गोपालगंज में बाढ़ के पानी में मिला ‘सुंदरी कछुआ’:पीठ पर दिख रहे A-B-C-D जैसे निशान; पैरों को ढक लेते हैं खोल के फ्लैप

गोपालगंज में बाढ़ के पानी में मिला ‘सुंदरी कछुआ’:पीठ पर दिख रहे A-B-C-D जैसे निशान; पैरों को ढक लेते हैं खोल के फ्लैप

गोपालगंज जिले में बाढ़ के पानी के बीच एक ‘सुंदरी कछुआ’ मिला है। जिसका वैज्ञानिक नाम लिस्सेमिस पंक्टाटा (Lissemys punctata) है। कछुए को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। इसकी पीठ पर बने प्राकृतिक निशान लोगों के लिए कौतूहल का विषय बने हुए हैं। कछुए के सख्त खोल पर पीले रंग की धारियां और अलग-अलग आकृतियां बनी हुई हैं। इन्हें देखने पर अंग्रेजी के A, B, C, D समेत कई अक्षरों जैसी आकृतियां नजर आती हैं। पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे कछुए के खोल पर किसी ने अक्षर बनाए हों। हालांकि, ये निशान प्राकृतिक रूप से बने हुए बताए जा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निचले खोल पर त्वचा के विशेष ‘फ्लैप’ (परत) होते हैं, जो खतरा महसूस होने पर इसके पैरों को पूरी तरह ढककर सुरक्षा प्रदान करते हैं। सामान्य कछुओं से अलग दिखती है बनावट स्थानीय लोगों के अनुसार, कछुए के पैर और गर्दन की बनावट भी सामान्य तौर पर दिखने वाले कछुओं से अलग है। इसे देखने के बाद लोग इसे दुर्लभ प्रजाति का कछुआ बता रहे हैं। बाढ़ के पानी के साथ इसके इलाके में पहुंचने की भी चर्चा है। वन विभाग ने बताया दुर्लभ प्रजाति का कछुआ वन विभाग के अधिकारी के अनुसार, कछुओं की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। यह कछुआ उन्हीं में से एक है। उन्होंने बताया कि यह दुर्लभ प्रजाति उत्तर भारत के स्थिर जलाशयों में पाई जाती है। यह बहने वाले पानी यानी नदी या नहर में नहीं रहता। अधिकारी के अनुसार, इसकी दुर्लभता के कारण ऐसे कछुए बहुत कम देखने को मिलते हैं। लाखों कछुओं में एक-दो ही इस तरह के मिलते हैं। फिलहाल कछुए को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुट रही है। गंडक में बाढ़ से जलीय जीव आ रहे ग्रामीणों का कहना है कि अलग अलग तरह की मछलियां, कछुए और अन्य जलीय जीव ग्रामीण इलाके में देखे जा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से गंडक की बाढ़ के साथ ये जीव आ रहे हैं। दरअसल, गोपालगंज में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नदी में 5.42 लाख क्यूसेक पानी बह रहा है, जिससे पतहरा-सिंहोरवा छरकी पर दबाव काफी बढ़ गया है। सिंहोरवा गांव के पास छरकी से 10 से 15 जगहों पर रिसाव शुरू हो गया है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी रिसाव रोकने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। इंजीनियरों ने बताया कि नदी का पानी कई जगहों पर छरकी के ऊपर से बहने की स्थिति में है और सभी जगहों पर मरम्मत का काम जारी है। पानी बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोग परेशान हैं। रिसाव की खबर से गांवों में डर का माहौल है और लोग माल-मवेशियों के साथ सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं। कई गांवों में घरों में भी पानी घुस गया है। जिला प्रशासन ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है। डीएम ने पतहरा छरकी और दूसरे तटबंधों का जायजा लिया। पतहरा, सिंहोरवा, मेहंदिया, हिरापाकड़, रामनगर, मंगूरहा जागीरी टोला, मालाही टोला, सलेमपुर और टंडसपुर तटबंध पर खास निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों को अगले 24 से 48 घंटे अहम बताते हुए नदी की ओर न जाने की सलाह दी है। गोपालगंज जिले में बाढ़ के पानी के बीच एक ‘सुंदरी कछुआ’ मिला है। जिसका वैज्ञानिक नाम लिस्सेमिस पंक्टाटा (Lissemys punctata) है। कछुए को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। इसकी पीठ पर बने प्राकृतिक निशान लोगों के लिए कौतूहल का विषय बने हुए हैं। कछुए के सख्त खोल पर पीले रंग की धारियां और अलग-अलग आकृतियां बनी हुई हैं। इन्हें देखने पर अंग्रेजी के A, B, C, D समेत कई अक्षरों जैसी आकृतियां नजर आती हैं। पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे कछुए के खोल पर किसी ने अक्षर बनाए हों। हालांकि, ये निशान प्राकृतिक रूप से बने हुए बताए जा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निचले खोल पर त्वचा के विशेष ‘फ्लैप’ (परत) होते हैं, जो खतरा महसूस होने पर इसके पैरों को पूरी तरह ढककर सुरक्षा प्रदान करते हैं। सामान्य कछुओं से अलग दिखती है बनावट स्थानीय लोगों के अनुसार, कछुए के पैर और गर्दन की बनावट भी सामान्य तौर पर दिखने वाले कछुओं से अलग है। इसे देखने के बाद लोग इसे दुर्लभ प्रजाति का कछुआ बता रहे हैं। बाढ़ के पानी के साथ इसके इलाके में पहुंचने की भी चर्चा है। वन विभाग ने बताया दुर्लभ प्रजाति का कछुआ वन विभाग के अधिकारी के अनुसार, कछुओं की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। यह कछुआ उन्हीं में से एक है। उन्होंने बताया कि यह दुर्लभ प्रजाति उत्तर भारत के स्थिर जलाशयों में पाई जाती है। यह बहने वाले पानी यानी नदी या नहर में नहीं रहता। अधिकारी के अनुसार, इसकी दुर्लभता के कारण ऐसे कछुए बहुत कम देखने को मिलते हैं। लाखों कछुओं में एक-दो ही इस तरह के मिलते हैं। फिलहाल कछुए को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुट रही है। गंडक में बाढ़ से जलीय जीव आ रहे ग्रामीणों का कहना है कि अलग अलग तरह की मछलियां, कछुए और अन्य जलीय जीव ग्रामीण इलाके में देखे जा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से गंडक की बाढ़ के साथ ये जीव आ रहे हैं। दरअसल, गोपालगंज में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नदी में 5.42 लाख क्यूसेक पानी बह रहा है, जिससे पतहरा-सिंहोरवा छरकी पर दबाव काफी बढ़ गया है। सिंहोरवा गांव के पास छरकी से 10 से 15 जगहों पर रिसाव शुरू हो गया है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी रिसाव रोकने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। इंजीनियरों ने बताया कि नदी का पानी कई जगहों पर छरकी के ऊपर से बहने की स्थिति में है और सभी जगहों पर मरम्मत का काम जारी है। पानी बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोग परेशान हैं। रिसाव की खबर से गांवों में डर का माहौल है और लोग माल-मवेशियों के साथ सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं। कई गांवों में घरों में भी पानी घुस गया है। जिला प्रशासन ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है। डीएम ने पतहरा छरकी और दूसरे तटबंधों का जायजा लिया। पतहरा, सिंहोरवा, मेहंदिया, हिरापाकड़, रामनगर, मंगूरहा जागीरी टोला, मालाही टोला, सलेमपुर और टंडसपुर तटबंध पर खास निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों को अगले 24 से 48 घंटे अहम बताते हुए नदी की ओर न जाने की सलाह दी है।  

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