Kiran Deo ने Bastar बाढ़ पर CR Paatil को लिखा पत्र, विशेष राहत पैकेज मांगा

Kiran Deo ने Bastar बाढ़ पर CR Paatil को लिखा पत्र, विशेष राहत पैकेज मांगा

रायपुर, दो अक्टूबर छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष सीआर पाटिल को पत्र लिखकर उड़ीसा स्थित खातीगुड़ा बांध से अचानक पानी छोड़े जाने के कारण बस्तर संभाग में उत्पन्न भीषण बाढ़ की स्थिति से अवगत कराया और प्रभावितों के लिए विशेष राहत एवं मुआवजा पैकेज की मांग की। भाजपा पदाधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। देव ने पत्र में कहा कि इंद्रावती जलाशय (खातीगुड़ा बांध) से अग्रिम चेतावनी और उचित अंतर-राज्यीय समन्वय के बिना भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से इंद्रावती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया।

उन्होंने पत्र में बताया कि इसके कारण जगदलपुर शहर के कई वार्ड और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र जलमग्न हो गए, लाखों एकड़ फसलें तबाह हुईं, मकान क्षतिग्रस्त हुए, मवेशी बह गए और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि अंतर-राज्यीय जल विनियमन के अभाव तथा जोरा नाला की भौगोलिक स्थिति और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। देव ने बाढ़ से नष्ट खरीफ फसलों के लिए किसानों को प्रति एकड़ एनडीआरएफ मद से विशेष राहत राशि तत्काल मंजूर करने की मांग की।

उन्होंने क्षतिग्रस्त कच्चे और पक्के मकानों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता से नए मकान तथा तत्काल आर्थिक सहायता देने, बह गए मवेशियों और प्रभावित छोटे व्यापारियों एवं दुकानदारों के नुकसान का त्वरित सर्वे कर डीबीटी के माध्यम से मुआवजा देने की मांग भी की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने जोरा नाला के लिए नए सिरे से डीपीआर तैयार कर उसे लागू करने की जरूरत बताई। उन्होंने अनियंत्रित कटाव और इंद्रावती नदी के जल विचलन को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन कराने तथा जोरा नाला पर स्वचालित आधुनिक ‘गेटेड रेगुलेटर स्ट्रक्चर’ बनाने का सुझाव दिया, ताकि मानसून के दौरान अतिरिक्त जलप्रवाह को वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित कर बस्तर पर बाढ़ के दबाव को कम किया जा सके।

देव ने मांग की कि खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़े जाने के समय और मात्रा का रियल-टाइम टेलीमेट्री डेटा छत्तीसगढ़ प्रशासन के साथ साझा करने के लिए केंद्रीय जल आयोग को नोडल एजेंसी बनाया जाए। उन्होंने इंद्रावती बेसिन में सेंसर आधारित चेतावनी प्रणालियां स्थापित करने की मांग की, ताकि पानी छोड़े जाने से कम-से-कम 24 से 48 घंटे पहले निचले इलाकों को खाली कराया जा सके। पदाधिकारियों के अनुसार, देव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और छत्तीसगढ़ के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा को भी पत्र लिखकर बस्तर संभाग, विशेषकर जगदलपुर और इंद्रावती नदी के तटीय क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ से अवगत कराया तथा तत्काल राहत, विशेष मुआवजा पैकेज और दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन की मांग की।

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