आधुनिक दौर में शादी-विवाह के रिश्ते तलाशने का जरिया अखबारों और बिचौलियों से निकलकर डिजिटल मैट्रिमोनियल ऐप्स तक पहुंच चुका है। हालांकि, सुविधा के साथ-साथ इन मंचों पर साइबर अपराध का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। साइबर ठग अब जीवनसाथी की तलाश कर रहे युवाओं और उनके परिवारों को अपना आसान शिकार बना रहे हैं। नालंदा के साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने जिलेवासियों को आगाह करते हुए कहा है कि मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय असामाजिक तत्वों से बेहद सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि कई लोग फर्जी प्रोफाइल तैयार कर ठगी की फिराक में घूम रहे हैं। विश्वास जीतकर निजी तस्वीरें मंगाते हैं जालसाज साइबर डीएसपी के अनुसार, नालंदा साइबर थाने में इस प्रकार के कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जांच में सामने आया है कि जालसाज पहले आकर्षक और फर्जी बायोडाटा के जरिए पीड़ितों से संपर्क साधते हैं। इसके बाद वे नियमित बातचीत के जरिए पीड़ित का भरोसा जीतते हैं और शादी का झांसा देकर उनसे निजी तस्वीरें, वीडियो व गोपनीय दस्तावेज हासिल कर लेते हैं। संवेदनशील सामग्री हाथ में आते ही आरोपी ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू कर देते हैं और सामाजिक बदनामी का खौफ दिखाकर पीड़ितों से मोटी रकम की उगाही की जाती है। शादी तय करने से पहले बायोडाटा का सत्यापन जरूरी डीएसपी ऋषभ आनंद ने आम लोगों और युवाओं से अपील की है कि वे ऑनलाइन मंचों पर दिखने वाली जानकारियों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी व्यक्ति से बातचीत आगे बढ़ाने से पहले उसके व्यक्तिगत, पारिवारिक और पेशेवर बायोडाटा की जमीनी स्तर पर पड़ताल अवश्य करें। इसके अलावा किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी संवेदनशील तस्वीरें या वित्तीय दस्तावेज साझा करने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत करें शिकायत उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऑनलाइन बातचीत के दौरान कोई व्यक्ति किसी आपात स्थिति या मजबूरी का हवाला देकर पैसों की मांग करने लगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। किसी भी तरह की ठगी या ब्लैकमेलिंग का शिकार होने पर घबराने के बजाय तत्काल नजदीकी साइबर थाने या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते आरोपियों पर कार्रवाई की जा सके। आधुनिक दौर में शादी-विवाह के रिश्ते तलाशने का जरिया अखबारों और बिचौलियों से निकलकर डिजिटल मैट्रिमोनियल ऐप्स तक पहुंच चुका है। हालांकि, सुविधा के साथ-साथ इन मंचों पर साइबर अपराध का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। साइबर ठग अब जीवनसाथी की तलाश कर रहे युवाओं और उनके परिवारों को अपना आसान शिकार बना रहे हैं। नालंदा के साइबर डीएसपी ऋषभ आनंद ने जिलेवासियों को आगाह करते हुए कहा है कि मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय असामाजिक तत्वों से बेहद सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि कई लोग फर्जी प्रोफाइल तैयार कर ठगी की फिराक में घूम रहे हैं। विश्वास जीतकर निजी तस्वीरें मंगाते हैं जालसाज साइबर डीएसपी के अनुसार, नालंदा साइबर थाने में इस प्रकार के कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जांच में सामने आया है कि जालसाज पहले आकर्षक और फर्जी बायोडाटा के जरिए पीड़ितों से संपर्क साधते हैं। इसके बाद वे नियमित बातचीत के जरिए पीड़ित का भरोसा जीतते हैं और शादी का झांसा देकर उनसे निजी तस्वीरें, वीडियो व गोपनीय दस्तावेज हासिल कर लेते हैं। संवेदनशील सामग्री हाथ में आते ही आरोपी ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू कर देते हैं और सामाजिक बदनामी का खौफ दिखाकर पीड़ितों से मोटी रकम की उगाही की जाती है। शादी तय करने से पहले बायोडाटा का सत्यापन जरूरी डीएसपी ऋषभ आनंद ने आम लोगों और युवाओं से अपील की है कि वे ऑनलाइन मंचों पर दिखने वाली जानकारियों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। किसी भी व्यक्ति से बातचीत आगे बढ़ाने से पहले उसके व्यक्तिगत, पारिवारिक और पेशेवर बायोडाटा की जमीनी स्तर पर पड़ताल अवश्य करें। इसके अलावा किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी संवेदनशील तस्वीरें या वित्तीय दस्तावेज साझा करने से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत करें शिकायत उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऑनलाइन बातचीत के दौरान कोई व्यक्ति किसी आपात स्थिति या मजबूरी का हवाला देकर पैसों की मांग करने लगे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। किसी भी तरह की ठगी या ब्लैकमेलिंग का शिकार होने पर घबराने के बजाय तत्काल नजदीकी साइबर थाने या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते आरोपियों पर कार्रवाई की जा सके।

