उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली में गुरु पर्व के समापन समारोह में शामिल होने के लिए सोमवार 5 अक्टूबर को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह अयोध्या पहुंचेंगे। रानोपाली स्थित उदासीन ऋषि आश्रम में आयोजित समारोह के दौरान वह नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण करेंगे। सीएम योगी के आगमन की संभावन कम हुई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है, हालांकि उनका दौरा अभी आधिकारिक रूप से सुनिश्चित नहीं हुआ है। रक्षामंत्री के आगमन को लेकर आश्रम परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह दोपहर करीब 12 बजे उदासीन आश्रम पहुंचेंगे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह दोपहर करीब 12 बजे उदासीन आश्रम पहुंचेंगे और दोपहर 1:50 बजे तक वहां रहेंगे। इस दौरान वह गुरु पर्व के समापन समारोह में सहभागिता करने के साथ ही नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण करेंगे। समारोह में साधु-संतों, महामंडलेश्वरों, उदासीन संप्रदाय के संतों, श्रद्धालुओं और प्रबुद्धजनों का समागम होगा। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, विधायक, पूर्व सांसद सहित कई जनप्रतिनिधियों के भी शामिल होने की संभावना है। गुरु परंपरा और संस्कृत शिक्षा को मिलेगा नया आयाम उदासीन ऋषि आश्रम के पीठाधीश्वर श्री महंत डॉ. भरत दास महाराज ने कहा कि गुरु पर्व भारतीय सनातन परंपरा में गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। गुरु ही समाज को संस्कार, सदाचार और आध्यात्मिक मूल्यों का मार्ग दिखाते हैं। गुरु पर्व का समापन संतों के सानिध्य में होना गौरव का विषय है। नारायण संस्कृत महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण संस्कृत शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारी सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है और इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए शैक्षणिक संस्थानों को सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रामभद्र दास के मुताबिक, रक्षामंत्री और मुख्यमंत्री के करीब दो घंटे तक आश्रम में रहने का कार्यक्रम प्रस्तावित है। गुरु पर्व के समापन समारोह की अध्यक्षता पीठाधीश्वर श्री महंत डॉ. भरत दास महाराज करेंगे। आयोजन को लेकर आश्रम परिसर को सजाने-संवारने के साथ अतिथियों और श्रद्धालुओं के स्वागत की व्यापक तैयारियां की गई हैं। संतों के सानिध्य में होने वाला यह समारोह आध्यात्मिक चेतना, गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का संदेश देगा।

