कूनो नेशनल पार्क से निकलकर 1 सितंबर को बारां के जंगल में पहुंची चीता वीरा को कूनो नेशनल पार्क की टीम ने शनिवार को बांझ आमली क्षेत्र से ट्रेंकुलाइज कर वापस ले गई। चीता गत 26 दिन से बारां के शाहाबाद, किशनगंज में मूवमेंट कर रही थी। इसके पहले अगस्त में भी चीता वीरा बारां में आई और 2-3 दिन में प्राकृतिक रुप से वापस लौट गई थी। लेकिन इसके बाद आने के बाद यहां के प्राकृतिक माहौल में चीता वीरा ढल गई थी। साथ ही लगातार शिकार भी कर रही थी। बारां जिले में साल 2025 से लगातार चीता का मूवमेंट कूनों से हो रहा है। लेकिन इसके बाद भी चीता को स्थाई रुप से बसाने के लिए कोई इंतजाम नही हो रहे है। जबकि मध्य प्रदेश में चल रहे देश के पहले चीता प्रोजेक्ट में बारां को शामिल किया जा चुका है। दोनों स्टेट के बीच 17 हजार वर्ग किलोमीटर का चीता कॉरिडोर बनना प्रस्तावित है। इसमें चीता खुले में घूम सकेंगे। बारां के अलावा इस चीता प्रोजेक्ट में राजस्थान के 7 जिले शामिल है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से जारी एक्शन प्लान के अनुसार भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून ने कूनो-गांधीसागर लैंडस्केप का निर्धारण किया है। इसमें मध्यप्रदेश का 10 हजार 500 वर्ग किमी क्षेत्र और राजस्थान का 6500 वर्ग किमी क्षेत्र आएगा। कॉरिडोर में चीते कूनो नेशनल पार्क से राजस्थान के मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से होते हुए गांधी सागर सेंचुरी तक मूव कर सकेंगे।

