श्रावस्ती के जमुनहा क्षेत्र में रविवार को राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों में नदी का पानी घुस गया था। दर्जनों घरों और दुकानों में पानी भरने से लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। कई परिवारों ने छतों पर रात गुजारी, जबकि घरों के चूल्हे तक पानी में डूब गए। विद्यालय भी जलमग्न हो गया था, वहीं मंगलवार सुबह 8:00 बजे जलस्तर खतरे के निशान से नीचे पहुंचने से लोगों को काफी राहत मिली है। राहत की बात यह है कि सोमवार से नदी का जलस्तर घटने लगा और मंगलवार सुबह राप्ती खतरे के निशान 127.70 मीटर से नीचे पहुंच गई। इसके साथ ही प्रभावित गांवों से पानी तेजी से निकलने लगा है, हालांकि पानी उतरने के बाद घरों और रास्तों में जमा कीचड़ ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। ग्रामीण अजय पाठक ने बताया कि उनके घर के साथ कंपोजिट विद्यालय में भी पानी भर गया था। कक्षाओं से लेकर प्रधानाध्यापक कार्यालय तक पानी पहुंच गया था। अब जलस्तर घटने के बाद विद्यालय और घरों से पानी तेजी से निकल रहा है। वीरपुर, लौकीहा, पटना समेत कई गांव भी प्रभावित हुए। ग्रामीण जलील अहमद और नरेश ने बताया कि रविवार दोपहर पानी गांव में घुसना शुरू हुआ था। पानी बढ़ता देख परिवारों ने छतों पर पहुंचकर रात गुजारी। सोमवार को प्रशासन ने विद्यालयों में छुट्टी घोषित कर बच्चों को राहत दी। बाढ़ और बारिश के पानी से किसानों की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। एसडीएम जमुनहा रवि प्रताप सिंह ने बताया कि प्रभावित फसलों का लेखपालों के माध्यम से सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर किसानों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी। राप्ती का जलस्तर नीचे आने से ग्रामीणों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन गांवों में जमा कीचड़, खराब हुई फसलें और जलभराव से हुए नुकसान की भरपाई में अभी समय लगेगा।

