देश की बड़ी आईटी कंपनियों के लिए जुलाई से सितंबर की तिमाही बहुत तेज बढ़त वाली रहने की उम्मीद नहीं है। जानकारों के मुताबिक, ग्राहक अभी भी तकनीक पर होने वाले ऐसे खर्च को सीमित रख रहे हैं, जिसे तुरंत जरूरी नहीं माना जाता है। ऐसे में दूसरी तिमाही में बड़ी आईटी कंपनियों की आय में मामूली बढ़ोतरी और मुनाफे की दर लगभग स्थिर रहने की संभावना है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, रिसर्च सलाहकार संस्था अनअर्थइनसाइट को उम्मीद है कि देश की 5 बड़ी आईटी कंपनियों की दूसरी तिमाही में पिछली तिमाही की तुलना में आय 0.5% से 1% तक बढ़ सकती है। अप्रैल से जून की तिमाही के मुकाबले इसमें बहुत बड़ा सुधार होने की उम्मीद नहीं है। संस्था के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव वासु के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव के बीच कंपनियों का अतिरिक्त टेकनिकल खर्च अभी भी सीमित है और फैसले लेने में ज्यादा समय लग रहा है।
वहीं, गार्टनर का मानना है कि दूसरी तिमाही पहली तिमाही से कुछ बेहतर रह सकती है। इसका एक कारण पहले से मिले बड़े ठेकों का अब आय में बदलना है। हालांकि, ग्राहकों का रुख अभी भी सावधानी वाला है। कंपनियां उन्हीं तकनीकी परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रही हैं, जिनसे लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने या कारोबार को सीधा फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
बता दें कि दूसरी तिमाही के नतीजों की शुरुआत टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज 8 अक्टूबर को करेगी। इसके बाद एचसीएलटेक 12 अक्टूबर और इंफोसिस 23 अक्टूबर को अपने नतीजे जारी करेगी। अनअर्थइनसाइट को उम्मीद है कि ज्यादातर कंपनियां वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने मौजूदा अनुमान में बड़ा बदलाव नहीं करेंगी। कुछ कंपनियां अनुमान की ऊपरी सीमा में करीब 0.5% की बढ़ोतरी कर सकती हैं।
पूरे वित्त वर्ष के लिए बड़ी आईटी कंपनियों की वृद्धि का अनुमान 3% से 4% पर बरकरार रखा गया है। हालांकि, इस वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा दूसरी कंपनियों को खरीदने से आ सकता है, न कि तकनीकी सेवाओं की मांग में तेज सुधार से। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2027 में अब तक तकनीकी सेवा क्षेत्र ने 14 अधिग्रहण सौदों पर करीब 3.6 अरब डॉलर खर्च किए हैं।
कंपनियों के मुनाफे पर भी दबाव बना हुआ है। कर्मचारियों की वेतन वृद्धि, एआई से जुड़े मंचों और साझेदारियों पर निवेश तथा ग्राहकों की कम कीमत की मांग के कारण मार्जिन बढ़ाना आसान नहीं होगा। अनअर्थइनसाइट के मुताबिक, टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएलटेक जैसी बड़ी कंपनियों के मार्जिन में मामूली सुधार हो सकता है, जबकि मध्यम आकार की कंपनियां अधिग्रहण के बाद होने वाले खर्च को संभालने में व्यस्त रहेंगी।
एआई इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल रहा है। अभी एआई से मिलने वाली आय उद्योग की कुल आय में 5% से कम है, लेकिन ग्राहक तेजी से ऐसे सॉफ्टवेयर अपना रहे हैं, जिनमें एआई पहले से शामिल है। एसएपी और ओरेकल जैसी कंपनियां एआई आधारित उत्पाद बेच रही हैं, जिससे कुछ पारंपरिक आईटी सेवाओं की जरूरत कम हो सकती है।
गार्टनर के मुताबिक, एआई से जुड़े बदलाव खासकर प्रबंधित सेवाओं और ग्राहक सहायता जैसे कामों में मानव श्रम की मांग घटा सकते हैं। अनुमान है कि 2030 तक पारंपरिक प्रबंधित सेवा के करीब 50% अवसर मौजूदा कंपनियों के लिए हासिल करना मुश्किल हो सकता है। जून तिमाही में इंफोसिस ने बताया था कि उसकी कुल आय में एआई से जुड़ी आय 8.2% थी, जबकि टीसीएस की सालाना आधार पर एआई आय 2.6 अरब डॉलर रही थी।
क्षेत्रवार तस्वीर भी अलग-अलग है। अनअर्थइनसाइट के अनुसार अमेरिका फिलहाल सबसे कमजोर बाजारों में है, जबकि यूरोप में लागत घटाने वाली परियोजनाओं से सहारा मिल सकता है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपेक्षाकृत तेज वृद्धि की उम्मीद है, जबकि युद्ध के कारण मध्य पूर्व में कारोबार धीमा पड़ सकता है। गार्टनर को बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा, स्वास्थ्य, विनिर्माण और दूरसंचार में मांग मजबूत रहने की उम्मीद है।
अनअर्थइनसाइट को वित्त वर्ष 2028 में आईटी क्षेत्र की वृद्धि करीब 6% तक पहुंचने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि फिलहाल कंपनियों के सामने तेज वापसी के बजाय धीरे-धीरे सुधरती मांग और एआई के साथ कारोबार का तरीका बदलने की चुनौती बनी हुई है।

