बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को पनाह देना भारत की मजबूरी थी। यह बात बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन कार्यक्रम में शनिवार को कही है। एक छात्र ने त्रिवेदी से पूछा कि हमारे लोगों की हत्या करने वाली शेख हसीना कब हमारे मुल्क वापस लायी जाएंगी? जवाब में त्रिवेदी ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया जारी है। हसीना को बांग्लादेश कब भेजा जाएगा, इसकी समयसीमा नहीं बताई जा सकती। सत्ता से हटने के बाद वे 5 अगस्त 2024 को भारत आई थीं। बीते दो साल से हसीना भारत में रह रहींं हैं। भारत हसीना को आने नहीं देता तो स्थिति खराब हो सकती थी हसीना के भारत आने देने के फैसले पर भी त्रिवेदी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2024 को जब हसीना ने ढाका छोड़ा, तब भी वे बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं और वहां हालात तेजी से बदल रहे थे। त्रिवेदी ने कहा कि उस समय भारत के पास हसीना को दिल्ली में उतरने की अनुमति देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अगर भारत उन्हें उतरने की अनुमति नहीं देता तो स्थिति खराब हो सकती थी। त्रिवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि हसीना को भारत भारतीय वायुसेना या भारतीय सेना नहीं लाई थी। उन्हें बांग्लादेश एयरफोर्स के विमान से भारत लाया गया था। हसीना ने कहा- दिसंबर में लौटूंगी हसीना ने 5 अगस्त 2026 को कहा था कि वह दिसंबर तक बांग्लादेश लौटेंगी। CNN को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षा, वकील तक पहुंच, अपना बचाव करने का अधिकार, स्वतंत्र न्यायपालिका और निष्पक्ष सुनवाई चाहिए। उन्होंने BNP के साथ किसी भी बैकचैनल बातचीत से इनकार किया था और कहा था कि भारत अब भी उनका दोस्त है। रहमान की सरकार कई बार प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी 12 फरवरी के चुनाव के बाद तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार सत्ता में आई। इन चुनावों में हसीना की पार्टी अवामी लीग को हिस्सा लेने की अनुमति नहीं थी। नई सरकार ने कई बार हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई है। हसीना को वापस भेजने का मुद्दा भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव की बड़ी वजह बना हुआ है। इसका असर तारिक रहमान के भारत दौरे पर भी पड़ा है। भारत ने पिछले महीने हुए BRICS समिट में तारिक रहमान को शामिल होने का न्योता दिया था। इसके अलावा फरवरी से ही भारत की ओर से उन्हें अलग से भारत आने का निमंत्रण दिया गया था। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने एक भी बार भारत का दौरा नहीं किया। भारत-बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि है भारत और बांग्लादेश ने 2013 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें कुछ परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को दूसरे देश को सौंपने से इनकार करने के प्रावधान हैं। इनमें राजनीतिक प्रकृति के अपराध से जुड़े मामले भी शामिल हैं। हसीना पर बांग्लादेश में 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों से जुड़े गंभीर आरोप हैं। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार उन्हें वापस लाकर कानूनी कार्रवाई करना चाहती है। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में हसीना और उनके तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मौत की सजा सुनाई थी। 15 सितंबर 2026 को हसीना सरकार के कुछ पूर्व सहयोगियों को भी सजा सुनाई गई। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की जांच के मुताबिक, जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी। ———————- यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान ने बांग्लादेश जा रहा न्यूक्लियर फ्यूल रोका: रूसी प्लेन को एयरस्पेस नहीं दिया पाकिस्तान ने बिजली संकट झेल रहे बांग्लादेश का परमाणु ईंधन अपने आसमान से नहीं गुजरने दिया। पूरी खबर पढ़ें…
भारतीय हाई कमिश्नर बोले- हसीना को पनाह देना मजबूरी थी:उन्हें बांग्लादेश भेजने की प्रकिया जारी; तख्तापलट के बाद 2 साल से भारत में पूर्व PM

