पहले हंगरी ने रूस को दिया था झटका, अब पुतिन ने भी ले लिया बदला, राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश

पहले हंगरी ने रूस को दिया था झटका, अब पुतिन ने भी ले लिया बदला, राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश

Russia expels Hungarian diplomats: रूस और हंगरी के बीच राजनयिक तनाव अब खुलकर सामने आ गया है। सितंबर में हंगरी ने 10 रूसी राजनयिकों को देश से बाहर जाने का आदेश दिया था। अब मॉस्को ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हंगरी के राजनयिक कर्मचारियों को रूस छोड़ने का आदेश दिया है।

रूसी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि हंगरी के दूतावास और उसके सेंट पीटर्सबर्ग व कजान स्थित वाणिज्य दूतावासों के कुछ कर्मचारियों को रूस छोड़ना होगा। इन राजनयिकों की संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन उन्हें दो सप्ताह के भीतर रूस से बाहर जाने को कहा गया है।

क्यों हंगरी ने रूसी राजनयिकों को वापस भेजा?

मॉस्को ने इसे हंगरी की पिछली कार्रवाई का सीधा जवाब बताया है। सितंबर में बुडापेस्ट ने 10 रूसी राजनयिकों को निष्कासित किया था। उस समय हंगरी ने आरोप लगाया था कि इन लोगों ने राजनयिक दर्जे के अनुरूप नहीं आने वाली गतिविधियां की थीं। हालांकि, सरकार ने इन गतिविधियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी।

हंगरी ने कहा- तनाव बढ़ाना नहीं चाहता

रूस के फैसले पर हंगरी के विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है। उसने कहा कि उसे मॉस्को के कदम की जानकारी है। साथ ही बुडापेस्ट ने साफ किया कि वह दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव को और बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं रखता।

हंगरी की ओर से सितंबर में की गई कार्रवाई को भी रूस के साथ रिश्तों में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा गया था। हंगरी ने उस समय कहा था कि 10 रूसी मिशन कर्मचारियों की गतिविधियां वियना कन्वेंशन के तहत राजनयिकों के लिए स्वीकार्य नहीं थीं।

जासूसी के आरोपों के बीच बढ़ा तनाव

राजनयिक भाषा में किसी कर्मचारी की गतिविधियों को उसके दर्जे के अनुरूप नहीं बताना कई बार जासूसी के आरोपों की ओर इशारा करता है। हालांकि, हंगरी ने रूस के इन 10 अधिकारियों पर सीधे जासूसी करने का आरोप सार्वजनिक रूप से नहीं लगाया था।

रूस ने सितंबर में ही संकेत दे दिया था कि वह इस कदम का जवाब देगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि हंगरी की कार्रवाई का उचित जवाब दिया जाएगा, हालांकि उन्होंने साथ ही रूस और हंगरी के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने में रुचि भी जताई थी।

विक्टर ओर्बान के बाद बदल रही हंगरी की नीति

इस पूरे घटनाक्रम को हंगरी की विदेश नीति में बदलाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान करीब 16 साल सत्ता में रहने के बाद अप्रैल 2026 में चुनाव हार गए थे। उनके कार्यकाल में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हंगरी के करीबी संबंध रहे। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भी हंगरी ने रूस से तेल और गैस की खरीद जारी रखी थी।

अब प्रधानमंत्री पीटर मग्यार की सरकार यूरोपीय संघ और नाटो के साथ अपने रिश्तों को प्रमुखता देने की बात कह रही है। हालांकि ऊर्जा के मामले में रूस पर हंगरी की निर्भरता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सितंबर में भी बुडापेस्ट ने रूसी तेल और गैस से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों से मिली छूट को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी।

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