Waste Segregation: घर में रोज निकलने वाला कचरा अगर सही तरीके से नहीं संभाला जाए तो इसका असर सिर्फ आसपास की सफाई पर नहीं पड़ता, बल्कि हवा, पानी और मिट्टी भी प्रभावित हो सकती है। इसका असर लोगों की सेहत पर भी पड़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, गलत तरीके से कचरा निपटाने से पानी, मिट्टी और हवा के प्रदूषण के जरिए स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। वहीं संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के मुताबिक, खराब कचरा मैनेजमेंट से पीने का पानी गंदा हो सकता है और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
इसी वजह से कचरे को सिर्फ घर से बाहर निकाल देना ही काफी नहीं है। उसे किस तरह अलग रखा जाता है और आगे किस तरह संभाला जाता है, यह भी बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं सही कचरा मैनेजमेंट से सेहत और आसपास के माहौल को क्या फायदा हो सकता है।
मच्छरों का खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जब कचरा सही तरीके से नहीं उठाया जाता या खुले में पड़ा रहता है, तो कचरे के आसपास पानी जमा हो सकता है। ऐसे जमा पानी से मच्छरों के पनपने की जगह बन सकती है और मलेरिया तथा डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
पानी और मिट्टी के प्रदूषित होने का खतरा
कचरे को खुले में फेंकने या गलत जगह जमा करने से उसके आसपास की मिट्टी और पानी प्रभावित हो सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार, खराब कचरा मैनेजमेंट से पानी और मिट्टी गंदी हो सकती है। खुले और ठीक से नहीं बनाए गए लैंडफिल से पीने के पानी तक गंदगी पहुंच सकती है और संक्रमण फैलने का खतरा भी रहता है।
धुएं से बचना भी है जरूरी
कचरे को खुले में जलाना भी सही तरीका नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, खतरनाक कचरे को खुले में जलाने या गलत तरीके से संभालने से कचरा उठाने वाले लोगों और आसपास रहने वाले लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए कचरे को खुले में जलाने के बजाय उसे अलग करके सही जगह देना जरूरी है।
ई वेस्ट को सामान्य कचरे में न मिलाएं
पुराने मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान को ई वेस्ट कहा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, गलत तरीके से संभाला गया ई वेस्ट और उसमें मौजूद कुछ चीजें सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। इसका असर छोटे बच्चों की सेहत और विकास पर खास तौर पर पड़ सकता है। इसलिए ऐसे सामान को सामान्य घर के कचरे से अलग रखना जरूरी है।
सही कचरा मैनेजमेंट क्यों जरूरी है
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार, कचरे को कम करना, उसे सही तरीके से इकट्ठा करना, अलग करना, दोबारा इस्तेमाल या रीसाइक्लिंग करना और बाकी कचरे को सुरक्षित तरीके से संभालना से सिर्फ आसपास की सफाई बेहतर नहीं होती, बल्कि हवा, पानी और मिट्टी के प्रदूषण से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
अलग अलग कचरा रखना क्यों जरूरी है?
नीति आयोग (NITI Aayog) की गाइडलाइन के मुताबिक, जहां कचरा पैदा होता है वहीं उसे अलग करना आगे की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाता है। अगर गीला और सूखा कचरा पहले से अलग है तो बाद में पूरे कचरे के ढेर में से उसे अलग करने की जरूरत कम पड़ती है। इससे कचरे को रीसाइकिल और प्रोसेस करना भी आसान होता है।
गीला और सूखा कचरा अलग रखने से क्या फायदा है?
नीति आयोग (NITI Aayog) के अनुसार, अलग रखा गया कचरा दूसरे कचरे के साथ मिलने से बचता है। इससे सूखे कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए भेजना आसान होता है, जबकि गीले कचरे को कंपोस्टिंग या दूसरी प्रक्रिया में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
चार तरह से रखें कचरा
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 के तहत 1 अप्रैल 2026 से कचरे को चार हिस्सों में अलग रखना जरूरी किया गया है। इसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और स्पेशल केयर कचरा शामिल हैं। गीले कचरे में रसोई का कचरा, फल और सब्जियों के छिलके, मांस और फूल जैसी चीजें आती हैं। सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच, लकड़ी और रबर जैसी चीजें शामिल हैं।
सैनिटरी कचरे में इस्तेमाल किए गए डायपर, सैनिटरी पैड, टैम्पोन और कंडोम जैसी चीजें आती हैं। वहीं स्पेशल केयर कचरे में पेंट के डिब्बे, बल्ब, पारा वाले थर्मामीटर और कुछ दवाएं शामिल हैं। इन कचरों को अलग रखने से इन्हें आगे सही तरीके से संभालना और प्रोसेस करना आसान हो सकता है।

