इस्पात मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लि. (सेल) और एनएमडीसी को विदेशों में खनिज संपत्तियों की तलाश करने को कहा है। इसका उद्देश्य दीर्घकालिक कच्चे माल की जरूरतों को सुरक्षित करना और उत्पादन लागत को नियंत्रित करना है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। यह पूछे जाने पर कि क्या विशेष रूप से सेल और एनएमडीसी को विदेशों में खनन परिसंपत्तियां तलाशने के लिए कहा गया है, अधिकारी ने इसकी पुष्टि की।
उन्होंने कहा कि इस कदम से भविष्य की कच्चे माल की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और लागत भी कम की जा सकेगी। हालांकि, उन्होंने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। इस्पात उत्पादन के लिए लौह अयस्क और कोकिंग कोयला दो प्रमुख कच्चे माल हैं। इसके अलावा चूना पत्थर और पल्वराइज्ड कोल इंजेक्शन (कोयले का चूरा) भी महत्वपूर्ण कच्चा माल है। भारत में लौह अयस्क पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन भारतीय इस्पात कंपनियां, जिनमें सेल भी शामिल है, अपनी कोकिंग कोयले की जरूरत का करीब 85-90 प्रतिशत आयात करती हैं। यह कोयला मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया और मोजाम्बिक जैसे देशों से आता है।
इसी तरह चूना पत्थर का भी कुछ हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात किया जाता है। निजी क्षेत्र की इस्पात कंपनी जेएसडब्ल्यू स्टील भी विदेशों में कोकिंग कोयले की परिसंपत्तियां हासिल कर चुकी है। कंपनी की योजना अपनी कच्चे माल की करीब 50 प्रतिशत जरूरत अपने स्रोतों से पूरी करने की है।
वहीं, मुख्य रूप से लौह अयस्क के उत्पादन में सक्रिय एनएमडीसी अन्य खनिजों की खोज और उत्पादन के क्षेत्र में भी विस्तार करना चाहती है। इसका उद्देश्य इस्पात समेत विभिन्न उद्योगों की बढ़ती खनिज जरूरतों को पूरा करना है। एनएमडीसी के चेयरमैन अमिताव मुखर्जी ने हाल में कहा था कि उनका लक्ष्य वर्ष 2030 तक कंपनी के कुल राजस्व में लौह अयस्क के अलावा अन्य खनिजों की हिस्सेदारी को कम से कम 20 प्रतिशत तक पहुंचाना है।

