जमुई में गणित शिक्षक अरेस्ट:11 साल से फर्जी B.Ed. प्रमाण पत्र पर कर रहा था नौकरी, विजिलेंस जांच में BU की डिग्री निकली फर्जी

जमुई में गणित शिक्षक अरेस्ट:11 साल से फर्जी B.Ed. प्रमाण पत्र पर कर रहा था नौकरी, विजिलेंस जांच में BU की डिग्री निकली फर्जी

जमुई के खैरा प्रखंड के बाघाखांड विद्यालय में करीब 11 साल से फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर शिक्षक के रूप में कार्यरत हरेराम कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में उसके B.Ed. प्रमाण पत्र के फर्जी पाए जाने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। कार्रवाई के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक को जेल भेज दिया। 2015 में श्रवण विकलांग कोटे से हुआ था नियोजन निगरानी विभाग के अनुसार शेखपुरा जिले के भदौस गांव निवासी हरेराम कुमार ने वर्ष 2015 में बिहार राज्य जिला परिषद माध्यमिक शिक्षक नियोजन के लिए जमुई में आवेदन किया था। उसका श्रवण विकलांग कोटि में नियोजन हुआ था। इसके बाद बाघाखांड विद्यालय में गणित विषय के प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में उसकी नियुक्ति हुई। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की B.Ed. डिग्री पर उठे सवाल नियोजन के दौरान हरेराम कुमार ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी से जारी B.Ed. प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान निगरानी विभाग ने इसे सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय भेजा। विश्वविद्यालय से सत्यापन के बाद प्रमाण पत्र के फर्जी होने की जानकारी दी गई। फर्जी दस्तावेज को असली बताकर नौकरी लेने का आरोप निगरानी विभाग का आरोप है कि फर्जी अंक पत्र और प्रमाण पत्र तैयार कर उन्हें वास्तविक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया गया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक नियोजन में हरेराम कुमार ने अवैध रूप से लाभ लिया और वर्षों तक सरकारी शिक्षक के पद पर कार्य किया। इस्तीफे का मौका मिला, फिर भी नहीं छोड़ी नौकरी निगरानी विभाग के मुताबिक फर्जी प्रमाण पत्र वाले शिक्षकों को हाईकोर्ट के निर्देश के तहत एमनेस्टी पीरियड में त्यागपत्र देने का अवसर दिया गया था। हरेराम कुमार ने इस अवधि में भी इस्तीफा नहीं दिया। इसके बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। कूटरचना और आपराधिक साजिश की धाराओं में केस मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना के पुलिस उपाधीक्षक सह सहायक जांचकर्ता विकास कुमार श्रीवास्तव ने प्राथमिकी दर्ज कराई। इसमें हरेराम कुमार समेत अन्य अज्ञात लोगों पर कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, उसे असली के रूप में इस्तेमाल करने, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने हरेराम कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जमुई के खैरा प्रखंड के बाघाखांड विद्यालय में करीब 11 साल से फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर शिक्षक के रूप में कार्यरत हरेराम कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में उसके B.Ed. प्रमाण पत्र के फर्जी पाए जाने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। कार्रवाई के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक को जेल भेज दिया। 2015 में श्रवण विकलांग कोटे से हुआ था नियोजन निगरानी विभाग के अनुसार शेखपुरा जिले के भदौस गांव निवासी हरेराम कुमार ने वर्ष 2015 में बिहार राज्य जिला परिषद माध्यमिक शिक्षक नियोजन के लिए जमुई में आवेदन किया था। उसका श्रवण विकलांग कोटि में नियोजन हुआ था। इसके बाद बाघाखांड विद्यालय में गणित विषय के प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में उसकी नियुक्ति हुई। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की B.Ed. डिग्री पर उठे सवाल नियोजन के दौरान हरेराम कुमार ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी से जारी B.Ed. प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान निगरानी विभाग ने इसे सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय भेजा। विश्वविद्यालय से सत्यापन के बाद प्रमाण पत्र के फर्जी होने की जानकारी दी गई। फर्जी दस्तावेज को असली बताकर नौकरी लेने का आरोप निगरानी विभाग का आरोप है कि फर्जी अंक पत्र और प्रमाण पत्र तैयार कर उन्हें वास्तविक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया गया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक नियोजन में हरेराम कुमार ने अवैध रूप से लाभ लिया और वर्षों तक सरकारी शिक्षक के पद पर कार्य किया। इस्तीफे का मौका मिला, फिर भी नहीं छोड़ी नौकरी निगरानी विभाग के मुताबिक फर्जी प्रमाण पत्र वाले शिक्षकों को हाईकोर्ट के निर्देश के तहत एमनेस्टी पीरियड में त्यागपत्र देने का अवसर दिया गया था। हरेराम कुमार ने इस अवधि में भी इस्तीफा नहीं दिया। इसके बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई। कूटरचना और आपराधिक साजिश की धाराओं में केस मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना के पुलिस उपाधीक्षक सह सहायक जांचकर्ता विकास कुमार श्रीवास्तव ने प्राथमिकी दर्ज कराई। इसमें हरेराम कुमार समेत अन्य अज्ञात लोगों पर कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, उसे असली के रूप में इस्तेमाल करने, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने हरेराम कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।  

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