दिल्ली में PG और हॉस्टल छात्रों के लिए बने मॉनिटरिंग कमिटी, High Court ने मांगा जवाब

दिल्ली में PG और हॉस्टल छात्रों के लिए बने मॉनिटरिंग कमिटी, High Court ने मांगा जवाब

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एक नई जनहित याचिका (PIL) पर सभी संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। इस याचिका में दिल्ली में पेइंग गेस्ट (PG) अकोमोडेशन, किराए के फ्लैट और प्राइवेट हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और भलाई की निगरानी के लिए एक खास सिस्टम बनाने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा और निर्देश दिया कि इस याचिका को कोर्ट में पहले से लंबित मुख्य मामलों के साथ 14 अक्टूबर, 2026 को लिस्ट किया जाए। याचिकाकर्ता की ओर से वकील आशु बिधूड़ी पेश हुए। यह नई PIL दिल्ली यूनिवर्सिटी के PGDAV कॉलेज के दूसरे साल के छात्र शिवांश कालिया ने 6 सितंबर को सत्य निकेतन में एक इमारत गिरने की घटना के बाद दायर की है। इस घटना में पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। याचिकाकर्ता खुद दिल्ली के राजौरी गार्डन में किराए के मकान में रहते हैं। 

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इस याचिका में कॉलेज, यूनिवर्सिटी और बड़े स्टूडेंट या कोचिंग-हब लेवल पर ‘स्टूडेंट अकोमोडेशन एडवाइजरी और मॉनिटरिंग कमिटी’ बनाने की मांग की गई है, ताकि प्राइवेट घरों में रहने वाले स्टूडेंट्स की सुरक्षा और दूसरी समस्याओं को हल किया जा सके। याचिकाकर्ता का कहना है कि पढ़ाई के लिए दिल्ली आने वाले बहुत से स्टूडेंट्स, कॉलेज/यूनिवर्सिटी के हॉस्टल की सीमित सुविधाओं के कारण PG, किराए के फ्लैट और प्राइवेट हॉस्टल पर निर्भर रहते हैं। याचिका में कहा गया है कि स्टूडेंट्स के पास असुरक्षित बिल्डिंग, आग का खतरा, भीड़-भाड़, सफाई की समस्या, शोषण, ज़्यादा पैसे वसूलने और उत्पीड़न जैसी समस्याओं की रिपोर्ट करने और संबंधित अधिकारियों से उन पर कार्रवाई करवाने के लिए कोई खास सिस्टम नहीं है। इस नई PIL के लिए सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने की घटना को मुख्य वजह बताया गया है। याचिका के अनुसार, इस घटना ने स्टूडेंट्स के रहने की जगह के तौर पर इस्तेमाल होने वाली बिल्डिंग की स्ट्रक्चरल सुरक्षा, आग से सुरक्षा और रेगुलेटरी निगरानी से जुड़ी चिंताओं को उजागर किया। इसमें बिल्डिंग गिरने से पहले हुए निर्माण और मरम्मत के काम की रिपोर्ट और बिल्डिंग के मंज़ूर किए गए स्ट्रक्चर पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट की 7 सितंबर की उन टिप्पणियों का भी ज़िक्र किया है जो सत्य निकेतन की घटना से जुड़ी कार्यवाही के दौरान की गई थीं। कोर्ट ने शुरुआती तौर पर माना था कि ऐसी घटनाओं की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ PG हॉस्टल के मालिक की नहीं होती, बल्कि बिल्डिंग से जुड़े नियमों और रेगुलेशन का पालन सुनिश्चित करने में यूनिवर्सिटी अधिकारियों और MCD की भी ज़िम्मेदारी होती है। नई याचिका में यह सुझाव दिया गया है कि कमेटियों के पास 24×7 स्टूडेंट हेल्पलाइन, एक खास ईमेल एड्रेस और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल होना चाहिए, जिसके ज़रिए स्टूडेंट्स रहने की जगह से जुड़ी समस्याओं की रिपोर्ट कर सकें। इसमें स्ट्रक्चरल, इलेक्ट्रिकल, आग से सुरक्षा और सफाई से जुड़ी जांच के लिए MCD, दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस और दूसरे संबंधित अधिकारियों के साथ समय-समय पर सुरक्षा जांच और तालमेल बिठाने की भी मांग की गई है। असुरक्षित या बिना मंज़ूरी वाली रहने की जगहों के मामलों को कार्रवाई के लिए संबंधित कानूनी अधिकारियों को भेजा जा सकता है।

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