भारत ने अंतरिक्ष में अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाते हुए पहला एआई सैटेलाइट लॉन्च किया है। यह सैटेलाइट तस्वीरें खींचने के बाद उनका विश्लेषण अंतरिक्ष में ही कर सकेगा। यानी हर तस्वीर और पूरा डेटा धरती पर भेजने की जरूरत नहीं होगी। हैदराबाद की कंपनी टेकमीटस्पेस का एमओआई-1पी सैटेलाइट एक्सपोसैट-18 मिशन से लॉन्च किया गया। इसमें ऑर्बिटल कंप्यूटिंग की सुविधा है, जिससे एआई की मदद से अंतरिक्ष में ही डेटा को प्रोसेस किया जा सकेगा। इस तकनीक से खेती, खनन, बीमा, आपदा प्रबंधन और निगरानी जैसे क्षेत्रों में तेजी आ सकती है। अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन के बाद भारत ऐसी क्षमता वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। अंतरिक्ष में ही डेटा की छंटाई करेगा सैटेलाइट अभी सैटेलाइट से मिलने वाला डेटा पहले धरती पर भेजा जाता है। इसके बाद उसकी जांच और विश्लेषण होता है। नए सैटेलाइट में यह काम अंतरिक्ष में ही किया जा सकेगा। मसलन, अगर किसी सैटेलाइट ने 300 जीबी डेटा जुटाया है और उसमें से केवल 5 जीबी जानकारी काम की है, तो एआई जरूरी डेटा की पहचान करके वही जानकारी धरती पर भेज सकता है। इससे डेटा ट्रांसफर का समय और खर्च कम होगा। बाढ़ से खेती तक में इस्तेमाल इस तकनीक का इस्तेमाल बाढ़, जंगलों, फसलों, खनन क्षेत्रों और सीमा या जमीन की निगरानी में किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, बाढ़ की स्थिति में सैटेलाइट तस्वीरों से यह पता लगा सकता है कि पानी कितने इलाके में फैला है और फिर जरूरी जानकारी ही धरती पर भेज सकता है। सैटेलाइट में ऐसा क्या है खास 2028 में अंतरिक्ष में डेटा सेंटर की तैयारी कंपनी ने 2028 में अंतरिक्ष में बड़ा डेटा सेंटर बनाने की योजना भी बनाई है। इसके लिए 100-100 किलो वजन वाले ज्यादा क्षमता के सैटेलाइट भेजने की तैयारी है। इनमें बड़ी संख्या में ग्राफिक्स प्रोसेसर और करीब 100 टेराबाइट स्टोरेज रखने की योजना है। कई सैटेलाइट को जोड़कर अंतरिक्ष में ही डेटा का विश्लेषण करने की सुविधा विकसित करने का लक्ष्य है।
भारत का पहला AI सैटेलाइट लॉन्च:अंतरिक्ष में ही तस्वीरों का विश्लेषण करेगा; डेटा भेजने का समय-खर्च बचेगा, ऐसी क्षमता वाला दुनिया का चौथा देश

