पटना से 40 मिनट में मुजफ्फरपुर, घंटे भर में गयाजी:कहां रुकेगी, कहां नहीं, बन रहा खाका, बिहार की पहली रैपिड रेल को जानिए

पटना से 40 मिनट में मुजफ्फरपुर, घंटे भर में गयाजी:कहां रुकेगी, कहां नहीं, बन रहा खाका, बिहार की पहली रैपिड रेल को जानिए

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) की तरह बिहार में भी रैपिड ट्रांजिट ट्रेन चलने वाली है। सम्राट सरकार बिहार में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम डेवलप कर रही है। इसके तहत पटना शहरी क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए राज्य में 4 कॉरिडोर बनाए जाएंगे। यह सेमी हाई-स्पीड यात्री ट्रेन सेवा होगी। इससे दो शहरों के बीच कम समय में यात्रा होगी। पटना के आसपास चार रैपिड ट्रांजिट सिस्टम कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इससे नौकरी, कारोबार या पढ़ाई जैसे काम के लिए लोगों को पटना आने-जाने में सुविधा होगी। मंडे स्पेशल में पढ़िए, पटना से किन शहरों के बीच रीजनल रैपिड ट्रांजिट ट्रेन चलेंगे? इनकी रफ्तार क्या होगी? क्या फायदे होंगे? इस मेगा प्रोजेक्ट पर कितना काम हुआ है? पटना के आसपास विकसित होंगे चार RRTS पटना से गया की दूरी 92 km है। अभी सबसे तेज ट्रेन वंदे भारत को यह दूरी तय करने में 75 मिनट लगते हैं। मेमू ट्रेन से जाने में दो से तीन घंटे लगते हैं। पटना से आरा की दूरी 50 km है। ट्रेन से जाने में एक घंटा लगता है। पटना के नजदीक के जिलों जिसमें गयाजी, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर और आरा खास हैं। यहां से हर दिन डेली पैसेंजर के रूप में हजारों यात्री नौकरी, बिजनेस आदि के लिए आते-जाते हैं, लेकिन ट्रेन से समय अधिक लगने की वजह से परेशानी होती है। ऐसे यात्रियों को रैपिड ट्रांजिट ट्रेन से फायदा होगा। इसके लिए चार कॉरिडोर विकसित होंगे। DPR तैयार करने में खर्च होंगे 31.59 करोड़ रुपए राज्य सरकार ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने के लिए राज्य के 31.59 करोड़ रुपए स्वीकृत किया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) को यह काम सौंपा गया है। पटना से गयाजी और पटना से मुजफ्फरपुर कॉरिडोर पर सर्वे चल रहा है। नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा कहते हैं कि चार कॉरिडोर में से पटना-गयाजी में सर्वे का काम किया जा रहा है। डीपीआर बनने में छह माह का समय लगेगा। सर्वे में इसका आकलन किया जा रहा है कि किन रूटों पर कौन सा सिस्टम अधिक किफायती रहेगा। कहां पटरियां अंडरग्राउंड की जाएं और कहां एलिवेटेड। अभी पटना-गयाजी के बीच चलने वाले रैपिड ट्रांजिट ट्रेन कॉरिडोर के सर्वे का काम चल रहा है। इसके आधार पर डीपीआर तैयार होगा। डीपीआर बनने में छह माह का समय लगेगा। इस सुविधा से कई स्तरों पर लोगों को फायदा होगा।- नीतीश मिश्रा, नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री क्या हैं रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के फायदे? 100 km/h रफ्तार, कम समय में तय होगी दूरी- RRTS की पहली बड़ी खासियत ट्रेन की रफ्तार है। इस सेमी हाई स्पीड ट्रेन सेवा से एक शहर से दूसरे शहर जाने में लगने वाला समय घटेगा। इसे दिल्ली के उदाहरण से समझें तो नमो भारत रीजनल रेल सिस्टम की डिजाइन स्पीड 180 km/h और औसत स्पीड 100 km/h है। ट्रेन 160 km/h की रफ्तार से दौड़ती है। बिहार में भी इसी तर्ज पर ट्रेन दौडे़गी। इससे आसपास के जिलों से पटना आने वाले लोगों का समय बचेगा। पटना में जॉब करने वाले लोगों को ऑफिस आने जाने में कम समय लगेगा। पटना में ट्रैफिक का दबाव कम होगा- गयाजी, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर और आरा से पटना आना-जाना तेज होगा। जॉब, बिजनेस, इलाज, पढ़ाई, खरीददारी समेत अन्य काम से पटना आने-जाने वाले लोगों को काफी सुविधा होगी। पटना में रहना महंगा है। रैपिड ट्रांजिट सिस्टम वाले इलाके के लोग अपने घर से भी पटना आकर नौकरी और कारोबार कर पाएंगे। राजधानी के पास वाले शहर विकसित होंगे- पटना के पास वाले शहरों का बेहतर आर्थिक विकास होगा। आरा, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, गया, बेगूसराय के आसपास व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। उद्योग और सर्विस सेक्टर को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। व्यापार तेज होगा। इसका असर लोगों की आय पर भी पड़ेगा। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। रहन-सहन का स्तर बढ़ेगा। एयरपोर्ट, बस और रेलवे नेटवर्क से कनेक्टिविटी- RRTS को एयरपोर्ट, रेलवे, मेट्रो, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने पर भी फोकस है। इससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। सर्वे में किन बातों पर फोकस अभी पटना से गयाजी के बीच सर्वे का काम चल रहा है। इसके बाद अन्य तीनों रूट पर सर्वे किया जाएगा। इसके बाद डीपीआर तैयार होगा। सर्वे में इन बातों पर फोकस किया जा रहा है… उपयुक्त रास्ता: सबसे उपयुक्त रास्ता कौन सा होगा। इसकी तकनीकी जांच की जा रही है। जरूरत पड़ी तो वर्तमान के सड़क-रेल कॉरिडोर के साथ ही अलग एलाइनमेंट के विकल्प तलाशे जाएंगे। यात्री संख्या और डिमांड: हर दिन कितने यात्री इस रूट पर आते-जाते हैं। पीक आवर में क्या स्थिति रहती है। भविष्य में यात्रियों की संख्या कितनी बढ़ सकती है। स्टेशन कहां बनाए जाएं: मकसद सिर्फ पटना से शहरों को जोड़ना नहीं, बल्कि यह भी देखना है कि किस स्थान पर स्टेशन बनाए जाएं कि यात्रियों को ज्यादा फायदा हो। कनेक्टिविटी: एयरपोर्ट, मेट्रो और बस स्टैंड से कैसे जोड़ा जाए। जमीन की जरूरत: जहां जमीन पर निर्माण की जरूरत होगी वहां जमीन की उपलब्धता कैसी है। क्या वहां घनी आबादी है? जमीन के अधिग्रहण की जरूरत पड़ी तो वह कैसे पूरी होगी। लागत और फायदा: पटना से गयाजी के साथ ही अन्य कॉरिडोर पर कितनी लागत आएगी, निर्माण का मॉडल क्या होगा? यानी तकनीकी और आर्थिक नजरिए से इसका सर्वे किया जा रहा है। अब देश के पहले RRTS कॉरिडोर को जानिए नमो भारत देश की पहली रीजनल रेल है जो हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के जरिए नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के मुख्य शहरी इलाकों को जोड़ती है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) की तरह बिहार में भी रैपिड ट्रांजिट ट्रेन चलने वाली है। सम्राट सरकार बिहार में रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम डेवलप कर रही है। इसके तहत पटना शहरी क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए राज्य में 4 कॉरिडोर बनाए जाएंगे। यह सेमी हाई-स्पीड यात्री ट्रेन सेवा होगी। इससे दो शहरों के बीच कम समय में यात्रा होगी। पटना के आसपास चार रैपिड ट्रांजिट सिस्टम कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इससे नौकरी, कारोबार या पढ़ाई जैसे काम के लिए लोगों को पटना आने-जाने में सुविधा होगी। मंडे स्पेशल में पढ़िए, पटना से किन शहरों के बीच रीजनल रैपिड ट्रांजिट ट्रेन चलेंगे? इनकी रफ्तार क्या होगी? क्या फायदे होंगे? इस मेगा प्रोजेक्ट पर कितना काम हुआ है? पटना के आसपास विकसित होंगे चार RRTS पटना से गया की दूरी 92 km है। अभी सबसे तेज ट्रेन वंदे भारत को यह दूरी तय करने में 75 मिनट लगते हैं। मेमू ट्रेन से जाने में दो से तीन घंटे लगते हैं। पटना से आरा की दूरी 50 km है। ट्रेन से जाने में एक घंटा लगता है। पटना के नजदीक के जिलों जिसमें गयाजी, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर और आरा खास हैं। यहां से हर दिन डेली पैसेंजर के रूप में हजारों यात्री नौकरी, बिजनेस आदि के लिए आते-जाते हैं, लेकिन ट्रेन से समय अधिक लगने की वजह से परेशानी होती है। ऐसे यात्रियों को रैपिड ट्रांजिट ट्रेन से फायदा होगा। इसके लिए चार कॉरिडोर विकसित होंगे। DPR तैयार करने में खर्च होंगे 31.59 करोड़ रुपए राज्य सरकार ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने के लिए राज्य के 31.59 करोड़ रुपए स्वीकृत किया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) को यह काम सौंपा गया है। पटना से गयाजी और पटना से मुजफ्फरपुर कॉरिडोर पर सर्वे चल रहा है। नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा कहते हैं कि चार कॉरिडोर में से पटना-गयाजी में सर्वे का काम किया जा रहा है। डीपीआर बनने में छह माह का समय लगेगा। सर्वे में इसका आकलन किया जा रहा है कि किन रूटों पर कौन सा सिस्टम अधिक किफायती रहेगा। कहां पटरियां अंडरग्राउंड की जाएं और कहां एलिवेटेड। अभी पटना-गयाजी के बीच चलने वाले रैपिड ट्रांजिट ट्रेन कॉरिडोर के सर्वे का काम चल रहा है। इसके आधार पर डीपीआर तैयार होगा। डीपीआर बनने में छह माह का समय लगेगा। इस सुविधा से कई स्तरों पर लोगों को फायदा होगा।- नीतीश मिश्रा, नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री क्या हैं रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के फायदे? 100 km/h रफ्तार, कम समय में तय होगी दूरी- RRTS की पहली बड़ी खासियत ट्रेन की रफ्तार है। इस सेमी हाई स्पीड ट्रेन सेवा से एक शहर से दूसरे शहर जाने में लगने वाला समय घटेगा। इसे दिल्ली के उदाहरण से समझें तो नमो भारत रीजनल रेल सिस्टम की डिजाइन स्पीड 180 km/h और औसत स्पीड 100 km/h है। ट्रेन 160 km/h की रफ्तार से दौड़ती है। बिहार में भी इसी तर्ज पर ट्रेन दौडे़गी। इससे आसपास के जिलों से पटना आने वाले लोगों का समय बचेगा। पटना में जॉब करने वाले लोगों को ऑफिस आने जाने में कम समय लगेगा। पटना में ट्रैफिक का दबाव कम होगा- गयाजी, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर और आरा से पटना आना-जाना तेज होगा। जॉब, बिजनेस, इलाज, पढ़ाई, खरीददारी समेत अन्य काम से पटना आने-जाने वाले लोगों को काफी सुविधा होगी। पटना में रहना महंगा है। रैपिड ट्रांजिट सिस्टम वाले इलाके के लोग अपने घर से भी पटना आकर नौकरी और कारोबार कर पाएंगे। राजधानी के पास वाले शहर विकसित होंगे- पटना के पास वाले शहरों का बेहतर आर्थिक विकास होगा। आरा, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, गया, बेगूसराय के आसपास व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। उद्योग और सर्विस सेक्टर को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। व्यापार तेज होगा। इसका असर लोगों की आय पर भी पड़ेगा। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। रहन-सहन का स्तर बढ़ेगा। एयरपोर्ट, बस और रेलवे नेटवर्क से कनेक्टिविटी- RRTS को एयरपोर्ट, रेलवे, मेट्रो, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने पर भी फोकस है। इससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। सर्वे में किन बातों पर फोकस अभी पटना से गयाजी के बीच सर्वे का काम चल रहा है। इसके बाद अन्य तीनों रूट पर सर्वे किया जाएगा। इसके बाद डीपीआर तैयार होगा। सर्वे में इन बातों पर फोकस किया जा रहा है… उपयुक्त रास्ता: सबसे उपयुक्त रास्ता कौन सा होगा। इसकी तकनीकी जांच की जा रही है। जरूरत पड़ी तो वर्तमान के सड़क-रेल कॉरिडोर के साथ ही अलग एलाइनमेंट के विकल्प तलाशे जाएंगे। यात्री संख्या और डिमांड: हर दिन कितने यात्री इस रूट पर आते-जाते हैं। पीक आवर में क्या स्थिति रहती है। भविष्य में यात्रियों की संख्या कितनी बढ़ सकती है। स्टेशन कहां बनाए जाएं: मकसद सिर्फ पटना से शहरों को जोड़ना नहीं, बल्कि यह भी देखना है कि किस स्थान पर स्टेशन बनाए जाएं कि यात्रियों को ज्यादा फायदा हो। कनेक्टिविटी: एयरपोर्ट, मेट्रो और बस स्टैंड से कैसे जोड़ा जाए। जमीन की जरूरत: जहां जमीन पर निर्माण की जरूरत होगी वहां जमीन की उपलब्धता कैसी है। क्या वहां घनी आबादी है? जमीन के अधिग्रहण की जरूरत पड़ी तो वह कैसे पूरी होगी। लागत और फायदा: पटना से गयाजी के साथ ही अन्य कॉरिडोर पर कितनी लागत आएगी, निर्माण का मॉडल क्या होगा? यानी तकनीकी और आर्थिक नजरिए से इसका सर्वे किया जा रहा है। अब देश के पहले RRTS कॉरिडोर को जानिए नमो भारत देश की पहली रीजनल रेल है जो हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के जरिए नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के मुख्य शहरी इलाकों को जोड़ती है।  

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