उदासीन ऋषि आश्रम में 3 अक्टूबर से विशेष आयोजन:अयोध्या सहित प्रदेश के 20 जिलों के संत और भक्त शामिल होंगे

उदासीन ऋषि आश्रम में 3 अक्टूबर से विशेष आयोजन:अयोध्या सहित प्रदेश के 20 जिलों के संत और भक्त शामिल होंगे

उदासीन ऋषि आश्रम रानोपाली में 3 से 5 अक्टूबर तक विशेष धार्मिक आयोजन किया गया है।समारोह में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह,सीएम योगी आदित्यनाथ सहित कई मंत्रियों,सैकड़ों महंतों सहित करीब 25 हजार भक्त शामिल होंगे।यह प्रदेश के करीब 20 जिलों से आऐंगे। समारोह के लिए विशाल आश्रम परिसर और समाधि मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया है। विशेष समारोह का आरंभ 3 अक्टूबर को श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति के साथ संतों के महामिलन के साथ होगा। 4 अक्टूबर को श्रीरामचरितमानस के अखंड पाठ का शुभारंभ किया जाएगा। 5 अक्टूबर को मानस पाठ की पूर्णाहुति के बाद सुबह 10 बजे श्रीधर्म ध्वजा पूजन होगा। इसके बाद सुबह 11 बजे श्री नारायण संस्कृत महाविद्यालय भवन का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। इसी अवसर पर धार्मिक महोत्सव में अयोध्या सहित आसपास के जिलों के करीब 25 हजार भक्तों की मौजूदगी रहेगी। अनेक प्रकार के धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। फिलहाल 27 सिंतबर को श्रीमद भागवत कथा महोत्सव के शुभारंभ से लेकर आगामी आयोजनों तक आश्रम परिसर में संतों के सान्निध्य, कथा, धार्मिक अनुष्ठानों और सेवा-भक्ति की निरंतर धारा प्रवाहित हो रही है। रानोपाली स्थित श्री उदासीन संगत ऋषि आश्रम में रविवार को श्री गुरुपर्व महामहोत्सव का श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच शुभारंभ हुआ। समाधिस्थ सिद्ध महापुरुषों की पुण्यस्मृति में आयोजित इस महोत्सव के प्रथम दिन श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। कथा व्यास डॉ. स्वामी शिवचंद्र दास महाराज, अध्यक्ष अखिल भारतीय रामतीर्थ मिशन, देहरादून ने श्रीमद्भागवत के महात्म्य का वर्णन किया। श्रद्धालुओं को भक्ति, गुरुसेवा और सनातन परंपराओं का संदेश दिया। कथा की अमृतमयी वाणी सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। आश्रम परिसर में दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों के चलते वातावरण भक्तिमय बना रहा। महोत्सव के दौरान संतों के आशीर्वचन, श्रीमद्भागवत कथा, अखंड रामायण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और वृहद भंडारे सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। पूर्वाचार्यों और समाधिस्थ संतों का स्मरण गुरुपर्व के आयोजक और रानोपाली आश्रम के महंत डॉ. स्वामी भरत दास महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा में पितृपक्ष पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष अवसर है। इसी अवधि में गुरुपर्व के माध्यम से पूर्वाचार्यों और समाधिस्थ संतों का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा पूर्वाचार्यों द्वारा स्थापित की गई है और इसे निरंतर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से गुरुदेव के चरणों में श्रद्धा अर्पित करने के साथ गुरुसेवा तथा संत परंपरा से निरंतर जुड़े रहने का आह्वान किया।

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