देवरिया में मर्चेंट नेवी में काम करने वाले 23 वर्षीय सूरज यादव की मौत की खबर मिलते ही उनके पिता ओमप्रकाश यादव कुवैत से घर पहुंचे। शुक्रवार शाम करीब साढ़े 5 बजे घर पहुंचते ही वे अपने भाई अवधेश यादव के गले लगकर फूट-फूटकर रोने लगे। बेटे की मौत से पहले से ही परिवार में मातम पसरा था। परिवार की आर्थिक मदद के लिए मर्चेंट नेवी में की थी नौकरी सूरज चार भाइयों में सबसे बड़े थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उन्होंने मर्चेंट नेवी में वाइपर के पद पर नौकरी शुरू की थी। उन्हें करीब 40 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता था। उनके पिता ओमप्रकाश यादव लंबे समय से कुवैत में काम कर रहे हैं। परिवार के मुताबिक, सूरज नौकरी के जरिए घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहते थे। 19 अगस्त को वे मुंबई से ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे। मौत से कुछ घंटे पहले चाचा से हुई थी बात बुधवार सुबह करीब 11 बजे सूरज ने अपने चाचा अवधेश यादव से फोन पर बात की थी। इस दौरान उन्होंने चाचा को जहाज भी दिखाया था। परिजनों के मुताबिक, उस समय सूरज बिल्कुल सामान्य नजर आ रहे थे। बातचीत के कुछ घंटे बाद ही परिवार को उनकी मौत की खबर मिली। ओमान के तट के पास जहाज में लगी थी आग बताया गया कि ओमान के तट के पास मालवाहक जहाज एमवी केप दाओ पर हमला हुआ था। हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में आग लग गई। रॉयल नेवी ऑफ ओमान ने जहाज पर सवार 27 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकालकर उन्हें चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई थी। इसी घटना के बाद सूरज की मौत की खबर परिवार तक पहुंची। अब परिजन उनके पार्थिव शरीर के भारत आने का इंतजार कर रहे हैं। मां, दादा-दादी और भाइयों का रो-रोकर बुरा हाल सूरज की मौत के बाद घर में उनकी मां पुष्पा देवी, दादा रामा यादव, दादी पाना देवी, भाई सनी, समीर और साहिल समेत चाचा अवधेश यादव का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोग बार-बार सूरज को याद कर रहे हैं और उनके पार्थिव शरीर के घर आने का इंतजार कर रहे हैं।

