान और बाद में उनकी उत्तराधिकारी नवाब बेगम साजिदा सुल्तान से बताया गया है। आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि किसी संपत्ति में किसी व्यक्ति का निवास करना और उसका विधिक स्वामी होना अलग-अलग विषय हैं। इसलिए आफताब जहां के रियाज मंजिल में रहने के आधार पर उनके स्वामित्व को मानने से पहले संबंधित दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। आफताब जहां का दावा सिद्ध नहीं होने का तर्क
आपत्तियों में वर्ष 2020 की राजस्व कार्रवाई का भी हवाला दिया गया है। इसके अनुसार तत्कालीन तहसीलदार, संत हिरदाराम नगर ने राजस्व प्रकरण क्रमांक 337/अ-6/2018-19 में खसरा नंबर 42 से संबंधित जांच की थी। आपत्तिकर्ताओं का दावा है कि इस जांच में आफताब जहां के पक्ष में कथित हिबा/दान के आधार पर किए गए नामांतरण के दावे को सिद्ध नहीं माना गया था। इसी आधार पर सवाल उठाया गया है कि यदि पिछली राजस्व जांच में आफताब जहां का मालिकाना हक स्थापित नहीं हुआ था, तो वर्ष 2024 में इसी संपत्ति को उनके स्वामित्व की मानकर ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित करने का आधार क्या बना? 2024 के प्रमाण-पत्र की मूल फाइल बुलाने की मांग
आपत्तिकर्ताओं ने 29 अप्रैल 2024 के कथित प्रमाण-पत्र को सीधे फर्जी नहीं बताया है, बल्कि उसकी प्रामाणिकता और उसे जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उपलब्ध प्रमाण-पत्र शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत फोटोकॉपी पर आधारित प्रतीत होता है। आपत्तियों में भारत के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय (CEPI), मुंबई से फाइल नंबर 16-01-03/84 की मूल अथवा प्रमाणित फाइल बुलाने की मांग की गई है। इसमें नोटशीट, प्रमाण-पत्र, अनुमोदन आदेश, संपत्ति सत्यापन रिपोर्ट, आफताब जहां के स्वामित्व का आधार और केंद्र-राज्य तथा कलेक्टर के बीच हुए पत्राचार को शामिल करने की मांग है। मुख्य सवाल- रियाज मंजिल का मालिकाना हक किसका?
पूरे विवाद में अब मुख्य सवाल रियाज मंजिल और खसरा नंबर 42 के विधिक स्वामित्व को लेकर है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होना है कि आफताब जहां बेगम के स्वामित्व का आधार क्या था और 29 अप्रैल 2024 का प्रमाण-पत्र किन दस्तावेजों, जांच और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर जारी किया गया। प्रभावित पक्षों का कहना है कि इन सवालों का जवाब मूल सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। अब 6 अक्टूबर की सुनवाई में प्रशासन इन आपत्तियों और मूल रिकॉर्ड बुलाने की मांग पर क्या रुख अपनाता है, इस पर नजर रहेगी। नवाब की अरबों की संपत्ति
आजादी के समय भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की अरबों की प्रॉपर्टी पर बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान के साथ नवाब की तीसरी बेटी राबिया सुल्तान के वारिसों ने भी दावा किया है। इसके चलते भू-संपत्तियों की जांच और सत्यापन के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया है। बैरागढ़, टीटी नगर, कोलार, हुजूर और गोविंदपुरा के एसडीएम भूमि रिकॉर्ड का सर्वेक्षण और सत्यापन कर रहे हैं। अफसरों का कहना है कि उन्हें खानूगांव, कोहेफिजा और चिकलोद की जमीनों के अलावा मैपल हाउस, रियाज मंजिल और नानी की हवेली जैसी विशिष्ट शाही संपत्तियों का मूल्यांकन और पहचान करने का जिम्मा दिया गया है। शत्रु संपत्ति विवाद और उत्तराधिकार के दावे
केंद्र सरकार ने पूर्व नवाब की संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित किया है। सरकार का तर्क है कि नवाब हमीदुल्लाह खान की सबसे बड़ी बेटी आबिदा सुल्तान विभाजन के समय पाकिस्तान चली गई थीं। इसलिए उनके द्वारा भोपाल में लावारिस छोड़ी गई संपत्ति, सरकार की है। सैफ अली खान पटौदी और उनके परिवार ने इस संपत्ति पर अपना दावा ठोका है। उनका कहना है कि उनकी दादी साजिदा सुल्तान (हमीदुल्लाह खान की दूसरी बेटी) नवाब की वास्तविक उत्तराधिकारी थीं, क्योंकि भारत सरकार ने विलय संधि पर हस्ताक्षर कर उन्हें भोपाल का शासक स्वीकार किया था। यह मामला फिलहाल अदालत में लंबित है। मामले में नया मोड़ देते हुए नवाब की तीसरी बेटी राबिया सुल्तान के वारिसों ने भी जिला अदालत में याचिका दायर कर इस्लामिक कानून के तहत संपत्तियों के बंटवारे की मांग की है।

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