केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को भोपाल में आयोजित ‘नवगति’ एजुकेशन स्कॉलरशिप कार्यक्रम में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर समाज से आत्ममंथन करने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे नारे “एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा” का जिक्र करते हुए कहा कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आई कि मेरी बेटियों को यह नारा लिखना पड़ रहा है। शिवराज ने कहा कि बेटियों का मान-सम्मान और उनकी सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। कई बार बेटियों को गलत नजरों से देखने वाले लोग अनजान नहीं, बल्कि जान-पहचान के ही होते हैं। ऐसे में पुरुषों, बेटों और उनके माता-पिता को भी आत्ममंथन करना होगा। उन्होंने कहा, “यह नारा कभी सार्थक और सफल नहीं होना चाहिए। यदि हमारी बहन-बेटियां पुरुषों पर विश्वास नहीं कर पाएंगी तो समाज और देश कैसे आगे बढ़ेगा।” उन्होंने कहा कि नारी उनके लिए मां के समान और बेटी देवी के समान है और उनके सम्मान व सुरक्षा के लिए वे हरसंभव प्रयास करते रहेंगे। शिवराज बोले- हमारे खिलाड़ियों ने पाकिस्तान को भी पीट दिया भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए शिवराज ने कहा कि देश के बेटे-बेटियां लगातार भारत का मान बढ़ा रहे हैं। उन्होंने क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम की जीत का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे खिलाड़ियों ने पाकिस्तान को भी पीट दिया और हम कई मोर्चों पर जीत सकते हैं। उन्होंने एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की और कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं। उन्होंने महिला हॉकी टीम की उपलब्धि का भी जिक्र किया। घायल पायलट ने हनुमान चालीसा पढ़ते हुए बचाई यात्रियों की जान शिवराज ने विमान हादसे का जिक्र करते हुए पायलट के साहस की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि चोट लगने के बाद भी पायलट ने धैर्य नहीं खोया और हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए विमान को सुरक्षित नीचे उतारा, जिससे सैकड़ों यात्रियों की जान बची। ड्राइवर ट्रक नहीं, देश और लोगों की जिंदगी चलाते हैं भोपाल के सेज यूनिवर्सिटी में आयोजित श्रीराम फाइनेंस के ‘नवगति’ कार्यक्रम में ड्राइवरों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजना की सराहना करते हुए शिवराज ने कहा कि ड्राइवर देश की अर्थव्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रक ड्राइवर कई-कई दिनों तक परिवार से दूर रहकर चेन्नई, अहमदाबाद और गुवाहाटी जैसे दूर-दराज के शहरों तक सामान पहुंचाते हैं। किसान की उपज को मंडी तक पहुंचाने से लेकर निर्माण सामग्री, बच्चों को स्कूल और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने तक ड्राइवरों की भूमिका है। शिवराज ने कहा, “ड्राइवर केवल ट्रक नहीं चलाते, देश चलाते हैं, लोगों की जिंदगी चलाते हैं।” उन्होंने कहा कि हर पिता अपने बच्चों के साथ समय बिताना चाहता है, लेकिन ड्राइवर लंबे समय तक परिवार से दूर रहकर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। 8वीं से 10वीं तक 4 हजार, 11वीं-12वीं में 4500 रुपए छात्रवृत्ति शिवराज ने बताया कि कक्षा 8वीं से 10वीं तक 60 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले बच्चों को सालाना 4 हजार रुपए छात्रवृत्ति दी जाएगी। कक्षा 11वीं और 12वीं में यह राशि 4,500 रुपए होगी। 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को 5 हजार रुपए दिए जाएंगे। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे मेहनत करके 90 प्रतिशत से अधिक अंक लाएं। साथ ही भरोसा दिलाया कि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य से जुड़ी जानकारी का रिकॉर्ड रखा जाएगा और आगे जरूरत पड़ने पर उनकी मदद की जाएगी। पढ़ाई के बाद रोजगार में भी ‘मामा’ साथ खड़ा रहेगा शिवराज ने कहा कि बच्चों की मदद केवल छात्रवृत्ति तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र में चल रही ‘मामा कोचिंग क्लास’ का जिक्र करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बच्चों को निशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने पर भी काम किया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद बच्चे अपने पैरों पर खड़े हो सकें और रोजगार या स्वरोजगार शुरू कर सकें, यही उद्देश्य है। उन्होंने बच्चों से कहा, “पढ़ाई के बाद रोजगार में भी मामा आपके साथ खड़ा रहेगा, क्योंकि आपकी जिंदगी बेहतर बननी चाहिए।” सांची में मधुमेह पर विशेषज्ञों से चर्चा इसके बाद शिवराज सिंह चौहान अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के सांची पहुंचे, जहां उन्होंने रिसर्च सोसायटी फॉर द स्टडीज ऑफ डायबिटीज इन इंडिया के 11वें वार्षिक सम्मेलन RSSDI MPCONE-2026 में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि मधुमेह अब तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। इसके उपचार के साथ बीमारी की रोकथाम, जागरूकता और लगातार शोध पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने चिकित्सा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों के बीच बेहतर समन्वय से मधुमेह के खिलाफ प्रभावी रणनीति तैयार करने पर जोर दिया।

