भास्कर संवाददाता | भैरूंदा तहसील के ग्राम पांडागांव में भैरूंदा-खातेगांव राज्य राजमार्ग-22 पर सीप नदी पर बना उच्चस्तरीय पुल निर्माण के करीब 22 महीने में ही तीसरी बार क्षतिग्रस्त हो गया है। करीब 9.48 करोड़ रुपए की लागत से बने पुल के ऊपरी हिस्से में जगह-जगह बड़े गड्ढे हो गए हैं और कई स्थानों पर सरिया बाहर निकल आई है। इससे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है और पुल की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। पुल का लोकार्पण 30 नवंबर 2024 को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर और विधायक रामाकांत भार्गव की मौजूदगी में हुआ था। स्थानीय लोगों के अनुसार पुल की सड़क इससे पहले भी दो बार खराब हो चुकी है। दोनों बार मरम्मत कराई गई, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही स्थिति बन गई। पुल की स्थिति और मरम्मत को लेकर सेतु निर्माण विभाग की एसडीओ वर्तिका तोमर से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। 12 से 14 गड्ढे, रात में चालकों को ज्यादा खतरा रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों के मुताबिक पुल पर करीब 12 से 14 गड्ढे हो गए हैं। कई गड्ढे इतने बड़े हैं कि दोपहिया वाहन चालकों को उन्हें पार करने में परेशानी होती है। रात में पर्याप्त दृश्यता नहीं होने से दुर्घटना की आशंका और बढ़ जाती है। कई जगह सरिया बाहर निकलने से खतरा और गंभीर हो गया है। कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष सुनील गोलिया ने कहा कि करोड़ों रुपए की लागत से बने पुल की हालत इतनी जल्दी खराब होना निर्माण गुणवत्ता की जांच का विषय है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के इसी मार्ग से गुजरने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।नागरिक सुरेश चंद सेठी ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता जांच मौके पर पर्याप्त रूप से नहीं की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर पुल की वास्तविक स्थिति देखने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की। लोगों ने लोक निर्माण विभाग से तत्काल गड्ढों की मरम्मत कराने के साथ पुल की निर्माण गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बार-बार मरम्मत के बजाय समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।

