लातेहार में 9 साल में 1144 सड़क हादसे, 866 मौतें:हर साल औसतन 96 मर रहे, इस साल के अगस्त तक 114 हादसों में 98 मौतें

लातेहार में 9 साल में 1144 सड़क हादसे, 866 मौतें:हर साल औसतन 96 मर रहे, इस साल के अगस्त तक 114 हादसों में 98 मौतें

लातेहार जिले में सड़क हादसे लगातार जानलेवा बने हुए हैं। वर्ष 2018 से अगस्त 2026 तक जिले में 1144 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। जिनमें 866 लोगों की मौत हो गई। 879 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वर्ष 2026 में अगस्त तक ही 114 हादसे हो चुके हैं। इनमें 98 लोगों की जान गई है। यानी इस साल अब तक औसतन हर माह 12 से अधिक लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई है। हादसों के प्रमुख कारणों में तेज रफ्तार, यातायात नियमों का पालन नहीं करना, बिना हेलमेट बाइक चलाना, सीट बेल्ट नहीं लगाना, वाहन चालकों की लापरवाही और खराब सड़कें शामिल हैं। दुर्घटनाओं में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की संख्या अधिक बताई जा रही है। खासकर तेज रफ्तार और बिना हेलमेट बाइक चलाना युवाओं के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। सात नए ब्लैक स्पॉट चिन्हित आंकड़ों के अनुसार 2018 में 133 दुर्घटनाओं में 82 मौतें हुई थीं। 2019 में 103 हादसों में 59, 2020 में 91 में 70, 2021 में 112 में 92, 2022 में 127 में 106, 2023 में 119 में 118, 2024 में 121 में 97 और 2025 में 159 दुर्घटनाओं में 120 लोगों की मौत हुई। सड़क सुरक्षा को लेकर ई-चालान, वाहन जांच और जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद हादसों की रफ्तार पर अपेक्षित अंकुश नहीं लग सका है। जिले में सात अन्य संभावित दुर्घटना स्थलों को भी चिन्हित किया गया है। इनमें मनिका डिग्री कॉलेज, डुडंगी एसआर पेट्रोल पंप, हिसरी, बनियों पुल बालूमाथ, सिसकारियां घाटी और अमझरिया घाटी समेत अन्य क्षेत्र शामिल हैं। इन स्थानों पर साइन बोर्ड और ब्रेकर लगाए गए हैं, ताकि वाहन चालकों को पहले से सावधान किया जा सके। तीन ट्रॉमा सेंटर तैयार, पर डॉक्टर नहीं सड़क हादसों में घायलों को तत्काल इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चंदवा, बालूमाथ और बरवाडीह में तीन ट्रॉमा सेंटर बनाए गए हैं। लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता नहीं होने के कारण इन केंद्रों पर अब तक इलाज शुरू नहीं हो सका है। हादसे में गंभीर रूप से घायल लोगों को अक्सर रांची रेफर करना पड़ता है। ऐसे में समय पर विशेषज्ञ उपचार नहीं मिलने से उनकी जान पर खतरा बढ़ जाता है। जिला परिवहन पदाधिकारी उमेश मंडल ने कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। लोगों को परिवहन नियमों का पालन करना चाहिए। इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं, ताकि वाहन चालक पहले से सावधान हो सकें। लातेहार जिले में सड़क हादसे लगातार जानलेवा बने हुए हैं। वर्ष 2018 से अगस्त 2026 तक जिले में 1144 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। जिनमें 866 लोगों की मौत हो गई। 879 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वर्ष 2026 में अगस्त तक ही 114 हादसे हो चुके हैं। इनमें 98 लोगों की जान गई है। यानी इस साल अब तक औसतन हर माह 12 से अधिक लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई है। हादसों के प्रमुख कारणों में तेज रफ्तार, यातायात नियमों का पालन नहीं करना, बिना हेलमेट बाइक चलाना, सीट बेल्ट नहीं लगाना, वाहन चालकों की लापरवाही और खराब सड़कें शामिल हैं। दुर्घटनाओं में 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की संख्या अधिक बताई जा रही है। खासकर तेज रफ्तार और बिना हेलमेट बाइक चलाना युवाओं के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। सात नए ब्लैक स्पॉट चिन्हित आंकड़ों के अनुसार 2018 में 133 दुर्घटनाओं में 82 मौतें हुई थीं। 2019 में 103 हादसों में 59, 2020 में 91 में 70, 2021 में 112 में 92, 2022 में 127 में 106, 2023 में 119 में 118, 2024 में 121 में 97 और 2025 में 159 दुर्घटनाओं में 120 लोगों की मौत हुई। सड़क सुरक्षा को लेकर ई-चालान, वाहन जांच और जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद हादसों की रफ्तार पर अपेक्षित अंकुश नहीं लग सका है। जिले में सात अन्य संभावित दुर्घटना स्थलों को भी चिन्हित किया गया है। इनमें मनिका डिग्री कॉलेज, डुडंगी एसआर पेट्रोल पंप, हिसरी, बनियों पुल बालूमाथ, सिसकारियां घाटी और अमझरिया घाटी समेत अन्य क्षेत्र शामिल हैं। इन स्थानों पर साइन बोर्ड और ब्रेकर लगाए गए हैं, ताकि वाहन चालकों को पहले से सावधान किया जा सके। तीन ट्रॉमा सेंटर तैयार, पर डॉक्टर नहीं सड़क हादसों में घायलों को तत्काल इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चंदवा, बालूमाथ और बरवाडीह में तीन ट्रॉमा सेंटर बनाए गए हैं। लेकिन डॉक्टरों की उपलब्धता नहीं होने के कारण इन केंद्रों पर अब तक इलाज शुरू नहीं हो सका है। हादसे में गंभीर रूप से घायल लोगों को अक्सर रांची रेफर करना पड़ता है। ऐसे में समय पर विशेषज्ञ उपचार नहीं मिलने से उनकी जान पर खतरा बढ़ जाता है। जिला परिवहन पदाधिकारी उमेश मंडल ने कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। लोगों को परिवहन नियमों का पालन करना चाहिए। इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में साइन बोर्ड भी लगाए गए हैं, ताकि वाहन चालक पहले से सावधान हो सकें।  

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