पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को बुधवार को जेल से रिहा कर दिया गया। प्रधान ने जेल से बाहर आने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने से पहले नामांकन वापस लेने के लिए दबाव डाला था और बदले में उनकी मांगें पूरी करने की पेशकश भी की थी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने प्रधान को 2007 में उनके खिलाफ दर्ज छह आपराधिक मामलों में मंगलवार को अंतरिम जमानत दे दी थी।
तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नीत गुट के नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार प्रधान के समर्थन की घोषणा करने के कुछ ही समय बाद उन्हें इन आपराधिक मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया गया था। पूर्व मेदिनीपुर जिले के हल्दिया उप-सुधार गृह के बाहर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रधान का स्वागत किया। प्रधान ने कहा कि वह छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए तुरंत प्रचार शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा, “मैं आज से ही चुनाव प्रचार शुरू कर दूंगा। अब ज्यादा समय नहीं बचा है। नंदीग्राम के लोग चाहते हैं कि कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि यहीं का बेटा उपचुनाव जीते।
मुझे अपनी जीत का पूरा भरोसा है।”
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव के लिए प्रचार चार अक्टूबर को थम जाएगा। उपचुनाव के लिए वोट छह अक्टूबर को डाले जाएंगे, जबकि मतगणना नौ अक्टूबर को की जाएगी। प्रधान ने आरोप लगाया कि 18 सितंबर को सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने उन्हें चांदीपुर से उठाया और उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर मंदारमनी के एक होटल ले गए।
उन्होंने कहा, “दिन भर चुनाव प्रचार करने के बाद मैं चांदीपुर में आराम कर रहा था, तभी सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने मुझे जबरदस्ती उठा लिया। उन्होंने गाड़ी में मेरी आंखों पर गमछा बांध दिया। मुझे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था।
हालांकि, मुझे इस बात का अंदाजा जरूर हो रहा था कि मुझे मंदारमनी की तरफ ले जाया जा रहा है।”
प्रधान ने दावा किया कि उन्हें लिफ्ट से होटल के कमरे में ले जाया गया और इस दौरान भी उनकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी। उन्होंने कहा, “मुझसे पूछा गया-बताइए आपको क्या चाहिए। आपको जो चाहिए, कल तक मिल जाएगा।
बस आप अपनी उम्मीदवारी वापस ले लीजिए।”
कांग्रेस नेता ने कहा, “वहां कुछ आईपीएस अधिकारी और एक डीएसपी (पुलिस उपाधीक्षक) मौजूद थे। मैंने उनसे कहा कि मैं अपनी विचारधारा की वजह से राजनीति में हूं और ऐसा (उम्मीदवारी वापस लेना) नहीं कर सकता।”
प्रधान ने दावा किया कि देर रात करीब ढाई-तीन बजे उन्हें आंखों पर पट्टी बांधकर चांदीपुर वापस ले जाया गया और फिर गिरफ्तार कर लिया गया। उच्च न्यायालय ने कांग्रेस उम्मीदवार को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत प्रदान करते हुए नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रचार करने की अनुमति दे दी।
नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे से खाली हुई थी। उन्होंने साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों सीट पर जीत हासिल की थी और बाद में भवानीपुर सीट अपने पास रखने और नंदीग्राम सीट छोड़ने का फैसला किया था। प्रधान ने दावा किया कि उन्हें जेल में इसलिए रखा गया, ताकि वह नंदीग्राम नहीं पहुंच सकें।
उन्होंने आरोप लगाया, “(2007 के) जिस जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने शुभेंदु अधिकारी को पहचान दिलाई और जिस मामले में वह (शुभेंदु) खुद भी शामिल हैं, उसका इस्तेमाल मुझे जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से परेशान करने के लिए किया गया।”
शुभेंदु 2007 में तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थे। वह साल 2021 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। इस साल विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री का पद संभाला।
प्रधान ने कहा कि जब उन्हें ले जाया जा रहा था, तो उन्हें शुरू में डर लगा था कि उनकी हत्या कर दी जाएगी। कांग्रेस नेता ने नंदीग्राम में विकास के दावों पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि वहां कंक्रीट की कुछ सड़कों के निर्माण के अलावा कोई खास काम नहीं हुआ है। प्रधान ने कहा, “यहां (नंदीग्राम) के लोग अब भी तालाबों का पानी पीते हैं।
सत्ता परिवर्तन लोगों की लाशों पर हुआ। अब भी 10 लोग लापता हैं। यहां जल्दी चुनाव क्यों हो रहे हैं?
क्योंकि वह (शुभेंदु) नंदीग्राम छोड़ चुके हैं।”
प्रधान ने नंदीग्राम से हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाने के भाजपा के फैसले पर भी सवाल उठाए। हसीरानी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पूर्व सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जिनकी इस साल छह मई को चुनाव बाद हिंसा के दौरान हत्या कर दी गई थी। प्रधान ने कहा, “हसीरानी एक मां हैं।
हम मांओं का सम्मान करते हैं। लेकिन भाजपा ने यहां (नंदीग्राम) किसी बाहरी व्यक्ति को चुनाव मैदान में उतारा है। क्यों?
क्या यहां का कोई बेटा टिकट का हकदार नहीं था?”
राज्य सरकार के उनकी अंतरिम जमानत को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने के सवाल पर प्रधान ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले झूठे, बेबुनियाद और मनगढ़ंत हैं। शुभेंदु के इस बयान का जिक्र करते हुए कि उनकी पार्टी (भाजपा) को चुनाव कराना आता है, प्रधान ने कहा कि यह एक धमकी जैसा है। उन्होंने कहा, “हमें लोकतंत्र की रक्षा करनी है।

