साइबर फ्रॉड के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक आरोपी को दरभंगा साइबर थाना की पुलिस ने उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के फतेहपुर थाना क्षेत्र के औरंगाबाद गांव निवासी मायाराम के पुत्र अर्जुन कुमार के रूप में हुई है। पुलिस उसे गिरफ्तार कर दरभंगा ले आई है। जानकारी के अनुसार, इस मामले में साइबर थाना कांड संख्या 67/2023 दर्ज किया गया था। अनुसंधान के दौरान पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी की पहचान और उसके ठिकाने का पता लगाया। अनुसंधानकर्ता इंस्पेक्टर रंजीत शर्मा पुलिस टीम के साथ उसके गांव पहुंचे। स्थानीय पुलिस के सहयोग से अर्जुन कुमार को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद दरभंगा से पुलिसकर्मियों को भेजकर उसे दरभंगा लाया गया। पासपोर्ट सत्यापन के नाम पर भेजा था फर्जी लिंक पीड़ित अशोक कुमार चौधरी, निवासी गोविंदपुर, बहादुरपुर के आवेदन के अनुसार, 23 सितंबर 2023 को उनके पुत्र के मोबाइल पर मैसेज आया कि पासपोर्ट का सही पता नहीं होने के कारण पासपोर्ट होल्ड पर है। इसके बाद पासपोर्ट कार्यालय के नाम से ई-मेल और मोबाइल के माध्यम से संपर्क किया गया। 26 सितंबर को एक व्यक्ति ने दिल्ली पासपोर्ट ऑफिस के नाम पर संपर्क कर पासपोर्ट का पता सत्यापित करने के लिए लिंक भेजने की बात कही। लिंक के माध्यम से यूपीआई से पांच रुपए भुगतान करने को कहा गया। पीड़ित के पुत्र ने एसबीआई खाते से गूगल-पे के जरिए पांच रुपए का भुगतान कर दिया। 27 सितंबर को पीड़ित के बैंक अकाउंट से निकली रकम पीड़ित के मुताबिक, अगले दिन यानी 27 सितंबर को दोपहर करीब 3 से 3:30 बजे के बीच पीड़ित के बैंक खाते से अचानक 99,852 रुपए निकल गए। खाते से रकम कटने के बाद पीड़ित ने तत्काल बैंक में शिकायत की और साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। डायल 1930 पर सूचना देने के बाद पुलिस की कार्रवाई में 44 हजार रुपए फ्रीज किए गए, जबकि शेष रकम साइबर अपराधियों ने निकाल ली। परिजन समेत सात लोग पहुंचे साइबर थाना अर्जुन की गिरफ्तारी के बाद मंगलवार दोपहर उसके गांव से परिजन समेत सात लोग साइबर थाना पहुंचे। वहां उन्होंने मामले की जानकारी ली। पुलिस आरोपी से साइबर ठगी के नेटवर्क और अन्य घटनाओं में उसकी भूमिका को लेकर पूछताछ कर रही है। साइबर थाना पुलिस के अनुसार, अब तक साइबर फ्रॉड एवं फोटो-वीडियो वायरल करने से संबंधित 61 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें सात मामलों में कुल नौ आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। साइबर फ्रॉड के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक आरोपी को दरभंगा साइबर थाना की पुलिस ने उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के फतेहपुर थाना क्षेत्र के औरंगाबाद गांव निवासी मायाराम के पुत्र अर्जुन कुमार के रूप में हुई है। पुलिस उसे गिरफ्तार कर दरभंगा ले आई है। जानकारी के अनुसार, इस मामले में साइबर थाना कांड संख्या 67/2023 दर्ज किया गया था। अनुसंधान के दौरान पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी की पहचान और उसके ठिकाने का पता लगाया। अनुसंधानकर्ता इंस्पेक्टर रंजीत शर्मा पुलिस टीम के साथ उसके गांव पहुंचे। स्थानीय पुलिस के सहयोग से अर्जुन कुमार को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद दरभंगा से पुलिसकर्मियों को भेजकर उसे दरभंगा लाया गया। पासपोर्ट सत्यापन के नाम पर भेजा था फर्जी लिंक पीड़ित अशोक कुमार चौधरी, निवासी गोविंदपुर, बहादुरपुर के आवेदन के अनुसार, 23 सितंबर 2023 को उनके पुत्र के मोबाइल पर मैसेज आया कि पासपोर्ट का सही पता नहीं होने के कारण पासपोर्ट होल्ड पर है। इसके बाद पासपोर्ट कार्यालय के नाम से ई-मेल और मोबाइल के माध्यम से संपर्क किया गया। 26 सितंबर को एक व्यक्ति ने दिल्ली पासपोर्ट ऑफिस के नाम पर संपर्क कर पासपोर्ट का पता सत्यापित करने के लिए लिंक भेजने की बात कही। लिंक के माध्यम से यूपीआई से पांच रुपए भुगतान करने को कहा गया। पीड़ित के पुत्र ने एसबीआई खाते से गूगल-पे के जरिए पांच रुपए का भुगतान कर दिया। 27 सितंबर को पीड़ित के बैंक अकाउंट से निकली रकम पीड़ित के मुताबिक, अगले दिन यानी 27 सितंबर को दोपहर करीब 3 से 3:30 बजे के बीच पीड़ित के बैंक खाते से अचानक 99,852 रुपए निकल गए। खाते से रकम कटने के बाद पीड़ित ने तत्काल बैंक में शिकायत की और साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। डायल 1930 पर सूचना देने के बाद पुलिस की कार्रवाई में 44 हजार रुपए फ्रीज किए गए, जबकि शेष रकम साइबर अपराधियों ने निकाल ली। परिजन समेत सात लोग पहुंचे साइबर थाना अर्जुन की गिरफ्तारी के बाद मंगलवार दोपहर उसके गांव से परिजन समेत सात लोग साइबर थाना पहुंचे। वहां उन्होंने मामले की जानकारी ली। पुलिस आरोपी से साइबर ठगी के नेटवर्क और अन्य घटनाओं में उसकी भूमिका को लेकर पूछताछ कर रही है। साइबर थाना पुलिस के अनुसार, अब तक साइबर फ्रॉड एवं फोटो-वीडियो वायरल करने से संबंधित 61 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें सात मामलों में कुल नौ आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।

