लखनऊ हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 88 गांवों में पेयजल संकट दूर करने के लिए प्रस्तावित वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) को मामले की गंभीरता समझने की नसीहत दी। संबंधित उप जिलाधिकारियों (SDM) को 28 अक्टूबर को अगली सुनवाई पर हाजिर रहने का निर्देश है। यह आदेश उत्कर्ष लोक सेवा संस्थान की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने दिया। सरकार ने बताया कि पांच प्लांट में से एक के लिए बख्शी का तालाब के नगवामऊ गांव में जमीन आवंटित हुई और 231.52 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। बाकी चार प्लांटों के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया जारी है। DM ने बताया कि अपर जिलाधिकारी ने SDM को जमीन चिह्नित करने के निर्देश 16 सितंबर को दिए थे, जबकि कोर्ट ने यह आदेश 19 अगस्त को दिया था। इस देरी पर खंडपीठ ने नाराजगी जताई।

