उन्नाव में पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और नरोरा व हरिद्वार बांधों से छोड़े जा रहे पानी के कारण गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गुरुवार शाम छह बजे 112.82 मीटर दर्ज जलस्तर शुक्रवार सुबह बढ़कर 112.91 मीटर पहुंच गया। खतरे का निशान 113 मीटर है। ऐसे में गंगा का पानी अब खतरे के निशान से महज नौ सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर बढ़ने से गंगाघाट और आसपास के तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। कई मोहल्लों में पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है। प्रभावित परिवारों को घरों में रहने में परेशानी हो रही है और कई लोग छतों पर रहने को मजबूर हैं। बैराज के सभी 30 गेट पांच दिन से खुले पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रहने से नरोरा और हरिद्वार बांधों में पानी का दबाव बढ़ा है। इसके चलते वहां से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। इसका असर कानपुर स्थित गंगा बैराज पर भी पड़ा है। पानी का दबाव बढ़ने के कारण बैराज के सभी 30 गेट पिछले पांच दिनों से पूरी तरह खुले हैं। इससे गंगा में लगातार पानी बढ़ रहा है और उन्नाव के तटीय इलाकों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। तटीय मोहल्लों में घरों में घुसा पानी जलस्तर बढ़ने के साथ तेजीपुरवा, कर्बला, गोतखोर, सैय्यद कंपाउंड और मनसुख खेड़ा समेत कई इलाकों में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। पानी बढ़ने से लोगों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के साथ सुरक्षित स्थान पर जाने की चुनौती खड़ी हो गई है। कई परिवार घरों की छतों पर डेरा डालकर रहने को मजबूर हैं। मालवीय नगर में भी बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है। श्रीनगर इलाके में बड़ी संख्या में मकान बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। श्रीनगर की 18 फीट रोड पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ है। लोगों को पानी के बीच से होकर निकलना पड़ रहा है। जलस्तर और बढ़ने पर इस मार्ग पर आवागमन और प्रभावित होने की आशंका है। गांवों तक पहुंचा बाढ़ का पानी, फसलों पर संकट बाढ़ का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। फत्तेखेड़ा, गगनीखेड़ा और लक्ष्मीखेड़ा में पानी पहुंचने से प्रमुख मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है। खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। पीपरखेड़ा और गजियाखेड़ा में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खतरे के निशान से नौ सेंटीमीटर नीचे गंगा का जलस्तर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए नदी के खतरे के निशान 113 मीटर तक पहुंचने की आशंका बनी हुई है। गुरुवार शाम से शुक्रवार सुबह के बीच जलस्तर में नौ सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज हुई। आगे जलस्तर में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बांधों से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा पर निर्भर करेगा। हाई अलर्ट पर जिला प्रशासन, लेखपालों की लगाई ड्यूटी गंगा के खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंचने के बाद जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। तहसील प्रशासन को सक्रिय किया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और बाढ़ केंद्रों पर लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। लेखपाल जलस्तर और प्रभावित इलाकों की स्थिति की लगातार जानकारी प्रशासन को दे रहे हैं। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

