बिना परमिशन मेडिकल कैंप लगाकर ग्रामीणों से 4 हजार वसूले:फ्लैक्स में विधायक की फोटो लगाकर दवाएं बेचीं, 4 गिरफ्तार; CMHO बोले- कार्रवाई होगी

बिना परमिशन मेडिकल कैंप लगाकर ग्रामीणों से 4 हजार वसूले:फ्लैक्स में विधायक की फोटो लगाकर दवाएं बेचीं, 4 गिरफ्तार; CMHO बोले- कार्रवाई होगी

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में कथित फर्जी मेडिकल कैंप को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि हैदाराबाद की NGO रेट्रो ह्यूमेनकेयर फाउंडेशन ने 100 रुपए रजिस्ट्रेशन लेकर BP, शुगर, थायराइड समेत कई बीमारियों की जांच की। बाद में दवाइयों और हेल्थ प्रोडक्ट के नाम पर 1 से 4 हजार रुपए तक लिए। जबकि कैंप के पोस्टर में विधायक अनिला भेड़िया की फोटो भी लगाई गई थी। इसके अलावा पोस्टर में दावा किया था कि 8000 रुपए से ज्यादा खर्च होने वाला इलाज अब मात्र 100 रुपए में होगा। साथ ही यह भी लिखा गया था। वहीं, संबंधित पंचायत का कहना है कि कैंप के लिए न आवेदन दिया गया था, न अनुमति ली गई थी। हालांकि, इस मामले में पुलिस ने NGO से जुड़े 4 लोगों को गिरफ्तार कर 7.18 लाख रुपए का सामान जब्त किया है। इधर, स्वास्थ्य विभाग भी जांच कर रहा है कि कैंप लगाने वालों के पास जरूरी अनुमति और मरीजों की जांच की वैध योग्यता थी या नहीं। अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग संस्था, जब्त उत्पादों, दस्तावेजों और ग्रामीणों से लिए गए पैसों की जांच कर रहे हैं। मामला डौंडीलोहारा ब्लॉक के कोरगुड़ा गांव का है। देखिए पहले ये तस्वीरें- 100 रुपए में रजिस्ट्रेशन, जांच के बाद 4 हजार तक की दवाइयां जानकारी के मुताबिक कोरगुड़ा गांव में 30 सितंबर को मुनादी कराकर मेडिकल कैंप लगाए जाने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद 1 अक्टूबर को पंचायत भवन में शिविर लगाया गया। यहां पहुंचने वाले ग्रामीणों से 100 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस ली गई। इसके बाद BP, शुगर, थायराइड, लिवर और हार्ट से जुड़ी बीमारियों की जांच की गई। ग्रामीणों के मुताबिक जांच के बाद उन्हें अलग-अलग बीमारियां बताकर 1 हजार से 4 हजार रुपए तक के दवाइयां और हेल्थ प्रोडक्ट दिए गए। इनमें यौन क्षमता बढ़ाने का दावा करने वाले उत्पाद भी शामिल थे। समाजसेवी की शिकायत पर 4 आरोपी गिरफ्तार मामले की जानकारी मिलने के बाद शिकायतकर्ता और समाजसेवी तरुण नाथ योगी मौके पर पहुंचे। उन्होंने फौरन मामले की जानकारी बालोद थाना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने खैरागढ़-छुईखदान-गंडई निवासी राजेश कुमार कोठारी (40), भिलाई निवासी टी. वेंकटेश राव (47), कवर्धा निवासी सुरेन्द्र पटेल (29) और दुर्ग निवासी मोहित कुमार रक्सेल (38) को गिरफ्तार किया। पुलिस ने चारों के खिलाफ BNS की धारा 106 के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 7.18 लाख रुपए का सामान जब्त किया है। मामले में स्वास्थ्य विभाग भी जांच कर रहा है कि शिविर में किस तरह के उत्पाद बांटे और बेचे गए और ग्रामीणों की जांच करने वालों के पास जरूरी योग्यता और अनुमति थी या नहीं। अनुमति और दस्तावेजों की जांच जारी इस मामले में बालोद SDOP विनय कुमार साहू ने कहा कि वाहन, दवाइयों, हेल्थ प्रोडक्ट और अन्य सामग्री समेत कुल 7 लाख 18 हजार 597 रुपए की सामग्री जब्त की गई है। पुलिस वैधानिक अनुमति और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। पंचायत से न आवेदन दिया, न अनुमति ली ग्राम पंचायत कोरगुड़ा के उपसरपंच विजय कुमार यादव ने बताया कि पंचायत को शिविर की पहले से कोई सूचना नहीं दी गई थी। पंचायत भवन में कैंप लगाने के लिए न आवेदन दिया गया और न पंचायत से अनुमति ली गई।उनका आरोप है कि आयोजकों ने पंचायत भवन खोलकर शिविर लगाया और भवन की बिजली का भी इस्तेमाल किया। चक्कर की शिकायत लेकर पहुंचीं, 2400 रुपए की दवाइयां दीं ग्राम कोरगुड़ा की रहने वाली हिना देवांगन ने बताया कि वह सिर घूमने, चक्कर और कमजोरी की समस्या लेकर शिविर में पहुंची थीं। उनके अनुसार उन्हें मस्तिष्क से संबंधित दवा, मालिश का तेल और पेट साफ करने की दवा दी गई। इसके बदले उनसे 2,400 रुपए लिए गए। हिना का कहना है कि उन्हें दिए गए उत्पादों को दवा बताया गया था। उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि ये फूड सप्लीमेंट हैं। हैदराबाद से डॉक्टर आने का किया गया प्रचार ग्रामीण राधेलाल देवांगन ने बताया कि उन्हें गांव में हैदराबाद से बड़े डॉक्टरों के आने की जानकारी मिली थी। इसी भरोसे पर वह और अन्य ग्रामीण जांच कराने पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार मुनादी और प्रचार के जरिए बताया गया था कि हैदराबाद से डॉक्टर शिविर में आएंगे। फिंगरप्रिंट से जांच होने और बाहर 8 से 10 हजार रुपए में होने वाली जांच 100 रुपए में करने की बात भी कही गई थी। ग्रामीणों का दावा है कि 100 रुपए पंजीयन या जांच शुल्क लेने के बाद अलग-अलग लोगों से दवा और अन्य उत्पादों के नाम पर 300 रुपए से लेकर 2 हजार से 4 हजार रुपए तक लिए गए। ‘100 बीमारी का 1 इलाज’ बताकर किया इलाज का दावा शिकायतकर्ता और बालोद के समाजसेवी तरुण नाथ योगी ने बताया कि रेट्रो ह्यूमेनकेयर फाउंडेशन की ओर से ग्रामीणों की जांच कर उन्हें गुमराह किया जा रहा था। उनके अनुसार बिना अनुमति, वैध मेडिकल टीम और डॉक्टरों के ग्रामीणों को दवाइयां दी और बेची जा रही थीं। उन्होंने बताया कि शिविर में ‘100 बीमारी का 1 इलाज’ बताकर इलाज करने का दावा किया जा रहा था। ग्रामीणों का विश्वास जीतने के लिए क्षेत्रीय विधायक अनिला भेड़िया की फोटो भी बिना अनुमति फ्लैक्स पर लगाई गई। योगी के अनुसार शुगर, बीपी, हार्ट-लिवर, किडनी, गुप्त रोग, माइग्रेन, मासिक धर्म, त्वचा, जोड़ों के दर्द, मोटापा कम करने, कमजोरी और एलर्जी समेत कई बीमारियों के इलाज का दावा किया जा रहा था। उन्होंने कंपनी की जांच की भी मांग की है। साथ ही पकड़े गए लोगों के बैंक खातों की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। नियमों का उल्लंघन मिला तो होगी कार्रवाई छत्तीसगढ़ रेड क्रॉस सोसायटी के चेयरमैन और बालोद जिला पंचायत उपाध्यक्ष तोमन साहू ने कहा कि ग्रामीणों को कथित रूप से भ्रामक स्वास्थ्य जानकारी देकर बिना वैध डॉक्टर की मौजूदगी के दवा बताकर फूड सप्लीमेंट बेचे जाने की जानकारी मिली है। स्वास्थ्य विभाग से नहीं ली थी अनुमति सीएमएचओ डॉ. जेएल उइके ने बताया कि मेडिकल कैंप लगाने से पहले अनुमति लेना जरूरी होता है। संबंधित लोगों ने कैंप लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग से कोई अनुमति नहीं ली थी। विभाग की ओर से भी जांच की जा रही है कि शिविर में किस तरह की दवाइयां बांटी और बेची गईं। उन्होंने कहा कि मरीजों की जांच करने वालों के पास जरूरी वैध योग्यता और अनुमति थी या नहीं, इसकी भी जांच होगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि बिना अधिकृत डॉक्टर और अनुमति के किसी से दवाई न लें। गलत दवा के साइड इफेक्ट के साथ गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। संस्था, दवाइयों और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच पुलिस ने शिविर से जब्त सामग्री के आधार पर जांच शुरू कर दी है। अब संस्था की वैधता, शिविर की अनुमति, पंचायत भवन के इस्तेमाल, स्वास्थ्य विभाग को दी गई सूचना, जब्त उत्पादों की प्रकृति और ग्रामीणों से ली गई राशि समेत अन्य बिंदुओं की जांच की जा रही है। जांच में जब्त सामग्री की पैकेजिंग और लेबल, बिल-रसीद, भुगतान रिकॉर्ड, पंचायत के आवेदन और अनुमति संबंधी दस्तावेज देखे जाएंगे। संस्था प्रमुख के. रत्नम से भी दस्तावेज मांगे गए हैं। इन दस्तावेजों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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