Trump Rejects Iran Plan: ईरान का प्लान खारिज, डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम पर दुनिया की नजर; हॉर्मुज पर बढ़ा तनाव!

Trump Rejects Iran Plan: ईरान का प्लान खारिज, डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम पर दुनिया की नजर; हॉर्मुज पर बढ़ा तनाव!

US Iran Tensions: हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की ईरान की कोशिश फिलहाल अमेरिकी रुख से टकराती दिख रही है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मध्यस्थों के जरिए वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत आगे बढ़ी थी, लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रस्ताव को ठुकराने की बात कही है। दूसरी ओर, ईरान अभी भी अमेरिका की औपचारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है। ऐसे में दुनिया की अहम ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े इस समुद्री मार्ग पर तनाव फिर बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

Trump Rejects Iran Plan: कूटनीतिक कोशिशों को लगा झटका

ईरान और अमेरिका के बीच पर्दे के पीछे चल रही कूटनीतिक कवायद को बड़ा झटका लगा है। रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान ने अमेरिका के सामने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और क्षेत्र में जारी संघर्ष को रोकने की पहल रखी थी। यह प्रस्ताव कतर के मध्यस्थों के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया गया था।

ईरान की शर्तें और जलडमरूमध्य खोलने का रोडमैप

ईरानी प्रस्ताव के मुताबिक, अमेरिका अगर ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है, ईरानी तेल बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में राहत देता है और युद्धविराम का पालन करता है, तो तेहरान सात दिन के भीतर हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की दिशा में कदम उठा सकता है। इसके साथ परमाणु कार्यक्रम पर रुकी बातचीत फिर शुरू करने की पेशकश भी की गई थी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया था कि शुरुआती प्रक्रियाओं में चार से पांच दिन लग सकते हैं और छठे दिन जलडमरूमध्य खोला जा सकता है।

राष्ट्रपति ट्रंप का प्रस्ताव खारिज करने का फैसला

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ईरान की इस पहल को स्वीकार नहीं किया। CNA ने रॉयटर्स के हवाले से बताया कि ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरानी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उनका कहना था कि तेहरान हॉर्मुज को खोलने के लिए समझौता इसलिए चाहता है क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों से उसे आर्थिक नुकसान हो रहा है।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक असर

हॉर्मुज का महत्व केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में शामिल है और सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल तथा गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने से तेल की कीमतों, समुद्री परिवहन और आयात पर निर्भर देशों पर असर पड़ सकता है।

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की अटकलें

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू अमेरिकी सैन्य नीति से जुड़ी रिपोर्टें हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) के हवाले से कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ट्रंप के सहयोगियों के बीच नवंबर के अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर फिर सैन्य कार्रवाई शुरू करने की संभावना को लेकर चर्चा हुई है। हालांकि, प्रस्तावित कार्रवाई का आकार या समय निश्चित नहीं बताया गया है और अमेरिकी रुख बदलने की संभावना भी रिपोर्टों में दर्ज है।

वॉशिंगटन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

ईरान की ओर से फिलहाल गेंद अमेरिका के पाले में होने का संकेत दिया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में वॉशिंगटन की आधिकारिक प्रतिक्रिया यह तय करने में अहम होगी कि हॉर्मुज को लेकर बातचीत दोबारा पटरी पर लौटती है या मध्य-पूर्व में तनाव का एक नया दौर शुरू होता है।

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