एशियन गेम्स में बिहार के खिलाड़ी को मिला पहला मेडल:भारतीय टीम ने सेपकटकरा में ब्रॉन्ज मेडल जीता, मेंस क्वाड्रेंट सेमीफाइनल हार गई

एशियन गेम्स में बिहार के खिलाड़ी को मिला पहला मेडल:भारतीय टीम ने सेपकटकरा में ब्रॉन्ज मेडल जीता, मेंस क्वाड्रेंट सेमीफाइनल हार गई

भारतीय टीम ने सेपकटकरा में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इस एशियन गेम्स में बिहार के खिलाड़ी को यह पहला मेडल है। बिहार के बॉबी कुमार सेपकटकरा टीम में खेल रहे थे। टीम सेपकटकरा के मेंस क्वाड्रेंट सेमीफाइनल हार गई और उसे ब्रॉन्ज मेडल से ही संतोष करना पड़ा। इंडिया जापान के खिलाफ 0-2 (12-15, 13-15) से हार गई है। टीम ने इस गेम में दूसरा मेडल जीता है। टीम पहली बार 2018 में चैंपियन बनी थी। वहीं, एशियन गेम्स में अबतक बिहार के खिलाड़ी को मिला यह चौथा मेडल है। इसके अलावा, गुरुवार को इशान किशन और वैभव सूर्यवंशी से सजी भारतीय क्रिकेट टीम ने भी एशियन गेम्स के खिताबी मुकाबले में पहुंचकर रजत पदक पक्का कर लिया है। एशियन गेम्स में बिहार के अबतक 3 खिलाड़ी जीत चुके पदक एशियन गेम्स में अबतक बिहार के 3 खिलाड़ी देश के लिए पदक जीत चुके हैं। 2006 में दोहा एशियन गेम्स में भारतीय कबड्‌डी टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। उस समय प्रदेश के राजीव कुमार टीम के सदस्य थे। 2010 में चीन में हुए एशियन खेल में सोना जीतने वाली टीम में मोकामा की स्मिता कुमारी शामिल थीं। 2014 में साउथ कोरिया में संपन्न प्रतियोगिता की ट्रैप शूटिंग टीम स्पर्धा में भारत को कांस्य पदक मिला था। टीम में वर्तमान में राज्य की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह भी शामिल थी। बचपन में क्रिकेट खेलने का था शौक पटना के कंकड़बाग निवासी बॉबी कुमार ने सेपक टकरा में बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। बॉबी को बचपन से ही खेलों में दिलचस्पी थी। शुरुआत में वे क्रिकेट खेलते थे। मगर परिवार पढ़ाई करने को प्राथमिकता देता था। वर्ष 2015 में उन्होंने सेपक टकरा का खेल देखा। इस खेल ने उन्हें आकर्षित किया और उन्होंने इसे सीखने का निर्णय लिया। मगर सेपक टकरा सीखना शुरू करने के बाद शुरुआती दौर में पारिवारिक दबाव के कारण उन्हें खेल छोड़ना पड़ा। SAI में हुआ सिलेक्शन उसके बाद बदली किस्मत उनका खेल के प्रति लगाव कम नहीं हुआ। उन्होंने फिर से मैदान पर वापसी की और नियमित अभ्यास शुरू किया। शुरुआती दौर में उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और खेल सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ा, क्योंकि बिहार में संसाधनों की कमी थी। 2018 से बिहार सरकार ने उन्हें इस खेल में आगे बढ़ाने के लिए सहयोग देना शुरू किया। उनका चयन भारतीय खेल प्राधिकरण यानी SAI के प्रशिक्षण केंद्र में हुआ। वहां उन्हें बेहतर खेल सुविधाएं मिलीं। उन्होंने बिहार की टीम के साथ जूनियर, सब-जूनियर और सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीते। बिहार की टीम ने जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक भी हासिल किया। बॉबी तीन बार विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुके हैं। इसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। भारतीय टीम ने सेपकटकरा में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इस एशियन गेम्स में बिहार के खिलाड़ी को यह पहला मेडल है। बिहार के बॉबी कुमार सेपकटकरा टीम में खेल रहे थे। टीम सेपकटकरा के मेंस क्वाड्रेंट सेमीफाइनल हार गई और उसे ब्रॉन्ज मेडल से ही संतोष करना पड़ा। इंडिया जापान के खिलाफ 0-2 (12-15, 13-15) से हार गई है। टीम ने इस गेम में दूसरा मेडल जीता है। टीम पहली बार 2018 में चैंपियन बनी थी। वहीं, एशियन गेम्स में अबतक बिहार के खिलाड़ी को मिला यह चौथा मेडल है। इसके अलावा, गुरुवार को इशान किशन और वैभव सूर्यवंशी से सजी भारतीय क्रिकेट टीम ने भी एशियन गेम्स के खिताबी मुकाबले में पहुंचकर रजत पदक पक्का कर लिया है। एशियन गेम्स में बिहार के अबतक 3 खिलाड़ी जीत चुके पदक एशियन गेम्स में अबतक बिहार के 3 खिलाड़ी देश के लिए पदक जीत चुके हैं। 2006 में दोहा एशियन गेम्स में भारतीय कबड्‌डी टीम ने स्वर्ण पदक जीता था। उस समय प्रदेश के राजीव कुमार टीम के सदस्य थे। 2010 में चीन में हुए एशियन खेल में सोना जीतने वाली टीम में मोकामा की स्मिता कुमारी शामिल थीं। 2014 में साउथ कोरिया में संपन्न प्रतियोगिता की ट्रैप शूटिंग टीम स्पर्धा में भारत को कांस्य पदक मिला था। टीम में वर्तमान में राज्य की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह भी शामिल थी। बचपन में क्रिकेट खेलने का था शौक पटना के कंकड़बाग निवासी बॉबी कुमार ने सेपक टकरा में बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। बॉबी को बचपन से ही खेलों में दिलचस्पी थी। शुरुआत में वे क्रिकेट खेलते थे। मगर परिवार पढ़ाई करने को प्राथमिकता देता था। वर्ष 2015 में उन्होंने सेपक टकरा का खेल देखा। इस खेल ने उन्हें आकर्षित किया और उन्होंने इसे सीखने का निर्णय लिया। मगर सेपक टकरा सीखना शुरू करने के बाद शुरुआती दौर में पारिवारिक दबाव के कारण उन्हें खेल छोड़ना पड़ा। SAI में हुआ सिलेक्शन उसके बाद बदली किस्मत उनका खेल के प्रति लगाव कम नहीं हुआ। उन्होंने फिर से मैदान पर वापसी की और नियमित अभ्यास शुरू किया। शुरुआती दौर में उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और खेल सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ा, क्योंकि बिहार में संसाधनों की कमी थी। 2018 से बिहार सरकार ने उन्हें इस खेल में आगे बढ़ाने के लिए सहयोग देना शुरू किया। उनका चयन भारतीय खेल प्राधिकरण यानी SAI के प्रशिक्षण केंद्र में हुआ। वहां उन्हें बेहतर खेल सुविधाएं मिलीं। उन्होंने बिहार की टीम के साथ जूनियर, सब-जूनियर और सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीते। बिहार की टीम ने जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक भी हासिल किया। बॉबी तीन बार विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुके हैं। इसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।  

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