अलीगढ़ में बारिश ने किसानों की खेत से लेकर मंडी तक चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को दिनभर रिमझिम बारिश और तेज हवाओं के बीच कटाई के लिए तैयार धान की फसल खेतों में बिछ गई। जिले में अभी करीब 65 से 70 प्रतिशत कटाई योग्य धान खेतों में खड़ा था। बारिश में भीगे और जमीन पर गिरे धान के दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। इससे किसानों को खेत में नुकसान के साथ मंडी में कम भाव मिलने का भी डर है। उधर, शनिवार को धनीपुर मंडी में करीब 50 हजार बोरी धान पहुंचा, लेकिन बारिश के कारण पल्लेदारों ने काम नहीं किया। इससे तौल, उठान और बिक्री का काम रुक गया। मंडी में कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियां धान लेकर खड़ी रहीं। प्लेटफॉर्म और आढ़तियों के यहां उतारी गई उपज को तिरपाल से ढककर रखा गया है। लगातार नमी के कारण किसानों और आढ़तियों को फसल की गुणवत्ता खराब होने की चिंता है।
खेत में बिछी फसल, दाने की गुणवत्ता पर असर धान की कटाई का समय चल रहा है। किसानों के मुताबिक बारिश से पहले करीब 25 से 30 प्रतिशत फसल ही कट पाई थी। बाकी धान खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ा था। तेज हवा और बारिश के कारण कई जगह पौधे जमीन पर गिर गए। खेत में गिरी फसल की कटाई में भी अब परेशानी होगी। लगातार नमी रहने से दाने की चमक और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। ऐसे धान को मंडी में अपेक्षित भाव मिलने में भी दिक्कत आ सकती है। अलीगढ़ में 1.65 लाख हेक्टेयर में धान वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक अलीगढ़ में 1,65,247 हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी। जिले में धान का उत्पादन 4,91,610 मीट्रिक टन रहा, जबकि उत्पादकता 29.75 कुंतल प्रति हेक्टेयर थी। इस समय बारिश का असर इसलिए ज्यादा है क्योंकि फसल कटाई के दौर में है। धान के अलावा जिले में 69,931 हेक्टेयर में बाजरा और 3,996 हेक्टेयर में मक्का बोया गया था। इन फसलों में भी कटाई के लिए तैयार पौधों के गिरने और दाने में नमी बढ़ने का खतरा है। 50 हजार बोरी धान मंडी में पहुंचा, काम ठप धनीपुर गल्ला मंडी में शनिवार को करीब 50 हजार बोरी धान पहुंचा। बारिश के कारण पल्लेदारों ने काम नहीं किया। इससे तौल और बिक्री का काम रुक गया। कई किसानों की उपज ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ही खड़ी रही। आढ़ती तनिष्क प्रताप सिंह ने बताया कि काफी धान मंडी में नीचे उतर चुका है, जबकि कुछ ट्रॉलियों में खड़ा है। इसे तिरपाल से ढककर रखा गया है। उनका कहना है कि मौसम साफ रहा तो रविवार को अवकाश के बावजूद मंडी खोलकर रुकी हुई तौल और बिक्री शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि किसानों और आढ़तियों को ज्यादा नुकसान न हो। 72 घंटे में देनी होगी फसल नुकसान की सूचना कृषि विभाग ने अतिवृष्टि और जलभराव से प्रभावित किसानों को 72 घंटे के भीतर फसल नुकसान की सूचना देने को कहा है। संयुक्त कृषि निदेशक श्रवण कुमार के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बीमित किसान टोल-फ्री नंबर 14447 पर नुकसान की सूचना दर्ज करा सकते हैं। किसान संबंधित फसल बीमा कंपनी या कृषि विभाग के कर्मचारी और अधिकारी को भी जानकारी दे सकते हैं। सूचना देते समय किसान का नाम, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, केसीसी या बैंक खाता, बीमा पॉलिसी नंबर, गांव-तहसील, फसल का नाम, प्रभावित क्षेत्रफल और नुकसान का विवरण देना होगा। अब मौसम साफ होने का इंतजार किसानों की नजर अब मौसम पर है। सिकंदरपुर माछूआ, हरदुआगंज के किसान सुमित प्रताप सिंह ने बताया कि गांवों में धान के साथ मक्का और बाजरा भी कटाई के लिए तैयार खड़ा है। बारिश से कई जगह फसल बिछ गई है। इससे दाने की गुणवत्ता और बाजार भाव दोनों प्रभावित होने की आशंका है। अब अगले एक-दो दिन में मौसम साफ होने और खेतों में बिछी फसल की स्थिति से ही नुकसान का वास्तविक अंदाजा लग सकेगा। वहीं रविवार को धनीपुर मंडी में रुकी हुई तौल और बिक्री शुरू होती है या नहीं, इस पर भी किसानों की नजर है।

