भोपाल के मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट शनिवार को जारी कर दिया गया है। अब इंदौर की बारी है, क्योंकि हमारा पिछला मास्टर प्लान 2021 में ही समाप्त हो चुका है। पांच साल से नए प्लान का इंतजार हो रहा है। हालांकि अफसरों का दावा है शहर का मास्टर प्लान-2041 भी तैयार हो चुका है। शासन से मंजूरी मिलना बाकी है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने सर्वे, भूमि उपयोग अध्ययन और अन्य रिपोर्टों के आधार पर ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यालय को भेज दिया है। सूत्रों का कहना है कि नए प्लान में 2041 की 53 लाख आबादी को आधार बनाया गया है। प्लानिंग एरिया 505 से 880 वर्ग किमी होगा। नियोजन क्षेत्र में गांवों की संख्या 90 से 169 हो जाएगी। नया मास्टर प्लान 2041 की अनुमानित 53 लाख आबादी के हिसाब से बनाया गया है। 2021 में आबादी का अनुमान 35.66 लाख था। अफसरों का दावा इंदौर की तैयारी भी पूरी है, ड्रॉफ्ट मुख्यालय को भेजा जा चुका है ड्राफ्ट मुख्यालय भेज दिया है
^सभी सर्वे, एनालिसिस के बाद ड्राफ्ट प्लान का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा जा चुका है। फैसला होने के बाद मास्टर प्लान जारी किया जाएगा। – डॉ. शुभाशीष. बनर्जी, संयुक्त संचालक, टीएंडसीपी नक्शा, सर्वे और मेन बुक भी तैयार
मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया में सबसे पहले प्लानिंग एरिया तय किया जाता है। इसके बाद मौजूदा भूमि उपयोग का अध्ययन, सर्वे, वेबकास्ट और विभिन्न रिपोर्टों के आधार पर भविष्य की जरूरतों का आकलन किया जाता है। इसके आधार पर ड्राफ्ट और प्लान की बुक तैयार होती है। अधिकारियों के मुताबिक इंदौर में यह पूरा काम हो चुका है। ड्राफ्ट शासन के पास है। प्रशासनिक मंजूरी के बाद जारी किया जाएगा।
दावे-आपत्ति के बाद 6 माह में फाइनल
ड्राफ्ट जारी होने के बाद आम लोगों से दावे-आपत्तियां मांगी जाएंगी। इनकी सुनवाई के लिए धारा 17-क के तहत कमेटी बनेगी। इसमें जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। फिर प्लान को अंतिम रूप देकर लागू करने की प्रक्रिया पूरी होगी। इसमें करीब छह महीने का समय लगता है। भोपाल में यह प्रक्रिया शनिवार से ही शुरू हो चुकी है। मंत्री का दावा… इंदौर का प्लान भी जल्द आएगा नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, इंदौर के मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट भी अब शीघ्र ही जारी किया जाएगा। इससे शहर के सुनियोजित विकास को नई दिशा मिलेगी। भोपाल ग्रोथ कॉरिडोर, नए बायपास का प्रस्ताव 51 किमी का ग्रोथ कॉरिडोर : नर्मदापुरम रोड पर 11 मील-मिसरोद से इंदौर रोड तक करीब 51 किमी लंबे मौजूदा पूर्वी बायपास को ग्रोथ कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है। बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट में असीमित एफएआर का प्रस्ताव है। इससे मुंबई की तरह 50-100 मंजिला इमारतों का रास्ता खुलेगा। भारी वाहनों के लिए नया बायपास
ग्रोथ कॉरिडोर पर भारी वाहनों का दबाव कम रखने नर्मदापुरम रोड से फंदा के पास इंदौर रोड तक 83.18 किमी लंबी व 60 मीटर चौड़ी आउटर रिंग रोड प्रस्तावित है। इसका बड़ा हिस्सा प्लानिंग एरिया से बाहर होगा। सड़क के आसपास हरियाली व निर्माण के नियम लैंड यूज के हिसाब से तय होंगे। पुराना भोपाल होगा हेरिटेज टूरिज्म जोन
पुराने भोपाल को हेरिटेज टूरिज्म से जोड़ने का प्रस्ताव है। किले, दरवाजे, महल और दूसरी ऐतिहासिक इमारतों को सहेजने के साथ आसपास होटल, रिसॉर्ट और पर्यटन गतिविधियां बढ़ाई जाएंगी। पांच साल की देरी… का असर -बाहरी सीमा में अनियोजित विकास, अवैध कॉलाेनियां और सड़कों की चाैड़ाई को लेकर विवाद अवैध कॉलोनियों का विस्तार: मास्टर प्लान का इंतजार लंबा होने से शहर की सीमा से लगे इलाकों में अनियोजित बसाहट बढ़ी। सैकड़ों अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया अटकी हुई है। मास्टर प्लान की सड़कें अधूरी : शहर की कई प्रस्तावित सड़कों पर जमीन, अतिक्रमण और निर्माण बाधक हैं। छावनी, मूसाखेड़ी समेत कई हिस्सों में सड़क के लिए बाधक निर्माण हटाए भी गए थे। सड़क की चौड़ाई पर विवाद : पुराने प्लान की सड़कों को लेकर विवाद सामने आए। हाईकोर्ट के सामने भी बात आई कि समाप्त हो चुके प्लान के आधार पर सड़क की चौड़ाई कैसे तय की जा सकती है। शहर बढ़ा, प्लान पीछे रह गया: 2021 के बाद इंदौर का शहरी फैलाव हुआ, जबकि नया नियोजन दस्तावेज अभी लागू नहीं हुआ। यही वजह है कि 79 नए गांवों में विकास ठप है। विकास के फैसलों में असमंजस : नई बसाहट, सड़क, जमीन के उपयोग और निर्माण से जुड़े फैसलों में पुराने प्लान और बदलती जमीनी स्थिति के बीच तालमेल की चुनौती बनी हुई है। 375 वर्ग किमी बढ़ेगा दायरा : नया प्लान लागू होने पर नियोजन क्षेत्र 505 से बढ़कर 880 वर्ग किमी और गांव 90 से बढ़कर 169 होंगे। बड़े क्षेत्र को एक साथ नियोजित करने की चुनौती होगी।

