वाराणसी आ रहा ‘बाहुबली ट्रक’, हटिए! रास्ता दीजिये…:बेल्जियम से लखीमपुर खीरी का सफर कर रहा तय, लदा है 180 टन वजनी शुगर मिल वेसल

वाराणसी आ रहा ‘बाहुबली ट्रक’, हटिए! रास्ता दीजिये…:बेल्जियम से लखीमपुर खीरी का सफर कर रहा तय, लदा है 180 टन वजनी शुगर मिल वेसल

बलरामपुर चीनी मिल यूनिट और एथेनॉल प्लांट के लिए मंगाया गया वेसल बेल्जियम से चलकर यूपी पहुंच गया है। यह वेसल वाराणसी से होकर लखीमपुरखीरी के कुंभी गांव स्थित बलरामपुर चीनी मिल की यूनिट पहुंचेगा। 308 पहिये की बाहुबली ट्रक पर मौजूद 180 टन का यह वेसल कौतूहल का विषय बना हुआ है। शुक्रवार को यह चंदौली से वाराणसी के लिए रवाना हुआ था। उस समय चंदौली में हजारों लोग हाइवे पर इसे देखने के लिए उमड़े थे। आज शाम तक इसके वाराणसी पहुंचने का अनुमान है। देखिये बाहुबली ट्रक और उसपर लदे चीनी मिल वेसल की फोटो… कैमूर के रस्ते पहुंचा उत्तर प्रदेश के चंदौली ओडिशा के पाराद्वीप से इसे पहले झारखंड होते हुए बिहार के रोहतास, गया, औरंगाबाद और कैमूर पहुंचाया गया। अब यह चंदौली के रास्ते यूपी में प्रवेश करने के बाद वाराणसी से गुजरेगा। ऐसे में NHAI ने खास इंतजाम किए हैं। वाराणसी में गुजरने पर कई फुट ओवरब्रिज हैं। जिन्हे अस्थायी रूप से कुछ हिस्सा हटाने की कवायद भी की जा रही है। इसके अलावा डाफी टोल प्लाजा पर अलग से लेन बनाई गई है। 308 चक्कों का है बाहुबली ट्रक बाहुबली ट्रक जिसमें 308 चक्के हैं। वह 24 घंटे में महज 8 से 10 किलोमीटर ही चल रहा है। जब यह बड़ा ट्रक हाईवे से गुजरता है, तो राहगीर और आसपास के लोग कुछ देर के लिए रुक जाते हैं। लोग अपने मोबाइल फोन से इसकी तस्वीरें और वीडियो बनाते दिख रहे हैं। बताया गया है कि यह वेसल उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के कुंभी गांव स्थित बलरामपुर चीनी मिल यूनिट के लिए जरूरी सामान है। लखीमपुर खीरी जिले के गोला गोकर्णनाथ तहसील क्षेत्र के कुंभी (Kumbhi) में स्थित Balrampur Chini Mills Ltd. की कुंभी चीनी मिल एक प्रमुख चीनी उत्पादक इकाई है। लॉजिस्टिक्स कंपनी जेएम बक्सी हैवी को जिम्मेदारी मशीन और ट्रेलर का कुल वजन 200 टन से भी ज्यादा होने की वजह से यह काफिला बहुत ही धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। लॉजिस्टिक्स कंपनी जेएम बक्सी हैवी की निगरानी में चल रहा यह महा-ट्रक पूरे दिन में केवल 8 से 10 किलोमीटर का सफर ही तय कर पाता है। पूरे रास्ते में पड़ने वाले पुलों की भार क्षमता, तीखे मोड़ों और ओवरहेड बिजली तारों की पहले से ही पूरी इंजीनियरिंग जांच की जा रही है ताकि किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सके।

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