3 साल से जिस मां को परिवार तलाश रहा था, उसका सुराग एक फोटो ने दे दिया। करीब 15 दिन से धरमपुरी क्षेत्र में भटक रही गुड़ियाबाई अपने घर का पूरा पता नहीं बता पा रही थीं। बस इतना कहती थीं- नाम गुड़िया है और खजूरी जाना है। इसी अधूरी जानकारी को जोड़ते हुए जब उनकी फोटो सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में पहुंची तो इंदौर में रह रहे उनके दोनों बेटों तक खबर पहुंच गई। दोनों बेटे धरमपुरी पहुंचे और मां को पहचान लिया। मां-बेटों के इस मिलन का दृश्य बेहद भावुक था। लापता मां को सामने देखकर बेटों की आंखें नम हो गईं। गुड़ियाबाई ने भी शुरुआत में बड़े बेटे धर्मेंद्र ओझा को पहचान लिया। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए परिवार के दूसरे सदस्यों से बात कराई गई। लंबे समय बाद अपनों की आवाज सुनकर गुड़ियाबाई के चेहरे पर भी खुशी नजर आई। नाम मिला, लेकिन पता नहीं मिला धरमपुरी में गुड़ियाबाई के बारे में जानकारी मिलने के बाद भाजपा जिला मीडिया प्रभारी विनोद चंदानी ने उनसे बातचीत कर परिवार तक पहुंचने की कोशिश शुरू की। चंदानी के मुताबिक महिला ने अपना नाम गुड़ियाबाई और स्थान खजूरी बताया। उन्हें पहले लगा कि यह इंदौर के आसपास का कोई खजूरी गांव होगा। वहां फोटो भेजकर जानकारी जुटाई गई, लेकिन परिवार का पता नहीं चला। पता चला कि अशोकनगर के पास खजूरी गांव है। फिर गुना निवासी उनके शिक्षक रहे श्यामबिहारी शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद भार्गव और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के निजी सुरक्षा अधिकारी गणेश जोशी से संपर्क किया गया। महिला की फोटो उन्हें भेजी गई। इसके बाद फोटो सोशल मीडिया और WhatsApp ग्रुपों में आगे बढ़ाई गई। फोटो देखते ही बेटे को हुआ मां का शक महिला के बेटे काम के सिलसिले में इंदौर के गौरी नगर में रहते हैं। दोनों ने फोटो देखी तो उन्हें अपनी मां होने का शक हुआ और वे धरमपुरी पहुंच गए। सामने पहुंचने पर उन्होंने महिला को पहचान लिया। बेटों ने बताया कि उनकी मां करीब तीन साल पहले घर से लापता हो गई थीं। परिवार ने उन्हें कई जगह तलाश किया। रिश्तेदारों से लेकर संभावित ठिकानों तक खोजबीन की गई और संबंधित थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इतने लंबे समय बाद मां के मिलने की उम्मीद परिवार ने लगभग छोड़ दी थी। रात में मां को लेकर इंदौर पहुंचे गुड़ियाबाई की पहचान और परिवार से संपर्क की पुष्टि होने के बाद विनोद चंदानी अपने वाहन से विनोद जायसवाल के साथ रात में उन्हें इंदौर लेकर पहुंचे। वहां दोनों बेटों और अन्य परिजनों ने मां का स्वागत किया। तीन साल बाद घर लौटी मां को सकुशल देखकर परिवार में खुशी का माहौल था। चंदानी ने बताया कि गुड़ियाबाई करीब 15 दिन से धरमपुरी में थीं। एक-दो दिन उनसे संपर्क और बातचीत कर परिवार के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया गया। उन्होंने जो नाम और पता बताया, उसी के आधार पर तलाश शुरू हुई। बाद में सही खजूरी गांव की जानकारी मिली और सोशल मीडिया के जरिए संदेश परिवार तक पहुंच सका।

