PUC नहीं पेट्रोल-डीजल नहीं, मेरठ में 203 पंपों पर एएनपीआर-कैमरे:पंप संचालकों ने कहा- भीड़ के बीच हर वाहन की जांच करना मुश्किल

PUC नहीं पेट्रोल-डीजल नहीं, मेरठ में 203 पंपों पर एएनपीआर-कैमरे:पंप संचालकों ने कहा- भीड़ के बीच हर वाहन की जांच करना मुश्किल

एक अक्टूबर से मेरठ समेत एनसीआर के सभी जिलों में बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसीसी) वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल और सीएनजी नहीं देने का प्रशासन ने निर्देश दिए गए थे। इसके लिए पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकगनेशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए जा रहे हैं। मेरठ जिले के 225 पेट्रोल पंपों में से 203 पर कैमरे लग चुके हैं, जबकि 22 पंप अभी भी कैमरे लगने का इंतजार कर रहे हैं। पूर्ति विभाग ने सभी पंपों को 30 सितंबर तक कैमरे लगाने के निर्देश दिए थे। पंप संचालक बोले- भीड़ में हर वाहन की जांच मुश्किल
सिविल लाइंस स्थित राजलोक पेट्रोल पंप के संचालक संजीप प्रताप सिंह ने कहा कि सरकार की मंशा प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से सही है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका पेट्रोल पंप संचालकों के लिए व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल पंपों पर पहले से स्टाफ की कमी रहती है। भीड़ के समय एक साथ 20-25 दोपहिया वाहन खड़े होते हैं। ऐसे में हर वाहन की नंबर प्लेट स्कैन कर पीयूसीसी की स्थिति जांचना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि पहले हेलमेट नहीं पहनने वाले दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं देने की व्यवस्था लागू करने की कोशिश हुई थी। उस दौरान भी कई पंपों पर ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच विवाद की स्थिति बनी। अब पीयूसीसी को लेकर भी ऐसे विवाद बढ़ने की आशंका है। पंप संचालक बोले- डाक्यूमेंट्स की जांच प्रशासन का काम
संजीप प्रताप सिंह ने कहा कि वाहन के डाक्यूमेंट्स पूरे हैं या नहीं, इसकी जांच पुलिस और संबंधित शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए। पेट्रोल पंप संचालकों पर इसकी जिम्मेदारी डालने से अनावश्यक विवाद बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को ईंधन देने के दौरान वैसे भी रोजाना किसी न किसी बात को लेकर विवाद की स्थिति बनती रहती है। ऐसे में पीयूसीसी जांच की जिम्मेदारी पंप कर्मचारियों पर डालने से समस्या और बढ़ सकती है। उन्होंने व्यवस्था लागू करने से पहले पंप संचालकों की व्यावहारिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए इसमें संशोधन की मांग की। जिला पूर्ति विभाग ने ऑयल कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि जिन पंपों पर एएनपीआर कैमरे नहीं लगे हैं, उन्हें ईंधन की आपूर्ति नहीं की जाए। जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि सभी पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरे लगाना अनिवार्य है। बिना कैमरे वाले पंपों को कैमरे लगने तक ईंधन की सप्लाई नहीं दी जाएगी। नियमों के तहत बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों में पेट्रोल-डीजल भरने पर संबंधित पंप का फ्यूल सेलिंग लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी हो सकती है। यह व्यवस्था उन पंपों पर लागू होगी, जहां पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बिक्री होती है। केवल सीएनजी बेचने वाले पंपों को इस नियम से छूट दी गई है। ऐसे होगी पीयूसीसी की जांच
पेट्रोल पंप पर वाहन पहुंचते ही एएनपीआर कैमरा उसकी नंबर प्लेट स्कैन करेगा। इसके बाद वाहन पोर्टल के डेटाबेस से वाहन के पीयूसीसी की वैधता जांची जाएगी। पीयूसीसी वैध होने पर ही ईंधन मिलेगा। यदि प्रमाण पत्र अवैध हुआ तो मशीन ईंधन देने से मना कर देगी। जिन पंपों पर अभी कैमरे नहीं लगे हैं, वहां कर्मचारियों के मोबाइल में पीयूसीसी एप स्थापित कराया जा रहा है। कर्मचारी वाहन नंबर डालकर पीयूसीसी की वैधता जांच सकेंगे।

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