कैप्टन स्मित मच्छार के साले ने कहा- परिवार को उन पर गर्व, गुजरात में बेहतर स्वास्थ्य के लिए हुई पूर्जा-अर्चना

कैप्टन स्मित मच्छार के साले ने कहा- परिवार को उन पर गर्व, गुजरात में बेहतर स्वास्थ्य के लिए हुई पूर्जा-अर्चना

अहमदाबाद। भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी को पूरा विश्व सराह रहा है। उन्होंने घायल अवस्था में सूझबूझ से कई यात्रियों की जान बचाई। इस बीच कैप्टन स्मित मच्छार के ससुर जयसुख जोगी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार बेहद चिंतित था। उनके साले हिरण जोगी ने कहा कि परिवार को स्मित पर गर्व है और उनका उपचार चल रहा है। गुजरात के अमरेली जिले के सावरकुंडला के भाजपा विधायक महेश कसवाला ने भी मच्छार की प्रशंसा की। उन्होंने उन्हें सावरकुंडला का दामाद बताते हुए यात्रियों की सुरक्षा के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

अंबाजी मंदिर में सामूहिक प्रार्थना

वहीं दूसरी तरफ कैप्टन स्मित मच्छार के शीघ्र स्वस्थ होने और उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना को लेकर गुजरात के प्रमुख धार्मिक स्थलों में प्रार्थना और पूजा-अर्चना की गई। बनासकांठा जिला स्थित अंबाजी मंदिर में सामूहिक प्रार्थना की गई। वहीं प्रभास पाटण स्थित सोमनाथ मंदिर में कैप्टन मच्छार के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए विशेष प्रार्थना के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया गया। आरासुरी अंबाजी माता देवस्थान ट्रस्ट की ओर से मंदिर के पवित्र चाचर चौक में विशेष प्रार्थना कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें अंबाजी मंदिर परिसर के कर्मचारी, अंबिका संस्कृत महाविद्यालय के अध्यापक, ऋषिकुमार और मंदिर के पुजारी शामिल हुए।

सभी ने एक साथ मां जगदंबा की आराधना कर कैप्टन स्मित मच्छार के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। प्रार्थना में उनके जल्द पूरी तरह स्वस्थ होकर अपनी ड्यूटी पर लौटने की मंगलकामना की गई। अंबाजी मंदिर ट्रस्ट के व्यवस्थापक एवं अतिरिक्त कलक्टर कौशिक मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित के उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना सभा आयोजित की गई। सभी लोगों ने मां अंबा से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की। इसी तरह प्रभास पाटण स्थित सोमनाथ मंदिर में भी कैप्टन स्मित मच्छार के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए विशेष प्रार्थना की गई। मंदिर में उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना के साथ लगातार महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया गया।

शुरुआत में नहीं बनना था पायलट

करीबियों का कहना है कि मच्छार ने शुरुआत में पायलट बनने की योजना नहीं बनाई थी। उनका परिवार कपड़ा कारोबार से जुड़ा था और उन्होंने टेक्सटाइल इंजीनियरिंग की पढ़ाई इस उद्देश्य से की थी कि आगे चलकर वे पारिवारिक कारोबार में योगदान देंगे। करीब 19 वर्ष की उम्र में एक विमानन सेमिनार में शामिल होने के बाद उनके करियर की दिशा बदल गई। इस अनुभव से विमान उड़ाने में उनकी रुचि पैदा हुई और उन्होंने एविएशन को करियर बनाने का फैसला किया। वे पायलट की ट्रेनिंग के लिए न्यूजीलैंड गए और बाद में भारत लौटकर वाणिज्यिक विमानन क्षेत्र में करियर शुरू किया। फ्लाई दुबई की उड़ान में हुई इस घटना के बाद गुजरात मूल के पायलट स्मित मच्छार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं।

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