पूर्व IAS Divya Mittal के सवाल उठाते ही Mirzapur के स्कूल भवन का निर्माण शुरू

पूर्व IAS Divya Mittal के सवाल उठाते ही Mirzapur के स्कूल भवन का निर्माण शुरू

मिर्जापुर (उप्र), एक अक्टूबर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की पूर्व अधिकारी दिव्या मित्तल की राजनीति में प्रवेश की घोषणा के साथ ही मिर्जापुर के एक दूरदराज गांव में स्कूल के उन्नयन की परियोजना चर्चा में आ गई है। मित्तल ने अपने राजनीतिक सफर की घोषणा करते हुए परियोजना के लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ने पर सवाल उठाए थे। अब इस विद्यालय भवन का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।

हलिया विकासखंड के लहुरियादह गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय के उन्नयन के लिए भवन निर्माण की प्रक्रिया बुधवार को शुरू हुई। यह कार्रवाई मित्तल द्वारा मंगलवार को जारी उस वीडियो के एक दिन बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिलाधिकारी के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान स्वीकृत परियोजना तीन साल तक आगे नहीं बढ़ी। जिला प्रशासन के अनुसार, विद्यालय के उन्नयन का प्रस्ताव वित्त वर्ष 2024-25 में शासन को भेजा गया था और वित्त वर्ष 2025-26 में राज्य परियोजना निदेशक से इसकी मंजूरी मिली।

विद्यालय भवन के निर्माण के लिए 25.58 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार वर्मा ने कहा, बुधवार को अधिकारियों ने जमीन की पैमाइश और सीमांकन किया तथा इसके बाद निर्माण प्रक्रिया शुरू की गई। परियोजना के लिए लालगंज के उपजिलाधिकारी ने 0.169 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई है।

मित्तल ने अपने राजनीतिक पदार्पण के ऐलान वाले वीडियो में बताया था कि जिलाधिकारी के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान पहाड़ी गांव की एक बुजुर्ग महिला उनके पास बच्चों की शिक्षा से जुड़ी समस्या लेकर आई थी और उस महिला ने व्यक्तिगत मदद मांगने के बजाय ऐसा विद्यालय बनाने का अनुरोध किया था, जहां बच्चे कक्षा पांच के बाद भी पढ़ाई जारी रख सकें। मित्तल के मुताबिक, नियमों के अनुरूप पड़ताल के बाद उन्होंने प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, लेकिन तीन साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ। उन्होंने इसे अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने के कारणों में से एक बताते हुए कहा था, यह धन, नियम या मंजूरी का सवाल नहीं था।

सब कुछ उपलब्ध था, लेकिन मंशा नहीं थी। मित्तल ने आईएएस अधिकारी के रूप में 13 साल की सेवा के बाद 30 अगस्त को इस्तीफा दे दिया था और 29 सितंबर को उत्तर प्रदेश से अपना राजनीतिक सफर शुरू करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा है कि वह फिलहाल किसी मौजूदा राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी और वह नागरिकों के साथ मिलकर ऐसा मंच बनाना चाहती हैं, जो उन लोगों की आवाज बने जिनकी शिकायतें सरकारी कार्यालयों तक नहीं पहुंच पातीं या वहां सुनी नहीं जातीं।

उनकी राजनीतिक घोषणा के बाद विभिन्न दलों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं आई हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को उनसे जुड़े एक सवाल पर कहा कि उन्हें तय करना होगा कि वह ‘हरा-लाल गमछा’ या किसी और रंग का गमछा पहनेंगी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी कहा था कि यदि मित्तल चुनाव लड़ना और समाज के लिए काम करना चाहती हैं तो पार्टी उनके बारे में विचार करेगी।

हालांकि, मित्तल ने अभी किसी राजनीतिक दल से जुड़ने या किसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की है। मित्तल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली और भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) बेंगलुरु की पूर्व छात्रा हैं। उन्होंने लंदन में काम करने के बाद 2013 में आईएएस अधिकारी के तौर पर सेवा शुरू की थी।

इससे पहले उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए भी हुआ था। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर के अलावा देवरिया और संत कबीर नगर की जिलाधिकारी के रूप में भी काम किया।

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