इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे खराब होने की स्थिति में पुलिस के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने कहा कि सीसीटीवी उपलब्ध न होने पर थाने में पूछताछ या गिरफ्तारी के लिए लाए गए हर व्यक्ति की एंट्री, पूछताछ और रिहाई का विवरण जीडी में तत्काल दर्ज करना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार सीसीटीवी सिस्टम चालू हो जाने के बाद उसे 24 घंटे, 365 दिन काम करना चाहिए। अगर सिस्टम खराब होता है तो एसएचओ को जीडी में खराबी का समय और इसकी सूचना जिस अधिकारी को लिखित रूप से दी गई, उसका विवरण दर्ज करना होगा। जिले के एसपी को भी सूचित कर सीसीटीवी को जल्द से जल्द ठीक कराना होगा। कैमरा बंद तो भी रिकॉर्ड मेनटेंन करें सीसीटीवी बंद रहने के दौरान पूछताछ के लिए बुलाए गए व्यक्ति की रिहाई का समय भी दर्ज करना होगा और पुलिस को उसकी रिहाई की रसीद लेनी होगी। इसमें यह भी दर्ज किया जाना चाहिए कि व्यक्ति को किसके साथ या किसके सुपुर्द किया गया। कोर्ट ने कहा कि इन सुरक्षा उपायों का पालन नहीं होने पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 119(जी) के तहत पुलिस के खिलाफ प्रतिकूल अनुमान लगाया जा सकता है। क्या है मामला? यह मामला राघवेंद्र दुबे की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें आसनसोल से उठाकर चित्रकूट के सरधुवा थाने लाया गया और अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पाया कि वह 13 जुलाई 2026 को सुबह 9 बजे थाने पहुंचे और 10:19 बजे जांच अधिकारी के साथ बाहर गए। उन्हें रात 8:24 बजे वापस थाने लाया गया, जबकि गिरफ्तारी मेमो में गिरफ्तारी का समय दोपहर 3:30 बजे दर्ज था। कोर्ट ने यह भी पाया कि थाने के अंदर की निगरानी करने वाले तीन सीसीटीवी कैमरों की फुटेज उपलब्ध नहीं थी, जबकि दो अन्य कैमरों की फुटेज मौजूद थी। अदालत ने माना कि गायब फुटेज को जानबूझकर डिलीट किया गया या डीवीआर में सेव नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी को रद्द करते हुए, यदि किसी अन्य मामले में आवश्यकता न हो तो याचिकाकर्ता की रिहाई का आदेश दिया और 24 घंटे की अवैध हिरासत के लिए 10,000 मुआवजा देने का निर्देश दिया।

