प्रत्येक विद्यालय में खेल कैलेंडर तैयार किया जाएगा, विद्यालय मॉनिटर और कक्षा मॉनिटर बनाए जाएंगे

प्रत्येक विद्यालय में खेल कैलेंडर तैयार किया जाएगा, विद्यालय मॉनिटर और कक्षा मॉनिटर बनाए जाएंगे

जिले के 23 मॉडल स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था को और बेहतर बनाने की कवायद तेज कर दी गई है। इन विद्यालयों को चरणबद्ध तरीके से सेंटर फॉर एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की तैयारी है। बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों और गैर-शिक्षकीय कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए टीचर ऑफ द मंथ और स्टार ऑफ द मंथ पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रत्येक मंगलवार को यूनिट टेस्ट आयोजित किया जाएगा। कमजोर छात्रों को चिह्नित कर उन पर विशेष ध्यान देने की व्यवस्था की जाएगी। शिक्षकों और विद्यार्थियों के कक्षा में मोबाइल लेकर जाने पर भी रोक रहेगी। इन स्कूलों में पठन-पाठन, नियमित मूल्यांकन, विद्यार्थियों की उपस्थिति, अनुशासन, शिक्षकों की भूमिका और अभिभावकों की भागीदारी को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जिला शिक्षा पदाधिकारी विद्यानंद ठाकुर ने सभी मॉडल स्कूलों के एचएम और एमएम को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए हैं। मॉडल स्कूलों में विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन और अनुशासन पर विशेष फोकस किया जाएगा। इसी कड़ी में 30 सितंबर को पहली बार अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी आयोजित होगी। इसमें विद्यार्थियों की पढ़ाई, नियमित यूनिट टेस्ट, उपस्थिति और विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में अभिभावकों से संवाद किया जाएगा। बच्चों की प्रगति के साथ उनकी समस्याओं और अभिभावकों के सुझावों पर भी चर्चा होगी। जिले के 23 मॉडल स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक कुल 17,969 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनके लिए 673 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षा विभाग का उद्देश्य इन विद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के उदाहरण के रूप में विकसित करना है। यहां प्रभावी साबित होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों को अन्य सरकारी विद्यालयों में भी लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। हर स्कूल में विद्यालय मॉनिटर और कक्षा मॉनिटर बनाए जाएंगे। एचएम की अध्यक्षता में गठित शिक्षकों की समिति इनके चयन की प्रक्रिया पूरी करेगी। समय-समय पर मॉनिटर बदले भी जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक विद्यालय में खेल कैलेंडर तैयार किया जाएगा। खेल गतिविधियों के साथ विद्यालयवार एथलेटिक्स क्लब भी गठित किया जाएगा। जिले के 23 मॉडल स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था को और बेहतर बनाने की कवायद तेज कर दी गई है। इन विद्यालयों को चरणबद्ध तरीके से सेंटर फॉर एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की तैयारी है। बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों और गैर-शिक्षकीय कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए टीचर ऑफ द मंथ और स्टार ऑफ द मंथ पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रत्येक मंगलवार को यूनिट टेस्ट आयोजित किया जाएगा। कमजोर छात्रों को चिह्नित कर उन पर विशेष ध्यान देने की व्यवस्था की जाएगी। शिक्षकों और विद्यार्थियों के कक्षा में मोबाइल लेकर जाने पर भी रोक रहेगी। इन स्कूलों में पठन-पाठन, नियमित मूल्यांकन, विद्यार्थियों की उपस्थिति, अनुशासन, शिक्षकों की भूमिका और अभिभावकों की भागीदारी को प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जिला शिक्षा पदाधिकारी विद्यानंद ठाकुर ने सभी मॉडल स्कूलों के एचएम और एमएम को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए हैं। मॉडल स्कूलों में विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन और अनुशासन पर विशेष फोकस किया जाएगा। इसी कड़ी में 30 सितंबर को पहली बार अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी आयोजित होगी। इसमें विद्यार्थियों की पढ़ाई, नियमित यूनिट टेस्ट, उपस्थिति और विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में अभिभावकों से संवाद किया जाएगा। बच्चों की प्रगति के साथ उनकी समस्याओं और अभिभावकों के सुझावों पर भी चर्चा होगी। जिले के 23 मॉडल स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक कुल 17,969 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनके लिए 673 शिक्षक कार्यरत हैं। शिक्षा विभाग का उद्देश्य इन विद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के उदाहरण के रूप में विकसित करना है। यहां प्रभावी साबित होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों को अन्य सरकारी विद्यालयों में भी लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। हर स्कूल में विद्यालय मॉनिटर और कक्षा मॉनिटर बनाए जाएंगे। एचएम की अध्यक्षता में गठित शिक्षकों की समिति इनके चयन की प्रक्रिया पूरी करेगी। समय-समय पर मॉनिटर बदले भी जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक विद्यालय में खेल कैलेंडर तैयार किया जाएगा। खेल गतिविधियों के साथ विद्यालयवार एथलेटिक्स क्लब भी गठित किया जाएगा।  

​

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *